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News in Short
- 40 एसोसिएट प्रोफेसर पद साल 2024 में स्वीकृत हुए थे।
- पद नियमों के अनुसार पदोन्नति से भरे जाने थे।
- सीधी भर्ती के विज्ञापन को शिक्षकों ने दी चुनौती।
- हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर सशर्त रोक लगाई।
- अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
News in detail
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में एसोसिएट प्रोफेसर के 40 पदों पर सीधी भर्ती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत योग्य प्रोफेसर्स ने प्रमोशन न देकर सीधी भर्ती को गलत बताया है। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम फैसले के अधीन कर दिया गया है।
प्रमोशन के पदों पर सीधी भर्ती का आरोप
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में एसोसिएट प्रोफेसर के 40 पदों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ये सभी पद साल 2024 में स्वीकृत हुए थे। नियमों के अनुसार इन्हें पदोन्नति के जरिए भरा जाना था। इसके बावजूद मध्यप्रदेश कर्मचारी मंडल (esb) ने इन पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया।
योग्य असिस्टेंट प्रोफेसरों की अनदेखी
मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में लगभग 12 महिला असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं। इनका कहना है कि उनके पास एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए जरूरी योग्यता और अनुभव मौजूद है। बावजूद इसके शासन द्वारा प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। सीधे बाहरी भर्ती की तैयारी की जा रही है, जिसे उन्होंने नियमों के खिलाफ बताया।
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हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
इस पूरे मामले को लेकर डॉक्टर प्रवीणा सूर्यवंशी, श्वेता ठाकुर, गायत्री वर्मा सहित अन्य ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। यह याचिका WP 1123/2026 के तहत दाखिल की गई। इसमें एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर की जा रही सीधी भर्ती को चुनौती दी गई।
सरकार और याचिकाकर्ता के तर्क
सुनवाई के दौरान एमपी सरकार ने मौखिक रूप से कहा कि यदि प्रमोशन संभव नहीं हो तो सीधी भर्ती की जा सकती है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। अधिवक्ता पंकज दुबे और अजीत शुक्ल ने दलीलें दीं। प्रमोशन न करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है। याचिकाकर्ता पूरी तरह योग्य हैं और उनसे नियमित रूप से कार्य भी लिया जा रहा है।
भर्ती पर सशर्त रोक, नोटिस जारी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अदालत ने आदेश दिया। जस्टिस विशाल धगत की एकल पीठ ने फैसला सुनाया। एसोसिएट प्रोफेसर भर्ती याचिका अंतिम निर्णय पर निर्भर रहेगी। कर्मचारी मंडल और भारतीय नर्सिंग काउंसिल को नोटिस जारी हुए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
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