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INDORE. EOW ने एक बार फिर आर्थिक अनियमितताओं के मामले में एक साथ दो FIR दर्ज की है। इसमें एक इंदौर का मामला है जिसमें करोड़ों की जमीन को लेकर धोखाधड़ी की गई। वहीं दूसरा केस खंडवा के श्री दादाजी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस है। यहां पर खंडवा के संचालक और प्राचार्य डॉ. अनिल धारवाल पर FIR का है।
News in Short
- इंदौर में 12.66 हेक्टेयर भूमि को लेकर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
- आरोपी ने मृत व्यक्ति के नाम पर झूठा शपथ पत्र देकर जमीन को 1.02 करोड़ में बेचा।
- इस मामले में 4 आरोपी हैं। रूबीना, अजमतउल्ला, इलतीफत अली और जावेद अली सैय्यद, जो इंदौर के विभिन्न इलाकों के निवासी हैं।
- खंडवा के कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल धारवाल ने बिना विश्वविद्यालय की संबद्धता के छात्रों को प्रवेश दिलवाया।
- डॉ. अनिल धारवाल ने 33 छात्रों को एक वर्षीय पाठ्यक्रम को द्विवर्षीय दिखाया। इसके बाद 1,65,000 रुपए अधिक छात्रवृत्ति प्राप्त की।
News in Detail
इंदौर में ऐसे की धोखाधड़ी
इंदौर में ग्राम सिंहासा, तहसील मल्हारगंज, जिला इंदौर स्थित कुल 12.66 हेक्टेयर भूमि बरकतउल्ला पिता कुदरतउल्ला के स्वामित्व की थी। बरकतउल्ला वर्ष 1980 से दुबई में रहते थे। उन्होंने 10 मार्च 1996 को अब्दुल कय्यूम को उक्त भूमि का आम मुखत्यार नियुक्त किया था।
बरकतउल्ला की मृत्यु अक्टूबर 2010 में ही हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी कय्यूम ने उनके जीवित होने का झूठा शपथपत्र देते हुए जमीन को 1.02 करोड़ में बेचना बताकर रजिस्ट्री करा दी। आरोपियों की तरफ से सांठगांठ कर झूठे शपथ पत्र, कूटरचित दस्तावेजों तथा फर्जी फोटो का उपयोग कर मृत व्यक्ति को जीवित दर्शाते हुए भूमि हड़पने के उद्देश्य से धोखाधड़ी की गई।
यह बने हैं आरोपी
इस केस में रूबीना पति अजमतउल्ला निवासी नंदनवन, अजमतउल्ला पिता बरकतउल्ला, निवासी-31, नंदनवन कॉलोनी, मानिकबाग रोड, इलतीफत अली पिता ए.क्यू. खान, नि.-1. गुलजार कॉलोनी, इंदौर, जावेद अली सैय्यद पिता हुसैन अली निवासी 302. रोज मीनार, अशोका कॉलोनी इंदौर।
कॉलेज संचालक ने किया फर्जीवाड़ा
EOW इंदौर में श्री दादाजी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस, खंडवा के प्राचार्य एवं संचालक के विरूद्ध भी FIR दर्ज की है। शैक्षणिक सत्र 2012-13 में शासन की तरफ से श्री दादाजी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइसेंस, खंडवा को 5 पाठ्यक्रमों के लिए 250 सीटों की अस्थायी अनुमति दी गई थी।
अनुमति की शर्तों के अनुसार प्रवेश पूर्व संबंधित विश्वविद्यालय से संबद्धता लेना आवश्यक था, जिसका पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद संचालक प्राचार्य डॉ. अनिल धारवाल की तरफ से विश्वविद्यालय से बिना संबद्धता लिए DMLT पाठ्यक्रम में छात्रों को नियम विरुद्ध प्रवेश दिया गया।
इसके चलते छात्रों की परीक्षा एवं परिणाम में अत्यधिक विलंब हुआ जिससे छात्रों का नुकसान हुआ। डॉ. अनिल धारवाल की तरफ से 33 छात्रों के एक वर्षीय पाठ्यक्रम को द्विवर्षीय दिखाकर 1,65,000/- (एक लाख पैंसठ हजार) अधिक छात्रवृत्ति प्राप्त कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
आरोपी डॉ. अनिल धारवाल पिता स्वर्गीय बाबूलाल धारवाल, प्राचार्य/संचालक दादाजी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, खंडवा, निवासी नाकोडा नगर, भण्डारिया रोड खंडवा, (म.प्र.) को इस केस में आरोपी बनाते हुए केस दर्ज किया गया है।
इस तरह फर्जी छात्रवृत्ति भी ली
दादाजी कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस, खंडवा के प्राचार्य डॉ. अनिल धारवाल ने वर्ष 2012-13 के DMLT छात्रों के संबंध में गलत जानकारी दी। एक वर्षीय पाठ्यक्रम के बजाय 33 छात्रों को द्विवर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश दिखाया गया। 24 एसटी और 9 एसी छात्रों को शामिल किया गया। इसके बाद अधिक शुल्क और छात्रवृत्ति स्वीकृत कराई गई।
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