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Indore. इंदौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी बहुत बेहतरीन तरीके से पुलिस ने अपनी आन-बान-शान माने जाने वाले टीआई चंदननगर टीआई इंद्रमणि पटेल को बचा लिया था। ऐसी ही तैयारी सुप्रीम कोर्ट के केस में की गई थी। इसके लिए नोटिस और जांच की पूरी फाइल नवंबर-दिसंबर माह में चली। फिर डीसीपी आनंद कलादगी ने एक रिपोर्ट इंदौर पुलिस कमिशनर संतोष सिंह को दी। 'द सूत्र' के पास यह सभी दस्तावेज एक्सक्लूसिव रूप से मौजूद हैं। वहीं, पूरे थाने के 26 सब इंस्पेक्टर, सहायक सब इंस्पेक्टर, हैड कांस्टेबल और कांस्टेबल भी घेरे में हैं।
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News in Short
- सुप्रीम कोर्ट अनवर हुसैन केस में टीआई चंदननगर इंद्रमणि पटेल को तत्काल हटाने के आदेश दिए थे।
- आदेश के बाद उन्हें लाइन अटैच कर दिया गया, अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।
- इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने सीपी, एडिशनल डीसीपी और टीआई को पक्षकार बनाया था।
- इसके पहले हाईकोर्ट इंदौर ने भी सीपी को टीआई पर एक अन्य केस में कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
News in Detail
टीआई चंदननगर इंद्रमणि पटेल के सितारे दो माह से गर्दिश में चल रहे थे। आखिरकार टीआई की कुर्सी छिन गई। इस कुर्सी को बचाने के लिए बहुत कोशिश हुई। इसके लिए कारण बताओ नोटिस, जांच और फिर रिपोर्ट की लंबी खानापूर्ति की गई। जिस स्टॉक/पाकेट गवाह (कई केस में चिन्हित गवाह ही आना) केस में उन्हें हटाया गया। इस मामले की जांच हुई। डीसीपी आनंद कलादगी ने सीपी को पत्र भेजा। पत्र में 7 दिसंबर को टीआई को क्लीन चिट दी गई।
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यह दो मामले हैं इस केस में
इस केस में दो मामले लिंक हैं। अनवर हुसैन आरोपी ने जमानत आवेदन लगाया। लेकिन इसमें चंदनगर थाने की ओर से हलफनामा दिया गया कि उन पर 8 केस है, इसमें दुष्कर्म का भी केस बताया गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने जमानत नहीं दी। मामला सुप्रीम कोर्ट गया। यहां पुलिस ने माना कि दो आरोपियों के नाम एक जैसे होने से गलती हो गई। आरोपी पर 4 ही केस है। इसमें आरोपी की जमानत मंजूर हो गई, लेकिन इसे गंभीर चूक मानी गई। इसमें एडिशनल डीसीपी दिक्षेष अग्रवाल व टीआई से जवाब मांगा गया।
- इसके बाद अगली सुनवाई के दौरान असद अली वारसी इंटरवेनीअर बना। साथ ही कहा कि चंदननगर थाने में लगातार तय गवाह स्टॉक/पाकेट विटनेस बनाए जा रहे हैं। दरअसल वासरी को पुलिस ने चेकिंग के दौरान 31 अगस्त की रात को पकड़ा गया था। आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ बदतमीजी की, रात में थाने में रखा, कपड़े उतरवाए।
- इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मान्य किया। मामले को गंभीर मानते हुए सीपी, एडिशनल डीसीपी और टीआई के साथ वारसी को भी पक्षकार बना लिया। इसी मामले में 13 जनवरी को सुनवाई हुई। इसमें सुप्रीम कोर्ट में फिर बात आई कि कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद भी फिर इनके तरफ से दो केस में पाकेट गवाह बनाए गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट भड़क गया। तत्काल टीआई को हटाने के आदेश दिए।
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किस तरह से हुए नोटिस और फिर ये रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में सीपी, एडिशनल डीसीपी दिक्षेष अग्रवाल और टीआई इंद्रमणि पटेल को पक्षकार बनाया गया। इसके बाद जांच शुरू हुई। एसीपी अन्नपूर्णा शिवेंदु जोशी को जांच का जिम्मा दिया गया। वहीं टीआई को भी डीसीपी व एसीपी से नोटिस जारी हुए और जवाब लिया गया।
- इन नोटिस पर टीआई पटेल ने जवाब दिया कि जिस केस (असद वारसी) की बात है। इसमें वह विवेचक (जांच) अधिकारी नहीं है। बाकी जो 176 केस में स्टॉक विटनेस की सूची सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई, इसमें मैं एक भी केस में जांच अधिकारी नहीं हूं। यह काम जांच अधिकारी फील्ड में करता है। इन केस में कुल 37 स्वतंत्र गवाह पेश हुए। इसमें बार-बार गवाह के तौर पर सलमान कुरैशी और आमिर रंगरेज का नाम इसलिए हैं क्योंकि वह थाने के पास ही रहते हैं। उनकी बैठक वहीं चौराहे पर ही है। इन दो के अलावा भी 35 गवाह है। इन 176 केस में थाने से कुल 26 विवेचक अधिकारी है।
- इंटरवेनीअर असद वारसी का केस 31 अगस्त से 1 सितंबर 2024 की दरमियानी रात को बना था। चेकिंग के दौरान उनके द्वारा ड्यूटी अधिकारियों से दुव्यर्वहार किया था। केस सुबह मुझे आया और इश्तगासा पर हस्ताक्षर किए। थाने में उनके साथ कोई दुव्यर्वहार नहीं हुआ। इनकी हाईकोर्ट में याचिका भी खारिज हुई थी।
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डीसीपी ने इसके बाद यह रिपोर्ट सीपी को दी
एसीपी द्वारा टीआई के साथ ही 24 विवेचक अधिकारियों से जवाब लेने के बाद डीसीपी को जानकारी दी गई। इसके बाद डीसीपी कलादगी ने 7 दिसंबर को सीपी संतोष सिंह को एक रिपोर्ट दी। नोटिस और जवाब की जानकारी दी गई। एसीपी से प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। थाना प्रभारी चंदननगर और 24 विवेचकों से स्पष्टीकरण लिया गया। जांच से पता चला कि 176 मामलों में विवेचकों ने साक्षियों का चयन किया। यह चयन घटना स्थल और तारीख के आधार पर किया गया। साक्षियों को पंच और गवाह बनाकर कार्रवाई की गई थी।
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चंदननगर थाने के ये 24 अधिकारी भी घेरे में
स्टॉक विटनेस पेश करने के मामले में थाने के 24 अधिकारियों के नाम सामने आए, जिन्हें नोटिस दिया गया। इसमें एसआई अंजना सिंह परमार, धर्मेंद्र सरगैया, सबीर मंसूरी, सेवाना सिंह, सौरभ कुशवाह, एएसआई विजय भरत लाव इवने (रिटायर हो गए), बृजेंद्र सिंह यदुवंशी, दीपेश गोराना, गोपाल सिंह चावड़ा, जहीरुद्दीन शेख, कुंवर सिंह, मोहन लाल खापेड़, राजभन सिंह गौतम, विजय परमार, हेड कांस्टेबल अभिषेक पंवार, अचल तिवारी, धीरेंद्र कुमार, ध्रुव रावत, मनोज चौधरी, रामचंद्र सोलंकी, संजय त्रिपाठी, शिवराम अहिरवाल, स्वदीप सिंह शामिल है।
इन सभी ने लगभग एक ही जवाब दिया कि घटना पर मौके पर मौजूद लोगों को ही गवाह बनाया गया। कानून के अनुसार ही पूरी कार्रवाई की गई है। मध्यप्रदेश के सबसे शक्तिशाली टीआई इंद्रमणि पटेल को आखिरकार तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली से हुए हैं। एक बार पूर्व में हाईकोर्ट इंदौर ने भी सीपी संतोष सिंह को पटेल पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। लेकिन तब वह याचिका वापस लिया गया था। पुलिस ने भी चुप्पी साध ली। लेकिन पाकेट गवाह पेश करने के मामले में आखिरकार वह निपट गए।
आगे क्या
यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। इसमें अभी अनवर हुसैन के वकील की तरफ से पुलिस के शपथपत्र पर आपत्ति लगाई गई है। इसे अधिवक्ता ने आईवाश (आंखों में धूल झोंकने वाला) बताया है। साथ ही कहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही में ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता है। इसमें आगे सुनवाई 3 फरवरी को संभावित है।
सूत्र नॉलेज
स्टॉक/पाकेट गवाह का चलन पुलिस में लंबे समय से है। बीएनएस के आने के बाद और लोगों की जागरूकता से इसके लगातार खुलासे हो रहे हैं। दरअसल पुलिस फील्ड में गवाहों को ढूंढने और मैदान काम को बचाने के लिए अपने तय गवाहों को बुलाकर उन्हें पेश कर देती है। यह न्याय की अवधारणा के विपरीत है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट इतना तल्ख हुआ है।
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