छत्तीसगढ़ में हाथियों के हमले रोकेंगे AI कैमरे और सोलर हैंगिंग फेंसिंग, जानें कैसे काम करेगी यह तकनीक
NEWS IN SHORT
- जंगली हाथियों के हमलों से निपटने के लिए AI कैमरे की तैयारी।
- हाथियों को रोकने के लिए सोलर आधारित हैंगिंग फेंसिंग का प्रयोग होगा।
- राज्य के प्रभावित जिलों में करीब 400 हाथियों के दल सक्रिय।
- ‘गजसंकेत ऐप’ के ग्रामीणों को रियल-टाइम अलर्ट मिल रहा है।
- पिछले तीन वर्षों में तकनीकी प्रयोगों से मानव मौतों की संख्या घटी।
NEWS IN DETAIL
हाथियों से बचाव के लिए एआई तकनीक का सहारा
छत्तीसगढ़ में वर्षों से जंगली हाथियों के हमलों से प्रभावित लोगों को अब राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। राज्य का वन विभाग तमिलनाडु और केरल की तर्ज पर एआई आधारित कैमरे और अलार्म सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। इन कैमरों की रेंज में जैसे ही हाथी प्रवेश करेंगे, तेज आवाज का अलार्म बजेगा, जिससे हाथियों को गांवों से दूर भगाने में मदद मिलेगी।
सोलर आधारित हैंगिंग फेंसिंग भी लगेगी
वन विभाग एक और नया प्रयोग करने जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में सोलर आधारित झूलती इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई जाएगी। यह फेंसिंग हाथियों के संपर्क में आते ही हल्का करंट देगी, जिससे हाथी गांवों की ओर बढ़ने से रुकेंगे और ग्रामीणों की सुरक्षा मजबूत होगी।
राज्य के कई जिले हाथी प्रभावित
वन विभाग के अनुसार राज्य में लगभग 400 हाथियों के दल अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित वन मंडल हैं- रायगढ़, धरमजयगढ़, कोरबा, कटघोरा, सूरजपुर, जशपुर। इसके अलावा धमतरी और गरियाबंद जिलों में भी हाथियों की आवाजाही से खतरा बना रहता है।
इनकी वजह से फसलें बर्बाद हो रही हैं, कच्चे घर टूट रहे हैं और कई बार जनहानि भी हो चुकी है। हर साल 80 से अधिक लोगों की मौत हाथी हमलों में होती थी, हालांकि हाल के वर्षों में यह संख्या घटकर 50-60 तक पहुंची है।
‘गजसंकेत ऐप’ से मिल रहा समय रहते अलर्ट
वन विभाग का ‘गजसंकेत’ ऐप इस समस्या में एक बड़ा कदम साबित हुआ है। यह सिस्टम हाथियों की गतिविधियों को ट्रैक करके 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले ग्रामीणों को रियल-टाइम वॉयस कॉल, SMS अलर्ट WhatsApp संदेश के जरिए तुरंत चेतावनी देता है। पहले इसे गरियाबंद और धमतरी में लागू किया गया था, अब पूरे राज्य में इसका विस्तार हो चुका है।
तीन साल में हमलों में आई कमी
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अरुण कुमार पांडेय के अनुसार पिछले तीन वर्षों में किए गए प्रयोगों से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। पहले जहां हर साल 80 से ज्यादा लोगों की मौत होती थी, अब यह संख्या घटकर 50-60 के बीच रह गई है।
IMP FACTS
- प्रभावित जिलों में सक्रिय हाथियों के दल: लगभग 400
- पहले हर साल मौतें: 80+
- वर्तमान औसत मौतें: 50–60
- अलर्ट दायरा (गजसंकेत ऐप): 10 किमी
- नए उपाय: एआई कैमरे + सोलर हैंगिंग फेंसिंग
आगे क्या
छत्तीसगढ़ वन विभाग जल्द ही चयनित हाथी प्रभावित इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एआई कैमरे और हैंगिंग फेंसिंग स्थापित करेगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे प्रभावित वन मंडलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को देखते हुए वन विभाग अब पारंपरिक उपायों के साथ एआई तकनीक और सोलर सुरक्षा सिस्टम अपनाने जा रहा है। ‘गजसंकेत ऐप’ की सफलता के बाद ये नए प्रयोग ग्रामीणों की सुरक्षा बढ़ाने और जनहानि कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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