छत्तीसगढ़ में आईएएस का नेक्सस कर रहा है काम, केंद्र सरकार की चिट्ठियों के बाद भी नहीं हो रही भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच
Raipur. छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील के पास एक चिट्ठी भेजी गई है। इस चिट्ठी में कहा गया है कि भ्रष्टाचार की शिकायत पर केंद्र सरकार के निर्देश आने के बाद भी उन मामलों की जांच नहीं हो रही है।
इस चिट्ठी में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में आईएएस का एक ऐसा नेक्सस काम कर रहा है जो भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को बचा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश मामलों में शिकायतें जांच के लिए उन्हीं अधिकारियों को मार्क कर दी जाती हैं, जिनके खिलाफ आरोप लगे होते हैं।
इस चिट्ठी के साथ केंद्र सरकार के वे सभी पत्र संलग्न हैं जो मुख्य सचिव को मार्क कर कार्यवाही के लिए भेजे गए हैं। यह चिट्ठी एडवोकेट नरेश चंद्र गुप्ता ने लिखी है। उन्होंने इस संबंध में डीओपीटी को भी शिकायत की है।
सीएस को गोपनीय चिट्ठी :
मुख्य सचिव को लिखी इस चिट्ठी में कहा गया है कि आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। मेरी एक शिकायत में मैंने विशेष रूप से इस मुद्दे को उठाया था कि नौकरशाहों का एक विशेष समूह अपने स्वार्थों को पूरा करने और एक गठजोड़ (Nexus) बनाने के लिए उच्च प्रभावशाली पदों पर बैठ गए हैं।
जो इन दोषी अधिकारियों को संरक्षण दे रहे हैं। उनकी शिकायतों को दबा दिया जाता है और कोई कार्यवाही नहीं करने दी जाती। ऐसी कई शिकायतें केंद्र सरकार को की गईं जहां से मुख्य सचिव और अन्य प्रमुख अधिकारियों के नाम निर्देशित पत्र भी आए लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यह सभी शिकायतें भ्रष्टाचार के संबंध में हैं। जहां छोटे कर्मचारियों को मामूली गलतियों पर तुरंत निलंबित कर दिया जाता है, वहीं अखिल भारतीय सेवा के एक भी अधिकारी के खिलाफ आचरण नियमों के तहत ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।
इन घोटालों की शिकायत :
. कोरबा जिले में डीएमएफ फंड में भ्रष्टाचार
. IAS अधिकारियों के खिलाफ शिकायत
. शराब घोटाले में आरोपियों को बचाने के संबंध में
. श्रम विभाग में भ्रष्टाचार जिसमें आईएएस शामिल
. शराब घोटाले में पूर्व मुख्य सचिव की संलिप्तता के संबंध में
. एसीबी अधिकारियों द्वारा घोटाले के आरोपियों को बचाने के संबंध में
. बुलेट प्रूफ जैकिट खरीदी में भ्रष्टाचार
. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत लंबित रहने के दौरान अधिकारी का प्रमोशन
सीएम से पीएम तक शिकायत :
.भारत सरकार के खान मंत्रालय की तरफ से मुख्य सचिव को चिट्ठी आई है कि कोरबा में डीएफएफ फंड में 25 करोड़ का घोटाला हुआ था। इस अनियमितता में आरोप लगे हैं कि तत्कालीन कलेक्टर ने अपने पद का दुरुपयोग किया है। इस मामले की प्रशासनिक एवं वित्तीय जांच कराई जाए।
.मुख्य सचिव को कार्मिक मंत्रालय से पत्र आया है। इस पत्र में उन आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा गया है जिनके संबंध में नेक्सस बनाकर काम करने की शिकायत आई हे।
.छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन विभाग ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि प्रमोशन और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर कार्रवाई की जाए।
.सीएम सचिवालय ने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि एसीबी,ईओडब्ल्यू के अधिकारियों की भूमिका पर उठे संदेह के संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जाए।
.सीएम सचिवालय ने गृह विभाग को भी इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा गया है।
इस चिट्ठी में कुछ अहम बातें :
इस पत्र में लिखा गया है कि समय-समय पर पीएमओ (PMO), डीओपीटी (DOPT) और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को इस संबंध में लिखता रहा हूं कि छत्तीसगढ़ सरकार के महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले आईएएस,आईपीएस पर भ्रष्टाचार के कितने गंभीर आरोप लगे हैं।
अधिकांश शिकायतें आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार को भेजी गई हैं ताकि इस मामले में जांच हो और उसकी जानकारी शिकायतकर्ता को भी दी जाए।
लेकिन आज तक किसी भी स्तर से जानकारी नहीं मिली है। मैंने बार-बार इस मुद्दे को उठाया है कि अधिकांश समय जांच के लिए किसी स्वतंत्र प्राधिकरण को भेजने के बजाय इसे उसी दोषी अधिकारी को मार्क कर दिया जाता है जिसने घोटाला किया था।
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