कोयला घोटाले में बड़ी कार्रवाई, निलंबित IAS समीर विश्नोई की 4 करोड़ की संपत्ति अटैच, जमीन-जायदाद की बिक्री पर भी रोक
Raipur. छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। निलंबित IAS समीर विश्नोई की करीब 4 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर दी गई है।
विशेष न्यायालय के आदेश के बाद उनकी कई अचल संपत्तियों को सीज कर दिया गया है जिससे अब इनकी खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह रोक लग गई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य में कोयला लेवी स्कैम की जांच लगातार तेज हो रही है और इसमें शामिल अफसरों और अन्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
आय से अधिक संपत्ति का मामला :
ACB-EOW ने समीर विश्नोई (IAS Sameer Vishnoi) के खिलाफ अपराध क्रमांक 23/2024 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धाराओं 13(1)(बी) और 13(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार विश्नोई ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है।
जांच में यह भी सामने आया है कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों और विभिन्न फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए की अचल संपत्तियां खड़ी कीं। इन संपत्तियों को छिपाने और निवेश के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
पहले भी हुई थी कार्रवाई :
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कोयला लेवी घोटाले से जुड़े मामले में समीर विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया था। अब ACB-EOW की ताजा जांच में 9 और संपत्तियों का खुलासा हुआ है जिनकी कुल कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इन नई संपत्तियों के सामने आने के बाद ब्यूरो ने विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, रायपुर में अटैचमेंट के लिए आवेदन पेश किया था।
अदालत से मिली मंजूरी :
17 अप्रैल को विशेष न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने ACB-EOW के आवेदन को स्वीकार करते हुए समीर विश्नोई की इन सभी संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के बाद संबंधित संपत्तियों पर कानूनी नियंत्रण स्थापित हो गया है।
प्रोविजनल अटैचमेंट के चलते अब इन संपत्तियों को न तो बेचा जा सकता है और न ही किसी अन्य तरीके से हस्तांतरित किया जा सकता है। यह कदम जांच प्रक्रिया को मजबूत करने और अवैध संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
इससे पहले भी इसी मामले में जुड़ी अन्य आरोपी अधिकारी सौम्या चौरसिया की अवैध संपत्तियों की कुर्की न्यायालय के आदेश पर की जा चुकी है। इससे स्पष्ट है कि जांच एजेंसियां लगातार उन संपत्तियों को चिन्हित कर रही हैं जो कथित रूप से अवैध कमाई से अर्जित की गई हैं।
आगे और कार्रवाई संभव :
ब्यूरो के अनुसार मामले में शामिल अन्य लोक सेवकों और आरोपियों के खिलाफ भी संपत्ति कुर्की की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, और भी संपत्तियों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अब जांच एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं। कोयला घोटाले की यह जांच आने वाले दिनों में और कई बड़े खुलासे कर सकती है।
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