कबाड़ से कमाल : छत्तीसगढ़ की बेटियों ने बनाए स्मार्ट गैजेट, जानें खासियत
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ की बेटियों का कमाल, कबाड़ से बनाए स्मार्ट गैजेट
- दीवार पर थूकते ही बजेगा अलार्म, बारिश में खुद खुलेगा छाता
- गांव की छात्राओं ने कम लागत में तैयार किए अनोखे मॉडल
- रेणुका और तृषा के इनोवेशन को मिला राष्ट्रीय स्तर का मौका
- कबाड़ से तकनीक तक का सफर, बेटियों ने दिखाया हुनर
Bilaspur। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों से निकलकर दो छात्राओं ने अपनी सोच और मेहनत से ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब प्रदेश से बाहर भी हो रही है। सीमित संसाधनों और कबाड़ की मदद से तैयार किए गए इनके अनोखे मॉडल ने बड़ी समस्याओं का आसान समाधान दिखाया है।
बिलासपुर जिले के देवरी खुर्द और बिजौर गांव की रहने वाली छात्राओं ने ऐसे उपकरण बनाए हैं, जो रोजमर्रा की परेशानियों को तकनीक के जरिए दूर करने का प्रयास करते हैं। दोनों छात्राओं के इनोवेशन का चयन भारत सरकार की इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना के तहत किया गया है।
दीवार पर थूकने वालों को रोकेगा सेंसर
देवरी खुर्द की छात्रा रेणुका धनुआर ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने वालों पर नजर रखेगा। उन्होंने वॉल माउंट स्पिट डिटेक्शन सिस्टम बनाया है।
इस डिवाइस में सेंसर लगाया गया है। जैसे ही कोई व्यक्ति दीवार पर थूकने की कोशिश करेगा, सेंसर सक्रिय होकर अलार्म बजा देगा। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना और लोगों को गंदगी फैलाने से रोकना है।
रेणुका का यह मॉडल कम लागत में तैयार किया गया है। इसमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसे आगे और बेहतर बनाया जा सकता है।
बारिश में खुद खुलेगा स्मार्ट बैग का छाता
वहीं बिजौर की छात्रा तृषा कमलेश ने बच्चों की एक आम समस्या को ध्यान में रखते हुए वेदर गार्ड स्मार्ट बैग तैयार किया है। अक्सर स्कूल जाते समय अचानक बारिश होने पर बच्चों की किताबें और कॉपियां भीग जाती हैं। इसी परेशानी को देखते हुए तृषा ने ऐसा बैग बनाया, जिसमें सेंसर लगाया गया है।
बारिश की बूंद पड़ते ही यह सेंसर काम करता है और बैग से जुड़ा छोटा छाता अपने आप खुल जाता है। इससे बच्चों का सामान भी सुरक्षित रहेगा और उन्हें बारिश से भी बचाव मिलेगा।
इंस्पायर अवॉर्ड में प्रदेश के 20 मॉडल में चयन
दोनों छात्राओं के मॉडल को इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना में प्रदेश के चुनिंदा 20 मॉडलों में जगह मिली है। इस उपलब्धि पर स्वामी आत्मानंद स्कूल दयालबंद में आयोजित कार्यक्रम में विधायक अमर अग्रवाल ने दोनों छात्राओं को सम्मानित किया। उन्होंने दोनों नन्हीं वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन के रूप में 5-5 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की।
राष्ट्रीय स्तर की तैयारी में जुटीं छात्राएं
अब दोनों छात्राएं अपने मॉडल को और बेहतर बनाने की तैयारी कर रही हैं। 4 सितंबर को रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय मेंटरशिप शिविर में इनके मॉडल की तकनीकी जांच होगी। विशेषज्ञ टीम सेंसर, सर्किट और डिजाइन में सुधार के लिए सुझाव देगी। इसके बाद इन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए तैयार किया जाएगा।
ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए बनीं प्रेरणा
अधिकारियों का कहना है कि इन छात्राओं ने साबित किया है कि प्रतिभा के लिए बड़े शहर या महंगे संसाधन जरूरी नहीं होते। सही सोच और मेहनत से गांवों में रहने वाले बच्चे भी नई तकनीक विकसित कर सकते हैं।
बिल्हा ब्लॉक के बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं ने सीमित साधनों के बावजूद शानदार वैज्ञानिक सोच दिखाई है। ऐसे प्रयास दूसरे विद्यार्थियों को भी नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे।
FAQ
- छत्तीसगढ़ की छात्राओं ने कौन-कौन से गैजेट बनाए हैं?
छात्राओं ने वॉल माउंट स्पिट डिटेक्शन सिस्टम और वेदर गार्ड स्मार्ट बैग बनाया है। पहला सिस्टम थूकने पर अलार्म बजाता है, जबकि दूसरा बारिश में खुद छाता खोल देता है। - इन छात्राओं के मॉडल का चयन किस योजना में हुआ है?
दोनों छात्राओं के मॉडल का चयन भारत सरकार की इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना के तहत प्रदेश के 20 चयनित मॉडलों में हुआ है। - स्मार्ट बैग कैसे काम करता है?
स्मार्ट बैग में लगे सेंसर बारिश की बूंदों को पहचानते हैं। पानी गिरते ही सेंसर सक्रिय होकर बैग से जुड़ा छाता अपने आप खोल देता है।
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