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Impact Feature
Raipur. छत्तीसगढ़ अब विकास की नई कहानी लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। इन्हीं प्रयासों का एक बड़ा उदाहरण है 'हर घर नल से जल' का अभियान, जो आज हजारों गांवों की तस्वीर बदल रहा है।
जल जीवन मिशन के जरिए राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्रामीण परिवार को घर पर ही सुरक्षित और शुद्ध पेयजल मिले। पहले जहां गांवों में लोगों को पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, वहीं अब लाखों घरों तक सीधे नल से पानी पहुंच रहा है। इससे लोगों की जिंदगी आसान हुई है।
प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत अब तक 41 लाख 87 हजार से ज्यादा घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इन कनेक्शनों के जरिए 32 लाख से ज्यादा ग्रामीण परिवारों तक नल के जरिए शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। यह बदलाव इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि मिशन शुरू होने से पहले पूरे प्रदेश में सिर्फ 3 लाख 19 हजार घरेलू नल कनेक्शन थे। पिछले दो वर्षों में इसमें काफी बढ़ोतरी हुई है।
इस अभियान का असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ के 6 हजार 572 गांवों में शत-प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन पूरे हो चुके हैं। वहीं 5 हजार 564 गांवों को ‘हर घर जल ग्राम’ घोषित किया गया है। इनमें से 4 हजार 544 गांवों का विधिवत प्रमाणीकरण भी हो चुका है।
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सर्टिफाइड गांवों की संख्या में बढ़ोतरी
बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में ‘हर घर जल’ सर्टिफाइड गांवों की संख्या में 750 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। 5 हजार 88 ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति योजनाओं का हस्तांतरण किया जा चुका है। इससे स्थानीय स्तर पर पानी की व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल रही है और पंचायतों की भागीदारी भी बढ़ रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर ग्रामीण परिवार को सुरक्षित, शुद्ध और लगातार मिलने वाला पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसी दिशा में काम करते हुए छत्तीसगढ़ को जल्द ही ‘हर घर जल’ राज्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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पानी के लिए रोज की जद्दोजहद अब खत्म कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नवापारा की 60 वर्षीय फुलमत बाई को कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए रोज जूझना पड़ता था। घर में नल नहीं था, इसलिए उन्हें हर दिन दो से तीन किलोमीटर दूर स्थित ढोढ़ी (झरिया) तक जाना पड़ता था।
बरसात में फिसलन भरे रास्ते और भी मुश्किलें पैदा करते थे। गर्मियों में पानी का स्तर घट जाता था और समस्या और बढ़ जाती थी। बकरी पालन से अपना जीवन चलाने वाली फुलमत बाई वर्षों तक इसी परेशानी को झेलती रहीं। अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत उनके घर में नल कनेक्शन लग गया है। सुबह 8 बजे और शाम 4 बजे नल से नियमित रूप से पानी मिलता है। इससे उनका जीवन आसान हो गया है और रोज पानी ढोने की परेशानी खत्म हो गई है।
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मांगामार गांव में बदली तस्वीर कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 53 किलोमीटर दूर मांगामार गांव में भी जल जीवन मिशन का असर दिखाई देता है। ढाई हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में 1 करोड़ 45 लाख 34 हजार रुपए की लागत से रेट्रोफिटिंग योजना लागू की गई है।
इस योजना के तहत पानी की टंकी बनाई गई है। गांव के हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए 3 हजार 700 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके जरिए 522 घरों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। इस व्यवस्था के बाद गांव के लोगों को अब पानी के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर के भीतर ही नल से पानी मिलने लगा है, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो गई है।
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ठरकपुर में ‘हर घर जल’ का सपना साकार मुंगेली जिले के ग्राम ठरकपुर में भी जल जीवन मिशन ने गांव की तस्वीर बदल दी है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया है। पहले यहां की स्थिति बिल्कुल अलग थी। गांव के लोग पेयजल के लिए 8 हैंडपंपों पर निर्भर थे। गर्मियों में जलस्तर गिरने से कई बार हैंडपंप जवाब दे जाते थे। ऐसे में महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता था।
गांव की गंगा यादव बताती हैं कि पहले बच्चों को घर में छोड़कर दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता था। गर्मियों में परेशानी और बढ़ जाती थी। अब घर में नल लग गया है और पर्याप्त पानी मिल रहा है। इस तरह नल-जल योजना से महिलाओं का समय और मेहनत दोनों बच रहे हैं। अब वे परिवार और बच्चों पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं।
समूह जल योजनाओं से हजारों गांवों को लाभ
जल जीवन मिशन से पहले ग्रामीण इलाकों में पानी की व्यवस्था सीमित संसाधनों पर आधारित थी। प्रदेश में करीब 3 लाख 8 हजार हैंडपंप, 4 हजार 440 नल-जल योजनाएं और 2 हजार 132 स्थल जल प्रदाय योजनाएं संचालित थीं। अब पानी की आपूर्ति को और मजबूत बनाने के लिए 70 समूह जल प्रदाय योजनाएं प्रगति पर हैं। इन योजनाओं से 3 हजार 208 गांवों को लाभ मिल रहा है और लगभग 9 लाख 85 हजार नल कनेक्शन जोड़े गए हैं। इससे बड़े पैमाने पर ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ी है।
पानी की गुणवत्ता पर भी दिया ध्यान
सरकार का फोकस सिर्फ पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में 77 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें से 47 प्रयोगशालाएं मान्यता प्राप्त हैं। पेयजल से जुड़ी शिकायतों के तत्काल समाधान के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-233-0008 भी शुरू किया गया है। इसके जरिए ग्रामीण अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और समस्या का जल्द समाधान कराया जा सकता है।
गांवों में दिख रहा बदलाव
जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था में बड़ा सुधार दिखाई दे रहा है। जहां पहले पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब लाखों परिवारों को घर के भीतर ही नल से पानी मिल रहा है।
इस बदलाव से महिलाओं और बच्चों की मेहनत कम हुई है, समय की बचत हो रही है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हुई है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के हर गांव में यह सुविधा पहुंचे और प्रदेश जल्द ही ‘हर घर जल’ राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाए।
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