छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : कर्मचारियों का प्रमोशन मौलिक अधिकार नहीं, सभी याचिकाएं खारिज

thesootr Desk | Mar 26, 2026, 12:02 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया कि प्रमोशन कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने 2017 के भर्ती नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

NEWS IN SHORT

  • हाईकोर्ट ने कहा: प्रमोशन कोई मौलिक अधिकार नहीं
  • राजस्व निरीक्षकों को सीएमओ पद पर पदोन्नति की मंजूरी
  • छत्तीसगढ़ में 2017 भर्ती नियमों को हाईकोर्ट ने खारिज किया
  • हाईकोर्ट ने सरकार के नीतिगत निर्णय को सही ठहराया
  • प्रमोशन प्रक्रिया अब नियमों के तहत ही होगी

NEWS IN DETAIL

Bilaspur : छत्तीसगढ़ बिलासपुरहाईकोर्ट ने कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले में जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारियों के लिए प्रमोशन कोई मौलिक अधिकार नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही डिवीजन बेंच ने राज्य के नगरीय प्रशासन विभाग के 2017 के भर्ती नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्व निरीक्षकों को मुख्य नगर पालिका अधिकारी क्लास-बी के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र मानना संवैधानिक है और यह किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता।



प्रमोशन पर कोर्ट का दृष्टिकोण

दरअसल, यह मामला उस समय सामने आया था जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी पद पर प्रमोट हुए अधिकारियों, जिसमें पुष्पा खलखो समेत अन्य ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि यह प्रमोशन संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत मिले समानता के अधिकार का हनन है क्योंकि राजस्व निरीक्षक नगरपालिका सेवक हैं, जबकि याचिकाकर्ता सिविल पद पर कार्यरत अधिकारी हैं।



कोर्ट की टिप्पणी और सरकारी निति

हाईकोर्ट ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि पदोन्नति के लिए एक से अधिक फीडर कैडर तय करना और अलग-अलग पदों की समकक्षता निर्धारित करना पूरी तरह कार्यपालिका और सरकार के नीतिगत दायरे में आता है। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी के पास पदोन्नति पाने का निहित अधिकार नहीं होता, बल्कि केवल नियमों के अनुसार पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार होता है।



राज्य सरकार ने दलील दी थी कि राजस्व निरीक्षकों को एक साल के अनुभव में छूट देने का निर्णय विभाग में अधिकारियों की कमी के कारण लिया गया था और यह जनहित में था। कोर्ट ने इसे सही ठहराया और इस छूट को असंवैधानिक नहीं माना।



सरेंडर की प्रक्रिया का रास्ता साफ

हाईकोर्ट ने राजस्व निरीक्षकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले के बाद अब राजस्व निरीक्षकों को मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद की दौड़ में शामिल किया जा सकता है। यह निर्णय राज्य सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि इससे सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़ी प्रक्रिया और सख्त हो जाएगी।



सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनः सुनवाई

इस मामले में पहले हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने इन प्रावधानों को अवैध घोषित कर दिया था। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी और 16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले को हाईकोर्ट में फिर से सुनने का आदेश दिया। अब इस मामले में हाईकोर्ट का नया फैसला आया है।



CGPSC भर्ती 2021 पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती 2021 में चयनित उम्मीदवारों को जॉइनिंग देने के फैसले को भी सही ठहराया। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही माना और नियुक्ति देने का आदेश दिया।



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