भोपाल का बिल्डर संजीव जैन छग में गिरफ्तार, टीम बनाकर 115 करोड़ डकारे
Raipur। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में अब फर्जी कंपनियों के जरिए की गई बड़ी वसूली का परत-दर-परत खुलासा हो रहा है। इस मामले में भोपाल के बिल्डर संजीव जैन की गिरफ्तारी ने पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई साधारण घोटाला नहीं बल्कि एक सुनियोजित सिंडिकेट था, जिसमें अलग-अलग राज्यों के लोगों को जोड़कर सरकारी सिस्टम को ही चूना लगाया गया।
जांच में सामने आया है कि संजीव जैन और उसके सहयोगियों ने मिलकर सात कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया। इन कंपनियों के जरिए छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों के लिए मैनपावर सप्लाई, ओवरटाइम और बोनस के नाम पर फर्जी बिल बनाए गए। कागजों में हजारों कर्मचारियों को काम करते दिखाया गया, लेकिन हकीकत में यह रकम सीधे सिंडिकेट के खातों में पहुंचती रही।
संजीव जैन भोपाल निवासी है और श्रीजी बिल्डर्स में पार्टनर है। इस कंपनी का प्रोजेक्ट होशंगाबाद रोड स्थित गोल्डन सिटी के नाम से बना है। यह भोपाल के प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, करीब 3000 कर्मचारियों के नाम पर ओवरटाइम और बोनस का भुगतान दिखाया गया। सरकार ने त्योहारों और अतिरिक्त काम के एवज में करीब 50 करोड़ रुपये होलीडे-पे और 17.60 करोड़ रुपये बोनस के रूप में जारी किए थे। लेकिन यह पैसा कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय कंपनियों और अधिकारियों की मिलीभगत से डकार लिया।
नेक्सस बनाकर लूट
नीरज चौधरी, अजय लोहिया, अमित मित्तल, अजीत दारंदले, अमित प्रभाकर राजेंद्र द्विवेदी संजीव जैन की टीम में थे। इन लोगों ने 5 कंपनियां बनाई। और नेक्सस बनाकर पैसों की लूट की।
संजीव जैन की भूमिका अहम
इस पूरे खेल में संजीव जैन की भूमिका अहम बताई जा रही है। वह न केवल इस नेटवर्क का फाइनेंशियल मैनेजर था, बल्कि कंपनियों के बीच पैसे के ट्रांजेक्शन को भी नियंत्रित करता था। जांच एजेंसियों का दावा है कि जैन ने फर्जी दस्तावेज, शेल कंपनियां और बैंक खातों के जरिए पैसों की हेराफेरी को अंजाम दिया।
पूछताछ में हुआ खुलासा
गिरफ्तार किए गए अन्य डायरेक्टर और ऑपरेटर्स से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि कंपनियों को जानबूझकर अलग-अलग नामों से रजिस्टर किया गया ताकि संदेह न हो। हर कंपनी को एक तय रकम का टारगेट दिया गया था और उसी हिसाब से बिलिंग की जाती थी।
32OO करोड़ का घोटाला
बताया जा रहा है कि इस घोटाले का सीधा संबंध पहले सामने आए ( 3200 Crore Liquor Scam ) 3200 करोड़ के शराब घोटाले से भी जुड़ रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार किन-किन बड़े अधिकारियों और राजनीतिक कनेक्शनों से जुड़े हुए हैं।
संयुक्त कार्रवाई में खुलासा
ईडी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक कई अहम गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। संजीव जैन की गिरफ्तारी को इस केस में बड़ा ब्रेक थ्रू माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
संपत्तियों की जांच शुरू
फिलहाल सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है और पैसों के फ्लो, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में ही करोड़ों रुपये के लेन-देन के सबूत मिल चुके हैं।
विपक्ष बता रहा संगठित लूट
छत्तीसगढ़ में इस खुलासे के बाद सियासी माहौल भी गरमा गया है। विपक्ष जहां इसे संगठित लूट बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
केवल कागजी नहीं सिस्टम का घोटाला
स्पष्ट है कि फर्जी कंपनियों के जरिए किया गया यह खेल केवल कागजी घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम में गहरे बैठे भ्रष्टाचार की कहानी है, जिसकी परतें अभी और खुलनी बाकी हैं।
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