नक्सल के कारण नेताओं को मिली सिक्योरिटी में होगी कटौती, लोगों की सुरक्षा में एक साल तक कोई कोताही नहीं
Raipur. छत्तीसगढ़ में नक्सल खात्मे के बाद अब सुरक्षा को लेकर समीक्षा की जाएगी। नक्सल के कारण नेताओं को मिली अतिरिक्त सुरक्षा में कटौती की जा सकती है। वहीं आम आदमी की सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। अभी फिलहाल बस्तर में आर्म्ड फोर्स तैनात रहेगी।
एक साल बाद ही रिजर्व फोर्स को वापस बुलाया जाएगा। सरकार कहती है कि बड़े ऑपरेशन के बाद अपनी क्योर करनी पड़ती है उसी तरह एक साल तक एहतियात के तौर पर बस्तर में जवान तैनात रहेंगे।
नेताओं की सिक्योरिटी कट :
राज्य में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। सुरक्षा की समीक्षा के बाद करीब 300 नेताओं के सुरक्षा घेरे को कम किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह कटौती (Security cut) अस्थायी होगी। वर्तमान में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल वीआईपी ड्यूटी में तैनात हैं। जानकारी के अनुसार करीब 1200 जवान नेताओं की सुरक्षा में लगे हुए हैं।
सरकार कहती है कि जल्द ही उस स्थिति पर पहुंचेगे जब किसी को सुरक्षा की जरुरत ही नहीं होगी। राज्य में सुरक्षा तय करने का जिम्मा प्रोटेक्शन रिव्यू ग्रुप के पास होता है। कलेक्टर, आईजी,एसपी सुरक्षा की सिफारिश करते हैं। गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा जाता है। गृह विभाग,आईबी की रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा श्रेणी तय करता है।
प्रदेश में 13 अतिविशिष्ट व्यक्तियों को जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है। इनमें मुख्यमंत्री,राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं। इनके अलावा 38 को जेड, 35 को वाय प्लस और 121 नेताओं को एक्स श्रेणी का सुरक्षा कवर मिला हुआ है।
एक साल तक तैनात रहेंगे जवान :
आंकड़ों के अनुसार करीब 60 हजार राज्य सुरक्षा बल तैनात है जिनमें 40 हजार केंद्रीय बल के जवान विभिन्न इलाकों में ड्यूटी दे रहे हैं। सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था की नई समीक्षा के तहत जिन इलाकों में स्थिति सामान्य और सुरक्षित है, वहां से अतिरिक्त सुरक्षा बल हटाए जाएंगे।
इससे जरूरत के हिसाब से बलों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। माओवाद के अंत के दावे के बाद भी सरकार कोई जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने साफ कर दिया है कि एक साल तक आर्म्ड फोर्स बस्तर में तैनात रहेंगी।
एहतियात के तौर पर वहां से अभी सुरक्षा नहीं हटाई जाएगी। आम आदमी की सुरक्षा का जिम्मा सरकार है इसलिए जब तक पूरी तरह स्थिति सामान्य नहीं होगी तब तक कोई जोखिम नहीं उठाया जाएगा।
सुरक्षा का फैक्ट फिगर :
बस्तर में तैनात 60 हजार सुरक्षा बल
इनमें 40 हजार केंद्रीय सुरक्षा बल
121 नेताओं को एक्स श्रेणी सुरक्षा
38 नेताओं को जेड श्रेणी सुरक्षा
नक्सल पर सियासत तेज :
इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि जब नक्सलवाद खत्म होने की बात कही जा रही है, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की जरूरत क्यों पड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार ने तो सशस्त्र नक्सलवाद खत्म होने का दावा कर दिया है और दूसरी तरफ वहां सुरक्षा भी नहीं हटाई जा रही है।
वहीं सरकार का दावा है कि प्रदेश में शांति स्थापित करने और संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित और जरूरत आधारित बनाया जाएगा। ताकि आम लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा भी प्रभावी तरीके से सुनिश्चित की जा सके।
ये खबरें भी पढ़ें...
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी जीत : 17 लाख की इनामी नक्सली कमला सोरी ने किया आत्मसमर्पण
नक्सलवाद पर नियंत्रण के बाद भी बस्तर में हाई अलर्ट; 40 हजार जवान तैनात रहेंगे
Chhattisgarh के Raipur में लेट नाइट पार्टी पर बवाल, क्लब पर कार्रवाई होगी ? CG NEWS