सूरजपुर में देवी का 400 साल पुराना मंदिर जिसमे है रहस्यमयी रक्त कुंड, नौ दिन,नौ देवियां
छत्तीसगढ़ : सूरजपुर जिले में स्थित कुदरगढ़ धाम एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल है, जो माँ बागेश्वरी देवी को समर्पित है। यह मंदिर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर और ऑल वेदर रोड से जुड़ा हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, लेकिन ऊपर से दिखने वाला मनोरम दृश्य और माता के दर्शन सभी थकान को मिटा देते हैं।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
मंदिर का इतिहास लगभग चार सौ साल पुराना माना जाता है। राजा बालंद राजपूत ने माता बागेश्वरी की स्थापना की थी। बाद में चौहान वंश के शासकों ने मंदिर की देख-रेख की और आज भी नवरात्र के समय सुबह की पहली आरती उसी वंश के वंशज करते हैं। 18वीं शताब्दी में चौहान राजाओं ने आदिवासी बैगा समुदाय को माता की पूजा और देख-रेख की जिम्मेदारी सौंपी, और तब से यह परंपरा आज तक चल रही है।
कुंड का रहस्य
बागेश्वरीधाम की एक विशेषता है यहाँ का कुंड, जिसमें भक्तअपनी मन्नत पूरी होने पर बकरी का रक्त चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि कुंड कभी नहीं भरता, चाहे हजारों बकरियों का रक्त डाला जाए, जो देवी के चमत्कार का प्रतीक माना जाता है।
सभी मन्नत होती है पूरी
स्थानीय मंदिर ट्रस्ट के सदस्य ने बताया कि श्रद्धालु यहाँ अपनी हर मुराद पूरी होने की कामना के साथ आते हैं और आस्था के साथ माता की पूजा करते हैं। चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, और यह समय यहां आने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। कुदरगढ़ धाम न केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ी वातावरण भी इसे एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनाते हैं।
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