₹1,136 करोड़ का हिसाब गायब, CGMSC की ऑडिट रिपोर्ट से मचा हड़कंप
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में एक बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। एक आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट (Internal Audit Report) में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि, वर्ष 2021 से 2025 के बीच सरकारी अस्पतालों के लिए की गई दवाइयों की खरीद, मेडिकल उपकरणों की सप्लाई और निर्माण कार्यों पर खर्च किए गए करीब 1,136 करोड़ रूपए का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है।
सरल शब्दों में कहें तो, कागजों पर खर्च तो दिखा दिया गया है, लेकिन उससे जुड़े पक्के दस्तावेज, बिल और स्टॉक का रिकॉर्ड गायब या अधूरा है। इस खुलासे के बाद से पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
कहां-कहां मिलीं गड़बड़ियां
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार CGMSC ने 2021 से 2025 के बीच विभिन्न योजनाओं और मदों में हजारों करोड़ रूपए खर्च किए। हालांकि खर्च के मुकाबले उपलब्ध दस्तावेजों, स्टॉक रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और लेखा अभिलेखों में कई जगह बड़ा अंतर पाया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीद, भुगतान, निर्माण कार्य और उपकरण आपूर्ति से जुड़े मामलों में निर्धारित नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठे हैं।
दवा खरीद में सबसे बड़ा अंतर
ऑडिट में सामने आया कि वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच दवाइयों की खरीद पर करीब 93.70 करोड़ रूपए खर्च दर्शाए गए, जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रविष्टियों में अंतर पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कई मामलों में खरीद और स्टॉक का मिलान नहीं हो सका।
सर्जिकल और मेडिकल उपकरण खरीद पर सवाल
रिपोर्ट में सर्जिकल उपकरणों और मेडिकल इक्विपमेंट की खरीद को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। ऑडिट टीम के अनुसार करोड़ों रूपए की खरीद के बावजूद रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता में अंतर दिखाई दिया।
विशेष रूप से उपकरण खरीदी से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान विवरणों की जांच में कई विसंगतियां सामने आने का उल्लेख किया गया है।
निर्माण कार्यों में भी अनियमितताओं के आरोप
CGMSC के माध्यम से अस्पताल भवनों और स्वास्थ्य अधोसंरचना से जुड़े निर्माण कार्यों में भी वित्तीय गड़बड़ियों की बात रिपोर्ट में कही गई है। निर्माण मद में खर्च की गई राशि और उपलब्ध अभिलेखों में अंतर मिलने का दावा किया गया है।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में भुगतान तो दर्शाया गया, लेकिन उससे संबंधित दस्तावेज और उपयोगिता प्रमाण पूरी तरह उपलब्ध नहीं मिले।
13वें वित्त आयोग की राशि पर भी सवाल
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 13वें वित्त आयोग से प्राप्त लगभग 48.68 लाख रूपए की राशि योजना समाप्त होने के बाद भी न तो खर्च की गई और न ही वापस जमा कराई गई। ऑडिट टीम ने इस राशि के उपयोग और लेखांकन को लेकर भी आपत्ति दर्ज की है।
कई कार्यकालों में हुई खरीद
रिपोर्ट के अनुसार यह पूरा मामला CGMSC में वर्ष 2021 से 2025 के बीच हुए खरीद और भुगतान से जुड़ा है। इस अवधि में अलग-अलग प्रबंध संचालकों (MD) के कार्यकाल में दवा, उपकरण और निर्माण कार्यों की प्रक्रियाएं संचालित हुईं।
ऑडिट में इन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है।
CGMSC ने क्या कहा?
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद CGMSC प्रबंधन की ओर से कहा गया है कि ऑडिट में उठाए गए बिंदुओं का परीक्षण किया जाएगा। आवश्यक दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि ऑडिट आपत्तियों का जवाब नियमानुसार दिया जाएगा और यदि कहीं रिकॉर्ड संबंधी कमी पाई जाती है तो उसे दूर किया जाएगा।
जांच और कार्रवाई की संभावना
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा की जा सकती है। यदि ऑडिट में दर्ज आपत्तियां सही पाई जाती हैं तो संबंधित मामलों की विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
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