छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य की जमानत रखी बरकरार

Umeshwari Baghel | Jul 22, 2026, 16:59 IST
चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी। अदालत ने ED और राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट के आदेश की कुछ टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश भी दिए गए।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय और छत्तीसगढ़ सरकार की याचिकाएं भी खारिज कर दीं।



इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से चैतन्य बघेल को मिली जमानत जारी रहेगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि मामले से जुड़े कानूनी सवालों पर भविष्य में विचार किया जा सकता है।



हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि मौजूदा स्थिति में हाईकोर्ट के जमानत आदेश को बदलने का कोई आधार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में जांच एजेंसियों को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई।



अदालत ने इन टिप्पणियों को मामले के लिए जरूरी नहीं माना। उन्हें न्यायिक रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया गया। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत का फैसला मामले के आरोपों पर अंतिम राय नहीं है। मुकदमे से जुड़े तथ्य और कानूनी प्रश्न संबंधित अदालत में तय होंगे।



जमानत रद्द करने की मांग क्यों हुई

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 जनवरी को चैतन्य बघेल को जमानत दी थी। यह राहत कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में मिली थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने भी जमानत आदेश को चुनौती दी।



जांच एजेंसियों ने मामले की गंभीरता का हवाला दिया था। उनका कहना था कि जमानत मिलने से जांच प्रभावित होने की आशंका है। एजेंसियों ने कुछ गवाहों के सामने नहीं आने की बात भी कही थी। चैतन्य बघेल के वकीलों ने इन दलीलों का विरोध किया। बचाव पक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट ने सभी दस्तावेजों और पक्षों को सुनने के बाद जमानत दी थी। यह भी कहा गया कि जांच काफी समय से चल रही है।



क्या है कथित शराब घोटाला मामला

यह मामला छत्तीसगढ़ में हुए कथित 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय सहित अन्य जांच एजेंसियां इसके अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच शराब कारोबार की सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। एजेंसी के अनुसार अधिकारियों कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों के कथित नेटवर्क ने अवैध कमाई की।



जांच एजेंसी का दावा है कि शराब की खरीद और बिक्री से जुड़ी व्यवस्था में कथित हेरफेर हुआ। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने का आरोप है। मामले में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक जांच के दायरे में हैं। संबंधित आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।



फैसले का क्या असर होगा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चैतन्य बघेल की जमानत फिलहाल बनी रहेगी। जांच एजेंसियां कानून के अनुसार मामले की जांच जारी रख सकती हैं। अदालत के फैसले से यह भी स्पष्ट हुआ है कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से मुक्त होना नहीं है। जमानत केवल मुकदमा जारी रहने तक व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ी कानूनी राहत है।



IMP FACTS

सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी।



ED और छत्तीसगढ़ सरकार की अपील खारिज हुई।



हाईकोर्ट ने 2 जनवरी को जमानत दी थी।



मामला कथित 2,161 करोड़ रुपए के शराब घोटाले से जुड़ा है।



सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियां हटाने को कहा।



कानूनी सवालों पर आगे सुनवाई का रास्ता खुला रहेगा।



जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है।



मामले की जांच और ट्रायल आगे भी जारी रहेंगे।



निष्कर्ष

चैतन्य बघेल को मिली जमानत रद्द कराने की कोशिश सफल नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। अब मामले की आगे की दिशा जांच और निचली अदालत की सुनवाई से तय होगी।



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