छत्तीसगढ़ में 166 स्कूलों पर ताला, विधानसभा में उठे सवाल, उद्योग विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार कर बांट रहे जमीन
Raipur. छत्तीसगढ़ सरकार ने पढ़ाई की व्यवस्था करने के लिए युक्तियुक्तकरण किया। इस युक्तियुक्तकरण में छत्तीसगढ़ के 166 स्कूलों पर ताला डल गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विधानसभा में माना कि 166 स्कूल ऐसे हैं जिनमें कोई काम नहीं हो रहा। उनको दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है। अभी सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि इन स्कूलों का करना क्या है।
छत्तीसगढ़ के 166 स्कूल बंद :
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में पढ़ाई लिखाई पर फोकस करने हुए युक्तियुक्तकरण किया। इसमें शिक्षकों और स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया। जिन स्कूलों में टीचर नहीं थे वहां पर सरप्लस शिक्षकों को भेजा गया। वहीं विद्यार्थियों की संख्या और स्कूलों की दूरी के आधार पर आपस में स्कूलों को मर्ज किया गया।
छत्तीसगढ़ में 10538 स्कूलों को आपस में मर्ज किया गया। इस प्रक्रिया में प्रदेश के 166 स्कूल पूरी तरह बंद हो गए। इन स्कूलों पर ताला डल गया। यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने दी। जब विधायक सुनील सोनी और अजय चंद्राकर ने पूछा कि इनका क्या करेंगे तो मंत्री यादव कहते रहे कि इनको देखेंगे कि आने वाले सत्र में क्या उपयोग किया जा सकता है। मंत्री ने स्वीकार किया कि युक्तियुक्तकरण और स्कूलों के मर्जर में 166 स्कूल बंद हो गए हैं।
उद्योग विभाग पर उठे सवाल :
विधानसभा में बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि उद्योग विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार कर उद्योगों को जमीन बांट रहे हैं। सवाल कांग्रेस विधाायक चातुरी नंद ने उठाया। उन्होंने कहा कि महासमुंद में गोदावरी पॉवर एंड इस्पात लिमिटेड को कौड़ियों के दाम 250 एकड़ से ज्यादा जमीन आवंटित कर दी गई।
यह जमीन 4 लाख 82 हजार रुपए हेक्टेयर के हिसाब से 99 साल की लीज पर दे दी गई। इस पर उद्योगमंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि उद्योग नीति के आधार पर ही जमीन दी गई है। बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने इस पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
जंबूरी पर जंग :
विधानसभा में जंबूरी के आयोजन भी जमकर बवाल मचा। कांग्रेस विधायकों ने इसमें भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टेंडर में अनियमितता कर कंपनी का चयन किया गया। जिस कंपनी का चयन किया गया उसने पहले ही मैदान पर काम शुरु कर दिया था। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मंत्री के स्काउट गाइड के राज्य के अध्यक्ष में नियुक्ति के पहले ही टेंडर बुला लिया गया।
इतना ही नहीं मंत्री गजेंद्र यादव की नियुक्ति के बाद वो टेंडर निरस्त कर फिर से टेंडर बुलाया गया और टेंडर की शर्तें भी बदल दी गईं। इस मामले की विधायकों की समिति से जांच कराने की मांग की गई। मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि जब भ्रष्टाचार हुआ ही नही तो फिर जांच कैसी। इस पर सदन में जमकर हंगामा हुआ और कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया।
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