छत्तीसगढ़ के 30 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर संकट, 23 अक्टूबर तक कमियां दूर नहीं कीं तो बढ़ेगी मुश्किल
Umeshwari Baghel | Oct 18, 2026, 18:08 IST
छत्तीसगढ़ में 30 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता अटकी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग की पढ़ाई कराने वाले 30 कॉलेजों की मान्यता का मामला अटक गया है। इनमें 17 कॉलेजों के नवीनीकरण आवेदन खारिज हुए हैं। वहीं 13 कॉलेजों ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया। इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने संबंधित 17 कॉलेजों को 23 अक्टूबर तक कमियां दूर कर रिपोर्ट देने का आखिरी मौका दिया है।
छत्तीसगढ़ में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर बड़ी परेशानी सामने आई है। प्रदेश के 30 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) की जांच में कई कॉलेज तय नियमों पर खरे नहीं उतरे हैं। कहीं पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी मिली है तो कहीं अस्पतालों से जुड़े जरूरी दस्तावेज अधूरे पाए गए हैं।
इन खामियों के कारण 17 कॉलेजों के मान्यता नवीनीकरण आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। वहीं 13 कॉलेज ऐसे हैं जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया है। अब संबंधित संस्थानों के सामने तय समय पर प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है।
इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने 17 कॉलेजों को अपनी कमियां सुधारने का अंतिम अवसर दिया है। इन संस्थानों को 23 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी।
इस रिपोर्ट में कॉलेजों को बताना होगा कि जांच में सामने आई कमियों को किस तरह दूर किया गया है। साथ ही जरूरी दस्तावेज और निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी भी देनी होगी।
तय तारीख तक संतोषजनक रिपोर्ट नहीं देने वाले कॉलेजों की इस शैक्षणिक सत्र की मान्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन के पास जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है।
नर्सिंग काउंसिल की जांच में कॉलेजों की व्यवस्थाओं से जुड़ी कई खामियां सामने आई हैं। नियमों के अनुसार नर्सिंग कॉलेजों में हर 10 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना जरूरी है। जांच में कुछ कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक और ट्यूटर नहीं मिले।
इसके अलावा कई संस्थानों ने अपने संबद्ध अस्पतालों से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी जमा नहीं किए। इनमें मौजूदा सत्र के क्लिनिकल अनुमति पत्र और पिछले सत्र की शुल्क रसीदें शामिल हैं।
कुछ कॉलेजों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति भी सामने आई जिनके पास एक साल से कम का अनुभव था। वहीं भवन के प्रॉपर्टी टैक्स भुगतान की रसीदें भी उपलब्ध नहीं थीं। इन कमियों का असर मान्यता नवीनीकरण की प्रक्रिया पर पड़ा है।
कॉलेजों की जांच में ऑनलाइन रिकॉर्ड से जुड़ी परेशानियां भी सामने आई हैं। नेशनल रोल फॉर नर्सेस (एनआरटीएस) पोर्टल पर कई शिक्षकों का पंजीयन पूरा नहीं मिला।
इसके साथ ही कॉलेजों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का विवरण भी अधूरा पाया गया। नर्सिंग काउंसिल के नियमों के तहत संस्थानों को शिक्षकों और विद्यार्थियों से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होती है।
अब कॉलेजों को इन रिकॉर्ड में सुधार करने के साथ जरूरी दस्तावेज भी पूरे करने होंगे।
मान्यता को लेकर चल रही परेशानी के बीच छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (सीजीएनआरसी) ने 17 अक्टूबर को 122 नर्सिंग कॉलेजों की अंतिम सूची जारी की है।
इससे पहले कॉलेजों से जुड़ी दावा-आपत्तियों का निराकरण किया गया था। इसके बाद इन 122 कॉलेजों को नर्सिंग काउंसलिंग में शामिल होने के लिए पात्र माना गया है।
हालांकि जिन कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया अभी अधूरी है, उनके लिए स्थिति अलग है। उन्हें पहले निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी मान्यता संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में देरी का असर प्रवेश और काउंसलिंग पर भी पड़ा है। इसी वजह से काउंसलिंग और प्रवेश की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दी गई है।
अब कॉलेजों के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती 23 अक्टूबर तक मान्यता से जुड़ी कमियां दूर करने की है। दूसरी चुनौती 31 अक्टूबर तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने की है।
दोनों तारीखों के बीच केवल आठ दिन का अंतर है। ऐसे में जिन कॉलेजों की मान्यता अटकी हुई है, उन्हें निर्धारित समय में सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता सीधे तौर पर प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी होती है। जिन कॉलेजों को संबंधित परिषद से जरूरी मंजूरी नहीं मिलती, उनके लिए उस सत्र में प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल 17 कॉलेजों को अपनी कमियां सुधारने का मौका मिला है। अब उनकी रिपोर्ट और उस पर काउंसिल के निर्णय से साफ होगा कि उन्हें इस शैक्षणिक सत्र के लिए मान्यता मिल पाएगी या नहीं।
वहीं जिन 13 कॉलेजों ने आवेदन ही नहीं किया है, उनकी मान्यता प्रक्रिया की स्थिति भी अभी स्पष्ट नहीं है।
इस पूरे मामले में 23 अक्टूबर की समयसीमा महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद ही संबंधित कॉलेजों की मान्यता को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इन खामियों के कारण 17 कॉलेजों के मान्यता नवीनीकरण आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। वहीं 13 कॉलेज ऐसे हैं जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया है। अब संबंधित संस्थानों के सामने तय समय पर प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है।
23 अक्टूबर तक कॉलेजों को देना होगा जवाब
इस रिपोर्ट में कॉलेजों को बताना होगा कि जांच में सामने आई कमियों को किस तरह दूर किया गया है। साथ ही जरूरी दस्तावेज और निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी भी देनी होगी।
तय तारीख तक संतोषजनक रिपोर्ट नहीं देने वाले कॉलेजों की इस शैक्षणिक सत्र की मान्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन के पास जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है।
शिक्षकों की कमी से लेकर दस्तावेजों तक मिली गड़बड़ी
इसके अलावा कई संस्थानों ने अपने संबद्ध अस्पतालों से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी जमा नहीं किए। इनमें मौजूदा सत्र के क्लिनिकल अनुमति पत्र और पिछले सत्र की शुल्क रसीदें शामिल हैं।
कुछ कॉलेजों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति भी सामने आई जिनके पास एक साल से कम का अनुभव था। वहीं भवन के प्रॉपर्टी टैक्स भुगतान की रसीदें भी उपलब्ध नहीं थीं। इन कमियों का असर मान्यता नवीनीकरण की प्रक्रिया पर पड़ा है।
ऑनलाइन पोर्टल पर भी जानकारी अधूरी
इसके साथ ही कॉलेजों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का विवरण भी अधूरा पाया गया। नर्सिंग काउंसिल के नियमों के तहत संस्थानों को शिक्षकों और विद्यार्थियों से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होती है।
अब कॉलेजों को इन रिकॉर्ड में सुधार करने के साथ जरूरी दस्तावेज भी पूरे करने होंगे।
122 कॉलेजों को काउंसलिंग के लिए मिली पात्रता
इससे पहले कॉलेजों से जुड़ी दावा-आपत्तियों का निराकरण किया गया था। इसके बाद इन 122 कॉलेजों को नर्सिंग काउंसलिंग में शामिल होने के लिए पात्र माना गया है।
हालांकि जिन कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया अभी अधूरी है, उनके लिए स्थिति अलग है। उन्हें पहले निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी मान्यता संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
31 अक्टूबर तक पूरी करनी होगी प्रवेश प्रक्रिया
अब कॉलेजों के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती 23 अक्टूबर तक मान्यता से जुड़ी कमियां दूर करने की है। दूसरी चुनौती 31 अक्टूबर तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने की है।
दोनों तारीखों के बीच केवल आठ दिन का अंतर है। ऐसे में जिन कॉलेजों की मान्यता अटकी हुई है, उन्हें निर्धारित समय में सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
छात्रों के लिए क्यों जरूरी है मान्यता का मामला?
फिलहाल 17 कॉलेजों को अपनी कमियां सुधारने का मौका मिला है। अब उनकी रिपोर्ट और उस पर काउंसिल के निर्णय से साफ होगा कि उन्हें इस शैक्षणिक सत्र के लिए मान्यता मिल पाएगी या नहीं।
वहीं जिन 13 कॉलेजों ने आवेदन ही नहीं किया है, उनकी मान्यता प्रक्रिया की स्थिति भी अभी स्पष्ट नहीं है।
इस पूरे मामले में 23 अक्टूबर की समयसीमा महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद ही संबंधित कॉलेजों की मान्यता को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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