57 बंद खदानें बनी खतरा, संसद में खुला बड़ा सच

Rajesh Lahoti | Apr 02, 2026, 16:49 IST
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छत्तीसगढ़ में 57 खाली छोड़ी गई और बंद खदानों का मामला लोकसभा में उठा, जहां केंद्र सरकार ने आंकड़े जारी किए। भूजल प्रदूषण से इनकार किया गया, लेकिन पुनर्वास और सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिससे जमीनी खतरे पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Raipur. छत्तीसगढ़ में खनन के बाद छोड़ी गई जमीनों का सच अब संसद के पटल पर सामने आ गया है। लोकसभा में कांग्रेस सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत के सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने खुलासा किया कि राज्य में कुल 57 खदानें ऐसी हैं, जो या तो पूरी तरह खाली छोड़ दी गई हैं या लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इसमें 14 बॉक्साइट, 3 आयरन ओर, 8 टिन और 32 चूना पत्थर की खदानें शामिल हैं। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि खनन के बाद अधूरी जिम्मेदारियों की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है।



खनन खत्म, जिम्मेदारी भी खत्म

केंद्र सरकार की ओर से राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बताया कि इन खदानों से 2018 के बाद भूजल प्रदूषण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, इस जवाब ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या इन खदानों की जमीनी स्थिति का नियमित आकलन किया जा रहा है या नहीं। ग्रामीण इलाकों में मौजूद खुले में छोड़ी गई कई खदानें आज भी खुले गड्ढों के रूप में मौजूद हैं, जो बरसात के समय पानी से भरकर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं।



राज्य के सर पर जिम्मेदारी

सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि फाइनल माइन क्लोजर प्लान, वित्तीय गारंटी का उपयोग और खदानों का पुनर्वास प्रमुख कार्य है। ये सभी कार्य राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जैसा कि माइनरल कंजर्वेशन एंड डेवलपमेंट रूल्स 2017 में प्रावधान है। इससे यह स्पष्ट है कि केंद्र ने अपनी भूमिका सीमित बताते हुए जिम्मेदारी राज्य पर छोड़ दी है।



कोई ठोस योजना नहीं

सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन 57 खदानों के पुनर्वास के लिए कोई समयबद्ध योजना या स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं रखा गया। यानी आने वाले वर्षों में भी ये खदानें इसी तरह खुली रह सकती हैं, जिससे पर्यावरणीय और मानवीय जोखिम बना रहेगा। भले ही सरकार ने प्रदूषण से इनकार किया हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग ही है। खुले गड्ढे, असुरक्षित क्षेत्र और अधूरी भराई, ये सब ग्रामीणों और पशुओं के लिए खतरा बने हुए हैं। संसद में आंकड़े सामने आने के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन खदानों के पुनर्वास को लेकर कब और कैसे ठोस कदम उठाएं जाएंगे।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में कुल कितनी बंद खदानें हैं?
    छत्तीसगढ़ में कुल 57 खदानें ऐसी हैं जो या तो खुलेमें छोड़ दी गई हैं या गैरकार्यशील हैं। इनमें बॉक्साइट, आयरन ओर, टिन और लाइमस्टोन जैसी प्रमुख खनिज खदानें शामिल हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में आधिकारिक तौर पर दी है।
  2. क्या बंद खदानों से पर्यावरण या पानी को खतरा है?
    सरकार के अनुसार 2018 के बाद से भूजल प्रदूषण का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई खदानें खुले गड्ढों के रूप में मौजूद हैं, जो बारिश में पानी भरने के बाद दुर्घटनाओं और संभावित पर्यावरणीय खतरे का कारण बन सकती हैं।
  3. खदानों के पुनर्वास की जिम्मेदारी किसकी है?
    माइनरल कंजर्वेशन एंड डेवलपमेंट रूल्स, 2017 के अनुसार इन खदानों के बंद करने, सुधार और पुनर्वास की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है। इसमें फाइनल माइन क्लोजर प्लान और वित्तीय गारंटी का उपयोग भी शामिल है।

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