बिना परमिशन आपके बच्चों की जानकारी APAAR ID में हो रही अपलोड, निजी स्कूलों पर कलेक्टर बना रहे दबाव
छत्तीसगढ़ में बच्चों के डेटा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 3 से 15 साल तक के छात्रों की जानकारी अपलोड की जा रही है। यह सब APAAR आईडी के नाम पर किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि कई मामलों में अनुमति नहीं ली गई।
निजी स्कूल संचालक खुलकर सामने आने लगे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन लगातार दबाव बना रहा है। कलेक्टर के आदेश का हवाला देकर काम करवाया जा रहा है। स्कूलों के पास मना करने का विकल्प नहीं बचा है। बताया गया कि कई जगह नोटिस भी जारी हुए हैं। करीब 55 लोगों को नोटिस मिलने की बात सामने आई है। इससे स्कूल प्रबंधन में डर साफ दिख रहा है।
रायपुर समेत कई जिलों में बढ़ा विवाद
रायपुर सहित कई जिलों में हालात तनावपूर्ण हैं। स्कूलों में रोज नए विवाद सामने आ रहे हैं। अभिभावक सवाल पूछ रहे हैं और जवाब नहीं मिल रहा। कुछ पेरेंट्स कह रहे हैं कि आधार अपडेट नहीं है। कई लोग साफ मना कर रहे हैं कि उन्हें जरूरत नहीं। फिर भी स्कूलों पर दबाव बना हुआ है।
नियम साफ, फिर भी मनमानी क्यों
APAAR ID Card को लेकर नियम बिल्कुल स्पष्ट हैं। यह योजना स्वैच्छिक बताई गई है। मतलब इसे बनाना जरूरी नहीं है। भारत सरकार की पहल है। APAAR ID या 'वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी' एक 12-अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान है, जो शिक्षा मंत्रालय द्वारा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत छात्रों के लिए बनाई गई है। यह छात्र के शैक्षणिक रिकॉर्ड और पुरस्कारों को डिजिटल रूप से एक ही जगह सुरक्षित रखती है।
बिना सहमति डेटा लेना, बड़ा उल्लंघन
डेटा प्राइवेसी को लेकर नियम बहुत सख्त हैं। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। किसी भी व्यक्ति का डेटा बिना अनुमति नहीं लिया जा सकता। बच्चों के मामले में यह और ज्यादा संवेदनशील होता है। इसके बावजूद बिना सहमति डेटा लिया जा रहा है। यह सीधा नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
अभिभावकों में डर, भविष्य को लेकर चिंता
अभिभावक अब खुलकर चिंता जता रहे हैं। उन्हें बच्चों के डेटा की सुरक्षा का डर है। छोटे बच्चों के फिंगरप्रिंट बदलते रहते हैं। आगे चलकर दिक्कत आ सकती है। दस्तावेजों में भी समय के साथ बदलाव होता है। लोग मानते हैं कि बच्चे बड़े होकर खुद काम कर सकते हैं। फिर अभी इतनी जल्दी क्यों की जा रही है। यही सवाल हर जगह उठ रहा है।
ID बनी, पर एक्सेस नहीं मिला
जिन बच्चों की APAAR आईडी बन चुकी है, उनके अभिभावकों की नई परेशानी सामने आई है। उन्हें आईडी का पासवर्ड नहीं दिया गया। लॉगिन की जानकारी भी अधूरी है। छह महीने से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी तक एक्सेस नहीं मिला है। ऐसे में डॉक्यूमेंट अपलोड कैसे होंगे, इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
डेटा सुरक्षा पर बड़े सवाल, खतरा कितना गंभीर
विशेषज्ञ इस पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। बच्चों का डेटा बेहद संवेदनशील होता है। इसमें निजी और शैक्षणिक जानकारी शामिल होती है। अगर सुरक्षा मजबूत नहीं है तो खतरा बढ़ सकता है। डेटा लीक होने की आशंका भी जताई जा रही है। गलत उपयोग का डर भी बना हुआ है। बिना मजबूत सुरक्षा के इतना डेटा इकट्ठा करना जोखिम भरा है।
सुविधा के नाम पर जल्दबाजी भारी
APAAR आईडी एक अच्छी सोच हो सकती है। लेकिन इसे लागू करने का तरीका गलत दिख रहा है। बिना अनुमति डेटा लेना भरोसा तोड़ता है। स्कूलों पर दबाव बनाना भी सही नहीं है। जरूरत है पारदर्शिता और सही प्रक्रिया की। वरना यह विवाद और बढ़ सकता है।
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