कौन है कुख्यात नक्सली कमांडर पापाराव? छोटी उम्र में ही हिड़मा के साथ जॉइन किया था संगठन
बस्तर संभाग से एक बेहद अहम खबर सामने आई है। लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने डीवीसीएम रैंक के कुख्यात नक्सली पापाराव उर्फ मंगू उर्फ सुन्नम चन्द्रैया ने आखिरकार आत्मसमर्पण करने का फैसला कर लिया है। वह अपने 17 साथियों के साथ पुलिस के सामने सरेंडर करने निकल पड़ा है।
कौन है पापाराव?
पापाराव मूल रूप से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के किस्टाराम थाना क्षेत्र के ग्राम निम्मलगुड़ा का रहने वाला है। वह बस्तर का दूसरा ऐसा स्थानीय नक्सली है, जो डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर) जैसे शीर्ष रैंक तक पहुंचा। इससे पहले माड़वी हिड़मा ही इस स्तर तक पहुंचा था, जिसकी हाल ही में एनकाउंटर में मौत हो चुकी है।
पापाराव डीकेएसजेडसी (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का सेक्रेटरी भी बन चुका था, जो नक्सल संगठन में बेहद प्रभावशाली पद माना जाता है।
नक्सल बनने की कहानी
90 के दशक में किशोरावस्था के दौरान पापाराव ने माड़वी हिड़मा के साथ नक्सल संगठन जॉइन किया था। उस समय क्षेत्र में नक्सलियों की सक्रियता और “चेतना नाट्य मंडली” के क्रांतिकारी गीतों से प्रभावित होकर उसने हथियार उठा लिए। बाल संघम सदस्य से शुरू हुआ उसका सफर धीरे-धीरे उसे हार्डकोर नक्सली बना गया।
कई बड़ी वारदातों में नाम
पापाराव पर कई बड़े और खूनी हमलों की साजिश रचने के आरोप हैं:
- ताड़मेटला में सीआरपीएफ के 76 जवानों की हत्या- देश की सबसे बड़ी नक्सली घटना मानी जाती है
- दंतेवाड़ा-सुकमा मार्ग पर चिंगावरम में बस ब्लास्ट- 32 नागरिकों और जवानों की मौत
- बीजापुर के कुटरू में ब्लास्ट- 8 जवानों की हत्या
इन घटनाओं के बाद वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए “फैंटम” बन चुका था-जिसकी मौजूदगी तो मिलती थी, लेकिन पकड़ में नहीं आता था।
क्यों लिया सरेंडर का फैसला?
हाल के समय में नक्सल संगठन को बड़े झटके लगे हैं। कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं या सरेंडर कर चुके हैं, जिनमें बसवा राजू, गणेश उइके, गुड्सा उसेंडी और माड़वी हिड़मा जैसे नाम शामिल हैं। संगठन के अंदर भी अब दो धड़े बन चुके हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा घोषित 31 मार्च की डेडलाइन और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव ने भी पापाराव को यह फैसला लेने पर मजबूर किया। बताया जा रहा है कि सुकमा कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण खुद उसके गांव पहुंचे थे और परिवार के जरिए उसे समझाने की कोशिश की थी। इसके अलावा, रेडियो संदेशों और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया।
खुद क्या बोला पापाराव?
नक्सली लीडर पापाराव ने स्वीकार किया कि वर्तमान हालात में सशस्त्र संघर्ष जारी रखना संभव नहीं है। उसने कहा कि अब खुद को सुरक्षित रखना और सामान्य जीवन जीना ज्यादा जरूरी है।
क्या है इसका असर?
पापाराव का सरेंडर बस्तर में नक्सल आंदोलन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह न सिर्फ संगठन की कमजोर होती पकड़ को दिखाता है, बल्कि बाकी नक्सलियों के लिए भी एक संकेत है कि अब हथियार छोड़ने का रास्ता अपनाया जा रहा है।
निष्कर्ष:
पापाराव (Naxalite commander Paparao) का सरेंडर सिर्फ एक व्यक्ति का आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते हालात और नक्सल आंदोलन के कमजोर पड़ते प्रभाव का बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में और भी नक्सलियों के सरेंडर करने की संभावना जताई जा रही है।
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