प्रोफेसरों का टोटा, चार साल का B.Ed. सपना बना पहाड़, टॉस्क फोर्स का राग जारी
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रदेश में एक भी B++ ग्रेड कॉलेज नहीं।
- चार वर्षीय ITEP अभी कहीं शुरू नहीं।
- बस्तर विश्वविद्यालय में सिर्फ 29 नियमित शिक्षक।
- यूजीसी मानकों के मुकाबले 60% शिक्षकों की कमी।
- फिलहाल सिर्फ टॉस्क फोर्स, ठोस रोडमैप नहीं।
Raipur। नई शिक्षा नीति लागू हो गई। बीएड दो साल की जगह चार साल करने की घोषणा है। लेकिन छग में अभी पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। जो कॉलेज शिक्षक तैयार करते हैं, वही मानकों में पिछड़ गए। एक भी कॉलेज B++ ग्रेड का नहीं। ऐसे में चार वर्षीय बीएड शुरू कैसे होगा? सवाल उठा तो जवाब मिला- टॉस्क फोर्स बना दी है। मंत्री टंकराम वर्मा दो सालों से केवल शिक्षकों की भर्ती जल्द पूरी करने का बयान देते आ रहे हैं।
सरकार का जवाब... अभी सिर्फ तैयारी
प्रदेश में अभी दो वर्षीय बीएड और डीएड ही चल रहे हैं। चार वर्षीय कोर्स 2026 से शुरू करने की योजना है। पहला बैच 2030 में निकलेगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पात्र कॉलेज ही नहीं हैं तो पढ़ाई कहां होगी? सरकार का तर्क है कि यूजीसी और एनसीटीई के नियमों के हिसाब से रास्ता तलाशने के लिए टॉस्क फोर्स बनाई गई है। यानी फिलहाल रोडमैप नहीं, सिर्फ समिति है।
बस्तर का हाल सबसे ज्यादा खराब
बस्तर के शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय की तस्वीर और भी चिंताजनक है। विश्वविद्यालय में शैक्षणिक संवर्ग के 265 पद स्वीकृत हैं। इनमें 236 पद खाली हैं। यानी नियमित शिक्षक सिर्फ 29। गैर-शैक्षणिक 320 पदों में 291 रिक्त हैं। हालत यह है कि यूजीसी के हिसाब से विश्वविद्यालय में 223 शिक्षक होने चाहिए, लेकिन गिनती के 29 शिक्षक पूरे संस्थान का बोझ उठा रहे हैं। शिक्षा का यह ढांचा सवालों के घेरे में है।
कॉलेजों में सीटें हैं... शिक्षक नहीं
विश्वविद्यालय की छात्र क्षमता 3300 है। पढ़ रहे हैं सिर्फ 1898 छात्र। संबद्ध कॉलेजों की क्षमता 44,632 है, लेकिन दाखिला सिर्फ 21,972 का है। सबसे बड़ा झटका शिक्षकों की संख्या में है। संबद्ध कॉलेजों में यूजीसी मानकों के मुताबिक 2037 शिक्षक होने चाहिए। मौजूद हैं सिर्फ 292 नियमित शिक्षक। यानी हर तरफ स्टाफ की भारी कमी। सवाल उठ रहा है कि ऐसे में गुणवत्ता वाली शिक्षा कैसे मिलेगी?
छात्र नहीं... फिर भी भर्ती जारी
सदन में सबसे ज्यादा चर्चा सांख्यिकी विभाग की भर्ती पर हुई। विश्वविद्यालय ने ऐसे विषय में शिक्षक भर्ती का विज्ञापन निकाला, जिसमें फिलहाल एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है। विपक्ष ने इसे सरकारी संसाधनों की बर्बादी बताया। सरकार ने जवाब दिया कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय मेरू विश्वविद्यालय है। यहां बहुविषयक शोध और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सांख्यिकी विभाग जरूरी है। सरकार ने इसे दीर्घकालीन योजना बताया, लेकिन सवाल यह बना रहा कि जहां मौजूदा शिक्षक नहीं हैं, वहां बिना छात्रों वाले विषय में भर्ती की प्राथमिकता क्यों?
कोंडागांव आज भी इंतजार में
कोंडागांव में दो वर्षीय कोर्स खुलेगा या चार वर्षीय ITEP। सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। सिर्फ इतना कहा कि प्रदेश में 13 महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां बीएड कॉलेज खोलने की संभावना है। लेकिन कौन से कॉलेज? कब शुरू होंगे? किस मॉडल पर चलेंगे? इसका जवाब नहीं मिला। यानी आदिवासी अंचल के छात्र अभी भी इंतजार में हैं।
शिकायत पर जवाब भी उलझा
महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सदन में विरोधाभास सामने आया। लिखित जवाब में पुरानी शिकायत की जांच और उसे निराधार बताकर बंद करने की जानकारी दी गई। वहीं मंत्री ने सदन में कहा कि मौजूदा भर्ती में कोई शिकायत नहीं मिली। विपक्ष ने इसी विरोधाभास पर सरकार को घेरा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि पुरानी शिकायत की जांच राज्यपाल एवं कुलाधिपति के स्तर पर पूरी हो चुकी है और मामला समाप्त कर दिया गया है।
शिक्षा सुधार या सिर्फ कागजी तैयारी?
नई शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। दो वर्षीय बीएड की मान्यता भविष्य में खत्म होने की स्थिति बन रही है। लेकिन छत्तीसगढ़ अभी भी बुनियादी तैयारी में पिछड़ा दिख रहा है। B++ ग्रेड वाला कॉलेज नहीं। चार वर्षीय ITEP कहीं शुरू नहीं। बस्तर में शिक्षक नहीं। कोंडागांव में कॉलेज नहीं। सरकार के पास फिलहाल टॉस्क फोर्स है, टाइमलाइन नहीं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गुरुजी तैयार करने वाली व्यवस्था ही कमजोर है तो प्रदेश के स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना आखिर पूरा कैसे होगा?
IMP FACTS
प्रदेश में एक भी B++ ग्रेड B.Ed. कॉलेज नहीं है।
चार वर्षीय ITEP कोर्स अभी कहीं शुरू नहीं हुआ है।
सरकार की योजना 2026 से चार वर्षीय कोर्स शुरू करने की है।
पहला चार वर्षीय बैच 2030 में पासआउट होगा।
बस्तर के शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में 265 में से 236 शैक्षणिक पद खाली हैं।
विश्वविद्यालय में सिर्फ 29 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं।
यूजीसी मानकों के अनुसार यहां 223 शिक्षक होने चाहिए।
गैर-शैक्षणिक 320 पदों में 291 पद रिक्त हैं।
संबद्ध कॉलेजों में 2037 शिक्षकों की जरूरत, जबकि सिर्फ 292 नियमित शिक्षक हैं।
प्रदेश में 13 महाविद्यालयों में B.Ed. कॉलेज खोलने की संभावना बताई गई है।
फिलहाल सरकार ने टॉस्क फोर्स बनाई है, लेकिन स्पष्ट रोडमैप और टाइमलाइन नहीं है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में चार वर्षीय B.Ed./ITEP कब शुरू होगा?
सरकार की योजना 2026 से चार वर्षीय कोर्स शुरू करने की है। इसका पहला बैच 2030 में निकलेगा। - छत्तीसगढ़ में कितने B++ ग्रेड B.Ed. कॉलेज हैं?
फिलहाल प्रदेश में एक भी B++ ग्रेड B.Ed. कॉलेज नहीं है। - बस्तर विश्वविद्यालय में कितने नियमित शिक्षक हैं?
शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में 265 स्वीकृत शैक्षणिक पदों में से 236 खाली हैं। यहां सिर्फ 29 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं।
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