9,188 करोड़ के DMF फंड पर सवाल, कमीशन वसूली का आरोप, छाबड़ा गिरफ्तार

VINAY VERMA | Sept 02, 2026, 21:52 IST
ED की गिरफ्त में सतपाल छाबड़ा
छत्तीसगढ़ DMF घोटाले में ED ने सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। जांच 9,188 करोड़ रुपए के फंड और कथित कमीशन नेटवर्क पर केंद्रित है। ED का आरोप है कि सप्लाई ऑर्डर के जरिए 25-50% तक कमीशन वसूला गया।

Raipur। छत्तीसगढ़ के खनिज बहुल जिलों में विकास के लिए आया हजारों करोड़ का DMF फंड अब जांच एजेंसियों के निशाने पर है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर कथित कमीशन सिंडिकेट की परतें खोलने की शुरुआत की है। 1 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद उसे रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से ED को पांच दिन की हिरासत मिली है।



9,188 करोड़ की रकम पर जांच

ED की जांच का दायरा छोटा नहीं है। वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच अलग-अलग जिलों को DMF के तहत करीब 9,188.20 करोड़ रुपए मिले। यह पैसा खनन से प्रभावित इलाकों और लोगों के विकास के लिए था। आरोप है कि फंड का एक हिस्सा ऐसे सप्लाई आधारित कामों में खपाया गया, जहां सामान की कीमत और भुगतान के जरिए कमीशन निकालने की गुंजाइश ज्यादा थी।



सप्लाई के नाम पर कमीशन का खेल

जांच एजेंसी के मुताबिक DMF की बड़ी रकम छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम यानी बीज निगम के जरिए खर्च की गई। आरोप है कि दर अनुबंध वाले सप्लायरों को जारी खरीद आदेशों की मूल कीमत पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला गया। यानी सरकारी फंड से होने वाली खरीद में ही कथित तौर पर मोटा हिस्सा पहले से तय था।



ऑर्डर से भुगतान तक नेटवर्क

ED का दावा है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का खेल नहीं था। जांच में एक संगठित सिंडिकेट सामने आया है। आरोप है कि एजेंट और संपर्क सूत्र सप्लायरों को काम दिलाने, खरीद आदेश जारी कराने और भुगतान करवाने के लिए नेटवर्क के तौर पर काम करते थे। एजेंसी का दावा है कि कमीशन की रकम का हिस्सा अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था।



छाबड़ा पर क्या आरोप?

सतपाल सिंह छाबड़ा पर इस पूरे नेटवर्क में अहम कड़ी होने का आरोप है। ED के मुताबिक वह ऐसे DMF कार्यों की पहचान करता था, जिनमें ज्यादा कमीशन की संभावना रहती थी। इसके बाद काम चयनित सप्लायरों में प्रतिशत के हिसाब से बांटने, ऑर्डर और भुगतान करवाने तथा सप्लायरों से कमीशन जुटाने की भूमिका निभाने का आरोप है।



31 करोड़ की रकम बनी सबसे बड़ा सवाल

जांच एजेंसी ने बैंक खातों के लेनदेन और पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों का विश्लेषण किया है। ED के अनुसार छाबड़ा को करीब 31 करोड़ रुपए का अवैध कमीशन मिला। एजेंसी इसे अपराध से अर्जित आय यानी Proceeds of Crime मान रही है। आरोप है कि रकम छाबड़ा के साथ उसके परिवार, HUF और उसके नियंत्रण वाली संस्थाओं के खातों में पहुंची।



पहले ही पड़ चुका था छापा

ED इस मामले में पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। 3 और 4 सितंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान कई दस्तावेज जब्त किए गए। इन्हीं दस्तावेजों, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और पूछताछ से जांच आगे बढ़ी।



अब रिमांड में खुलेगा नेटवर्क?

छाबड़ा की पांच दिन की ED रिमांड को जांच में अहम माना जा रहा है। एजेंसी अब कथित कमीशन की पूरी चेन, सप्लायरों की भूमिका, भुगतान के रास्ते और रकम के अंतिम लाभार्थियों की पड़ताल कर सकती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 9,188 करोड़ के DMF फंड में कथित कमीशन का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसकी पहुंच आखिर कहां तक थी?



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ DMF घोटाला क्या है?
    यह मामला DMF फंड के कथित दुरुपयोग और सप्लाई ऑर्डर में कमीशन वसूली के आरोपों से जुड़ा है। ED इसकी जांच कर रही है।
  2. ED ने सतपाल सिंह छाबड़ा को क्यों गिरफ्तार किया है?
    ED का आरोप है कि छाबड़ा कथित कमीशन सिंडिकेट की अहम कड़ी था और DMF कार्यों में अवैध कमीशन जुटाने में उसकी भूमिका थी।
  3. DMF फंड में कितने रुपए की जांच हो रही है?
    ED करीब 9,188 करोड़ रुपए के DMF फंड से जुड़े खर्च और कथित कमीशन नेटवर्क की जांच कर रही है।

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