छत्तीसगढ़ सरकार ने खदानों के लिए दे दी सवा 2 लाख पेड़ों की बलि, हसदेव के 1 लाख पेड़ों पर चली उद्योगपतियों की आरी
NEWS IN SHORT
- साल 2022 से 2026 तक पेड़ कटने का आंकड़ा
- सरकार ने 2 लाख 33 हजार 237 पेड़ काटने की अनुमति दी
- अब तक काटे गए पेड़ 1 लाख 95 हजार 292
- हसदेव से कटे 1 लाख पेड़
- पेड़ काटने के एवज में पेड़ लगाने का प्रावधान नहीं
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में 4 साल में 2 लाख पेड़ कटे :
छत्तीसगढ़ में उद्योग और खनन परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। बिजली के लिए दूसरे राज्यों की कोयले की जरुरत को पूरा करने के लिए पेड़ों पर आरी चल रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार सालों में करीब दो लाख पेड़ काटे जा चुके हैं। इससे भी अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दी जा चुकी है।
इस मामले में की गई द सूत्र की पड़ताल में सामने आया है कि साल 2022 से जनवरी 2026 तक सरकार ने 2 लाख 33 हजार 237 पेड़ काटने की अनुमति दी। इनमें से अब तक 1 लाख 95 हजार 292 पेड़ काटे गए।
हसदेव अरण्य में सबसे ज्यादा पेड़ों की कटाई :
हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई सबसे ज्यादा हुई है। सरकार से मिली जानकारी के अनुसार इस समय में हसदेव से 1 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं। हसदेव में कोयला खनन को लेकर सालों से आंदोलन चल रहा है।
छत्तीसगढ़ की इन कोयला खदानों से महाराष्ट्र और राजस्थान की बिजली कंपनियों के लिए कोयला निकाला जा रहा है। इन खदानों में अडानी समूह माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर (एमडीओ) के रूप में काम कर रहा है। यानी खदानों के विकास और संचालन की जिम्मेदारी इसी कंपनी के पास है।
इन जिलों में इतने कटे पेड़ :
कोरबा - 19150
रायगढ़ - 51851, अनुमति - 69525
दंतेवाड़ा - 15481, अनुमति - 21699
बीजापुर - 341
कांकेर - 9952, अनुमति - 21297
नारायणपुर - 17836, अनुमति - 20491
रायपुर -128
सरगुजा - 73888, अनुमति - 73941
सूरजपुर - 6695
इन कंपनियों ने काटे पेड़ :
एसईसीएल
एनटीपीसी
बीएस स्पंज प्रा.लि.
जिंदल स्टील एंड पॉवर
महाराष्ट्र स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी,एमडीओ अडानी कंपनी
रावघाट लौह अयस्क परियोजना
टेक्सटाइल पार्क
राजस्थान के लिए कोल ब्लॉक, एमडीओ अडानी कंपनी
सरकार का तर्क :
पेड़ों की कटाई को लेकर जब वन मंत्री केदार कश्यप से सवाल किया गया तो जवाब में कहा गया कि पेड़ काटने के बदले नए पेड़ लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग की अनुमति नियमानुसार दी जाती है।
हालांकि पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर हो रही इस कटाई से पर्यावरण संतुलन पर असर पड़ सकता है। जंगलों की संख्या कम होने से वन्यजीवों के आवास, जल स्रोतों और स्थानीय जलवायु पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हसदेव बचाने के लिए काम करने वाले आलोक शुक्ला का कहना है कि सरकार की यह बहुत कम संख्या बता रही है। इससे दोगुने पेड़ काटे जा चुके हैं। आदिवासियों के विरोध के बाद भी सरकार उद्योगपतियों के आगे नतमस्तक है।
निष्कर्ष :
छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख वन संपदा वाले राज्यों में गिना जाता है। ऐसे में लगातार बढ़ रही खनन परियोजनाओं और पेड़ों की कटाई ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि जंगलों की सुरक्षा के साथ-साथ औद्योगिक जरूरतों को भी पूरा किया जा सके।