पेड़ काटने पर हाई कोर्ट सख्त, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों पर एक लाख रुपये का जुर्माना

Mukesh Sharma | Jan 15, 2026, 19:17 IST
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high court order
Photograph: (the sootr)

राजस्थान हाई कोर्ट ने अवैध पेड़ कटाई के मामले में एसडीएम सिकराय और अन्य अधिकारियों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने पेड़ काटने के लिए अधिकृत अनुमति न लेने को गंभीर माना और भविष्य में ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की बात की।

News in Short

  1. राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश: एसडीएम सिकराय और अन्य अधिकारियों पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया।
  2. पेड़ की कटाई का विवाद: 25 की जगह 150 पेड़ काटे गए, जबकि केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति थी।
  3. नई पौधों की रोपाई: सरकार ने 500 नए पौधे लगाए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह कटाई को उचित नहीं ठहराता।
  4. जुर्माना राशि का उपयोग: जुर्माना राशि का उपयोग नए पौधों के रखरखाव में किया जाएगा।
  5. आगे की कार्रवाई: अदालत ने कहा कि अवैध पेड़ कटाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

News In Detail

Jaipur. राजस्थान हाई कोर्ट ने पंचायत भवन बनाने के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना और अनुमत संख्या से ज्यादा पेड़ काटने को गंभीर माना है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की बैंच ने तत्कालीन एसडीएम सिकराय व अन्य अधिकारियों पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने यह आदेश विमला देवी की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिए। अदालत ने जुर्माना राशि पेड़ों की कटाई में शामिल संबंधित अधिकारियों से वसूल करने के निर्देश ​दिए है।

पर्यावरण को बचाने वाले पेड़ों की रक्षा जरुरी

अदालत ने कहा है कि सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए बिल्डिंग बनाना जरुरी है। लेकिन,इसके साथ ही पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण को बनाए रखने के लिए पेडों की रक्षा करना भी जरुरी है। अदालत ने कहा कि बिल्डिंग बनाने की योजना ही इस प्रकार से होनी चाहिए जिससे मौजूदा पेड़ों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचे।

25 की जगह 150 पेड़ काट दिए

जनहित याचिका में कहा गया था कि ग्राम पंचायत पाटन की बिल्डिंग बनाने के लिए तत्कालीन एसडीएम ने बिना अधिकार के पेड़ काटने की अनुमति दे दी। अनुमति सिर्फ 17 बड़े और मध्यम आकार के तथा आठ छोटे पेड़,कुल 25 पेड़ को काटने की थी। लेकिन,प्रशासन ने 25 पेड़ के स्थान पर 150 से ज्यादा पेड़ काट दिए।

500 पेड़ लगाने का दावा

सरकार की ओर से कहा गया कि पंचायत भवन के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई के बदले अलग से भूमि चिन्हित की गई और लगभग 500 पेड़ लगाए गए हैं।

नए पौधे लगाना मौजूदा पेड़ कटाई का आधार नहीं

अदालत ने कहा ​है कि संबंधित एसडीएम ने वृक्षों की कटाई के लिए किसी भी प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली। किसी अन्य स्थान पर नए पौधे लगाना मौजूदा पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई को उचित ठहराने का आधार नहीं है।

सख्त कार्रवाई होनी चाहिए

अदालत ने कहा कि सरकार के शपथ पत्र में मात्र 25 पेड़ काटना बताया है। लेकिन,रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि यह क्षेत्र जंगल के घने पेड़ों से भरा हुआ था जिन्हें अवैध रूप से काटा गया है। कोर्ट ने कहा है कि पेड़ काटने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए थी। ना केवल पेड़ काटने का अवैध आदेश देने वाले अधिकारी के खिलाफ बल्कि अवैध आदेश की पालना में पेड़ काटने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

जुर्माना राशि पेड़ों के रखरखाव में काम ली जाए

अदालत ने कहा कि इस जनहित याचिका के दायर होने के बाद वर्तमान एसडीएम ने नए पौधे लगाने का प्रयास किया जो बड़े हो गए हैं। इनकी तस्वीरें भी पेश की गई है जिनसे पता चलता है कि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

अदालत ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए नए लगाए पौधों की समय-समय पर निगरानी करने व पौधों को भविष्य में मजबूत वृक्षों के रूप में विकसित होने के लिए संरक्षित करने को कहा है। अदालत ने जुर्माना राशि बड़े हो चुके इन पौधों के रखरखाव में काम में लेने तथा इनकी रक्षा के लिए एक वृक्ष रक्षक की नियुक्ति करने को भी कहा है।

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