छत्तीसगढ़ के सरकारी भवनों में एक अप्रैल से प्री-पेड मीटर अनिवार्य, ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला

VINAY VERMA | Feb 19, 2026, 19:42 IST
chhattisgarh government buildings
छत्तीसगढ़ में सरकारी भवनों में प्री-पेड बिजली मीटर लगाने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय 'द सूत्र' की खबर के बाद लिया गया, जिसमें बकाया बिजली बिलों का खुलासा हुआ था।

News in Short

  • 'द सूत्र' की खबर के बाद छत्तीसगढ़ में सरकारी भवनों में प्री-पेड मीटर लगाने का निर्णय लिया गया।
  • बकाया बिजली बिलों की वसूली के लिए ऊर्जा विभाग ने अभियान शुरू किया।
  • 20 लाख रुपए से अधिक की वसूली अब तक की जा चुकी है।
  • प्री-पेड मीटर में रिचार्ज खत्म होने पर बिजली आपूर्ति बंद हो जाएगी।
  • बकाया राशि की वसूली प्री-पेड रिचार्ज के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

News in Detail

छत्तीसगढ़ में सरकारी भवनों के बिजली बकाया को लेकर सामने आई 'द सूत्र' की खबर का बड़ा प्रशासनिक असर देखने को मिला है। ऊर्जा विभाग ने फैसला किया है कि एक अप्रैल से राज्य के सभी सरकारी भवनों में प्री-पेड बिजली मीटर लगाए जाएंगे। इस निर्णय की जानकारी ऊर्जा सचिव रोहित यादव ने दी। बता दें कि सरकारी आवासों और विभागों पर लंबित बिजली बिल को लेकर 'द सूत्र' ने बड़ा खुलासा किया था। इसके बाद विभाग सक्रिय हुआ और वसूली अभियान शुरू किया गया।



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किन-किन का आया था नाम

रिपोर्ट में मुख्यमंत्री निवास, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्रीगण और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सरकारी बंगलों के बकाया बिजली बिल का जिक्र किया गया था। इसके अलावा कई उद्योगपतियों और आईएएस एसोसिएशन पर भी लाखों रुपए के बिजली बिल बकाया होने की बात सामने आई थी। इस खुलासे ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी।



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20 लाख से अधिक की वसूली

खबर सामने आने के बाद ऊर्जा विभाग ने अलग-अलग विभागों और कार्यालयों से बकाया राशि की वसूली शुरू की। विभागीय सूत्रों के अनुसार अब तक 20 लाख रुपए से अधिक की बकाया बिजली राशि वसूल की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया अभी जारी है और बाकी लंबित भुगतान भी जल्द वसूले जाएंगे। सरकार का मानना है कि समय पर भुगतान सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि राजस्व पर अनावश्यक दबाव न पड़े।



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क्या होगी नई प्री-पेड व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी भवनों में पारंपरिक पोस्ट-पेड मीटर हटाकर प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे। संबंधित विभाग या अधिकारी को कम से कम तीन महीने का अग्रिम रिचार्ज कराना अनिवार्य होगा। जैसे ही रिचार्ज समाप्त होगा, बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाएगी। इससे बिजली उपयोग पूरी तरह रिचार्ज आधारित हो जाएगा और भुगतान में देरी की गुंजाइश समाप्त हो जाएगी।



सात दिन की विशेष राहत सुविधा

प्री-पेड मीटर में एक विशेष स्विच की सुविधा भी दी जाएगी। यदि रिचार्ज खत्म हो जाता है, तो उपभोक्ता इस स्विच को दबाकर बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से दोबारा शुरू कर सकता है। हालांकि यह सुविधा केवल सात दिनों के लिए और सिर्फ एक बार ही उपलब्ध होगी। ऊर्जा सचिव रोहित यादव के अनुसार यदि सात दिनों के भीतर रिचार्ज नहीं कराया गया, तो बिजली कनेक्शन फिर से कट जाएगा। बिना न्यूनतम तीन महीने के रिचार्ज के दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा।



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बकाया राशि की चरणबद्ध कटौती

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बकाया बिजली बिल प्री-पेड रिचार्ज प्रणाली से वसूले जाएंगे। भविष्य में होने वाला रिचार्ज पुराने बकाए को समायोजित करेगा। इससे लंबित बिलों की वसूली सुनिश्चित होगी और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा।



प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में कदम

ऊर्जा विभाग का मानना है कि यह कदम केवल बकाया वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी तंत्र में जवाबदेही भी बढ़ेगी। प्री-पेड मॉडल लागू होने से बिजली खपत पर नियंत्रण रहेगा और विभागों को समय रहते रिचार्ज कराना होगा। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और एक अप्रैल से यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी।



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