छत्तीसगढ़ सरकार की शुगर मिल में अब घाटे की मिठास, मुंह मीठा कराने में 550 करोड़ की कंगाली

Arun Tiwari | Aug 01, 2025, 17:18 IST
Chhattisgarh government sugar mill is now in loss the sootr
सरकार की 4 सहकारी शक्कर कारखाने हैं जो 550 करोड़ से ज्यादा के नुकसान में हैं। इनको केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य पर गन्ना खरीदना पड़ता है और सस्ती दरों पर पीडीएस के लिए देना पड़ता है। अगर इन पर ताला लगा तो इसका सीधा असर किसानों और कमजोर तबकों पर पड़ेगा।

रायपुर : किसानों और गरीबों की जिंदगी में मिठास भरने के चक्कर में सरकार की शुगर मिलें कंगाल हो गई हैं। इन शुगर मिलों के सहकारी ढांचे में नफा की मिठास गायब हो गई है और घाटे की कड़वाहट घुल गई है। सरकार की 4 सहकारी शक्कर कारखाने हैं जो 550 करोड़ से ज्यादा के नुकसान में हैं।



इनको केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य पर गन्ना खरीदना पड़ता है और सस्ती दरों पर पीडीएस के लिए देना पड़ता है। अगर शक्कर कारखानों की सेहत खराब हुई तो इसका सीधा असर किसानों और कमजोर तबकों पर पड़ेगा। सरकार ने ये घाटा कम करने के लिए तकनीकी समिति बनाई है जिसमें दिल्ली और पुणे के एक्सपर्ट शामिल हैं। आइए आपको बताते हैं कि किस तरह मिठास में कड़वाहट बढ़ रही है।



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छत्तीसगढ़ की शक्कर में मिठास कम कड़वाहट ज्यादा

छत्तीसगढ़ की शक्कर में मिठास कम और कड़वाहट ज्यादा हो गई है। इसका सीधा कारण है सहकारी शक्कर कारखानों की खराब होती सेहत। छत्तीसगढ़ में सरकार के 4 शक्कर कारखाने हैं जो सहकारी सिस्टम से चलते हैं। धान के साथ ही गन्ने की पैदावार भी यहां अच्छी मात्रा में होती है।



ये गन्ना उत्पादक किसान इन्ही शक्कर कारखानों के भरोसे हैं। केंद्र सरकार समर्थन मूल्य तय करती जिसके तहत इन शुगर मिलों को गन्ना खरीदना पड़ता है। इसके अलावा कमजोर तबकों को पीडीएस में सस्ती दरों पर शक्कर भी दी जाती है। इस सस्ती दर की शक्कर की आपूर्ति भी यही शुगर मिल करती हैं। ऐसे में इन शुगर मिलों पर घाटा बढ़ता जा रहा है।



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सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक ये शुगर मिल 550 करोड़ से ज्यादा के घाटे में चल रही हैं। यदि इनकी यही हालत रही तो इन पर ताला लग जाएगा जिसका सीधा असर यहां के गन्ना उत्पादक किसानों पर पड़ेगा। सरकार को अब इसकी चिंता होने लगी है और यह घाटा कम करने के लिए एक तकनीकी समिति बनाई गई है।



शक्कर कारखानों की रोजाना इतने टन है पेराई क्षमता

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना,कवर्धा – 3500


सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया – 2500


मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना, अंबिकापुर – 2500


दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, बालोद – 1250



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इतने घाटे में है ये शक्कर कारखाने

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना,कवर्धा – 92.13 करोड़


सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया – 232.95 करोड़


मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना, अंबिकापुर – 125.70 करोड़


दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, बालोद – 114.89 करोड़



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घाटे से उबारने बनाई समिति

शुगर मिलों को घाटे से उबारने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं। भारी घाटे के चलते राज्य सरकार ने तकनीकी जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। तकनीकी जांच के लिए नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय सहकारी चीनी संघ और पुणे स्थित वसंत दादा शुगर इंस्टिट्यूट को अधिकृत किया गया है। इनकी रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार उनके सुझावों और सिफारिशों के आधार पर कदम उठाएगी। सरकार को डर है कि यदि घाटे के चलते इन शुगर मिलों पर ताला लग गया तो इसका सीधा असर किसानों और बीपीएल परिवारों पर पड़ेगा।



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