छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल- साल भर से सिर्फ बातें, कोलाहल एक्ट लागू कब होगा?
NEWS IN SHORT
- ध्वनि प्रदूषण को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा।
- कोर्ट ने पूछा एक साल से कोलाहल नियंत्रण एक्ट में संशोधन की बात हो रही है, लागू कब होगा?
- सरकार ने 16 मार्च को इस विषय पर जरूरी बैठक बुलाने की जानकारी दी।
- रायपुर की एक नागरिक समिति ने डीजे और साउंड सिस्टम से होने वाले शोर पर याचिका लगाई है।
- हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में तय की है।
NEWS IN DETAIL
ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त
छत्तीसगढ़ में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त सवाल किए हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सरकार पिछले एक साल से कोलाहल नियंत्रण एक्ट में संशोधन की बात कर रही है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सरकार से पूछा कि आखिर संशोधन की प्रक्रिया कब पूरी होगी।
सरकार ने 16 मार्च को बैठक बुलाने की दी जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव ने एक शपथपत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण और कोलाहल नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर 16 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ इस विषय पर आगे की कार्रवाई पर चर्चा की जाएगी।
नागरिक समिति ने दायर की है जनहित याचिका
रायपुर की एक नागरिक समिति ने डीजे और साउंड सिस्टम से होने वाले शोर प्रदूषण के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान कानून में सख्ती की कमी है। अभी केवल 500 से 1000 रुपए का जुर्माना लगाकर मामले को खत्म कर दिया जाता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
उपकरण जब्ती और कड़े नियमों की मांग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से कहा कि डीजे और साउंड सिस्टम के जरिए होने वाले शोर प्रदूषण को रोकने के लिए कड़े प्रावधान जरूरी हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में उपकरण जब्त करने और सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए, तभी ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
लेजर लाइट के प्रभाव पर भी चर्चा
शासन द्वारा पेश किए गए शपथपत्र में बताया गया कि फरवरी में इस विषय पर एक बैठक आयोजित की जा चुकी है। इसमें पुलिस मुख्यालय, आवास एवं पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विधि-विधायी विभाग, नगरीय प्रशासन और रायपुर मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी प्रोफेसर भी शामिल हुए थे।
बैठक में लेजर लाइट से होने वाले संभावित नुकसान पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि इसके दुष्प्रभावों पर अभी कोई स्पष्ट वैज्ञानिक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
साथ ही पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है जिससे लेजर लाइट की तीव्रता या उसके प्रभाव को मापा जा सके।
Knowledge
- ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारत में Noise Pollution Rules लागू हैं।
- निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि उत्पन्न करना कानूनन अपराध है।
- धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर के लिए प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है।
- रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे पर प्रतिबंध होता है।
- ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता, मानसिक तनाव और हृदय रोग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
आगे क्या
सरकार द्वारा 16 मार्च को होने वाली बैठक में कोलाहल नियंत्रण कानून में संशोधन और ध्वनि प्रदूषण रोकने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में हाईकोर्ट में होगी।
निष्कर्ष
ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते मामलों को देखते हुए हाईकोर्ट (CG High Court) ने सरकार से जवाबदेही तय करने की कोशिश की है। यदि कोलाहल नियंत्रण कानून में सख्त संशोधन किए जाते हैं तो इससे डीजे और साउंड सिस्टम से होने वाले शोर पर नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है।
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