टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में हुई थी नियुक्ति, अब संभाल रहे छत्तीसगढ़ की आर्थिक व्यवस्था
NEWS IN SHORT
- अयोग्य संभाल रहे छग की आर्थिक व्यवस्था
- करोड़ों के बिल नियमविरुद्ध कर रहे पास
- भाजपा सरकार में चुपके से दे दी गई पोस्टिंग
- बिना विभागीय परीक्षा बन गए लेखा अधिकारी
- टेंडर से लेकर करोड़ों का कर रहे भुगतान
- टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में हुई थी नियुक्ति
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में जिन अधिकारियों की टामन सोनवानी के कार्यकाल में नियुक्ति हुई थी, सरकार ने उन्हें ही छग की आर्थिक व्यवस्था सौंप दी है। प्रदेश में ऐसे 70 अधिकारी हैं, जो न केवल सरकार के बिलों की निरीक्षण कर रहें बल्कि टेंडर प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें। छग के टेंडरों में गड़बड़ी भी इनके योग्यता का एक नमूना है। बड़ी बात यह है कि यह सबकुछ उस सरकार के कार्यकाल में हो रहा , जांे विपक्ष में रहते मामले पर बड़ा आंदोलन करते थे।
बिना परीक्षा दे दी गई पोस्टिंग
टामन सिंह सोनवानी के छग पीएससी के अध्यक्ष रहते कई पदों पर नियुक्ति हुई थी। इसमें से एक पद लेखा अधिकारी और सहायक लेखा अधिकारी का था। साल 2021 से 2023 तक 70 अभ्यर्थी पीएससी क्वालिफाई कर लेखा अधिकारी बने। क्वॉलिफाई करने वालों को छत्तीसगढ़ के कोष एवं लेखा पेंशन विभाग भेज दिया गया। जहां इन्हें एक विभागीय परीक्षा पास करनी थी। परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को राज्य के अलग-अलग विभागों में पोस्टिंग दी जाती। लेकिन इसी में गड़बड़ी हुई है। इन अधिकारियों को बिना एक्जाम क्वालिफाई किए ही पोस्टिंग दे दी गई।
क्या होता है इनका काम?
लेखा अधिकारी और सहायक लेखा अधिकारी बेहद अहम जिम्मेदारी निभाते हैं। इन्हें कोष एवं लेखा पेंशन कार्यालय से अलग-अलग विभागों मे भेजा जाता हैं। जहां वित्त शाखा में इनका काम बिल का परीक्षण, खर्च की निगरानी करना है। इनकी विभागीय टेंडर प्रक्रियाओं मे अहम भूमिका होती है। इसके अलावा विभागीय बजट तैयार करने मे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते है। जिला कोषालय में भी इनकी नियुक्ति होती है जहां से कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन निकलता है।
करोड़ों के बिल पर इनकी मुहर
सरकारी खरीदी और टेंडर प्रक्रिया में इनकी भूमिका निर्णायक होती है। छोटी खरीद से लेकर करोड़ों के टेंडर तक ये शामिल होते हैं। किसी भी भुगतान से पहले इनकी जांच जरूरी होती है। भुगतान सबंधी फाइल इनके परीक्षण के बाद ही आगे बढ़ती है। यानी सरकारी खजाने की सुरक्षा इन पर निर्भर करती है।
नियम क्या कहते हैं?
प्रदेश में इन पदों पर नियुक्ति लोक सेवा आयोग के जरिए होती है। नियुक्ति के बाद इन अधिकारियों को एक विभागीय परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। इसी परीक्षा के आधार पर उन्हें पूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है। अलग-अलग विभागों में वित्त अधिकारी और सहायक वित्त अधिकारी बनाकर भेजा जाता है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और योग्यता सुनिश्चित करती है।
समय सीमा नहीं, फिर भी नियम साफ
नियम के अनुसार विभागीय परीक्षा पास करने की कोई तय समय सीमा नहीं है। पहले बिना परीक्षा पास किए अधिकारियों को अन्य विभागों में पोस्टिंग नहीं मिलती थी। वे कोष एवं लेखा विभाग में रहकर काम सीखते थे। हालोंकि वेतनमान के अनुसार उन्हें सैलरी मिलती थी, लेकिन बड़े वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाते थे।
अब बदला नियम, बढ़ा जोखिम
साल 2021 से 2024 के बीच यह ट्रेंड बदल गया। बिना परीक्षा पास किए ही अधिकारियों को पोस्टिंग दे दी गई। यानी अयोग्य अधिकारियों को वित्तीय अधिकार मिल गए। जानकार बता रहे हैं कि इससे वित्तीय अनुशासन पर सीधा खतरा पैदा हो गया है।
सिस्टम की बड़ी चूक या खेल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है? या फिर जानबूझकर नियमों को दरकिनार किया गया? क्योंकि सारी गड़बड़ी (recruitment irregularities) उस सरकार के कार्यकाल में हो रहा जिसने टामन सिंह सोनवाली के खिलाफ आंदोलन किया था। दावा किया था कि सरकार बनते एक-एक परीक्षा की जांच करवाएंगे। लेकिन सरकार बनने के बाद न केवल वादे भूल गए, बल्कि उन्हीं अधिकारियों को बड़ी-बड़ी जिम्मेदारी दे रहे हैं।
करोड़ों के गलत भुगतान पर खतरा
बिना प्रशिक्षित अधिकारी अगर बिलों की जांच करेंगे, तो जोखिम बढ़ेगा। गलत भुगतान हो सकता है। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका बढ़ती है। सरकारी धन के दुरुपयोग का खतरा भी साफ नजर आता है।
जांच की उठी मांग, सरकार पर बढ़ा दबाव
यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी ले सकता है। सोशल मीडिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या दोबारा परीक्षा कराई जाएगी? या पूरे मामले की जांच होगी? यह मामला सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल बन चुका है।
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