सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अनिल टुटेजा की याचिका, हाईकोर्ट जाने की सलाह
Raipur/Delhi. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित ₹2000 करोड़ के शराब घोटाले सहित अन्य मामलों में जांच का सामना कर रहे पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ भविष्य में किसी भी नए मामले में FIR दर्ज करने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि वह किसी भी जांच एजेंसी को पहले से रोक लगाने का आदेश नहीं दे सकते। कोर्ट के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की भूमिका किसी मामले में सामने आती है तो एजेंसियों को जांच और कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है।
अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत यह निर्देश नहीं दे सकती कि भविष्य में किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई नया केस दर्ज ही न हो। यह जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र का विषय है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि टुटेजा को किसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका है तो वे संबंधित अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
टुटेजा पक्ष का तर्क
टुटेजा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने अदालत में दलील दी कि वे पिछले करीब 20 महीनों से जेल में हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी मामले में उन्हें जमानत मिलती है, किसी दूसरे केस में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।
उनका आरोप था कि जांच एजेंसियां एक पैटर्न के तहत यह कार्रवाई कर रही हैं, जिससे उन्हें लगातार जेल में रखा जा सके।
ED ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि संभावित गिरफ्तारी को आधार बनाकर सभी एजेंसियों को नए केस दर्ज करने से रोकना संभव नहीं है।
हाईकोर्ट जाने की सलाह
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका बंद करते हुए टुटेजा (IAS Anil Tuteja) को सलाह दी कि जिन मामलों में उन्हें गिरफ्तारी का खतरा है, उनमें वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल कर सकते हैं।
साथ ही अदालत ने हाईकोर्ट से कहा कि इस तरह की याचिकाओं पर 2 से 4 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अनिल टुटेजा को नए मामलों में कानूनी राहत के लिए अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख करना होगा।