छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED का बड़ा दावा, कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे 880 करोड़ रुपए, पूर्व कोषाध्यक्ष की संपत्ति कुर्क
Umeshwari Baghel | Oct 12, 2026, 21:30 IST
राजीव भवन पहुंचे 880 करोड़ रुपए ED का खुलासा
RAIPUR। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नया दावा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, शराब घोटाले से जुटाई गई कथित अवैध कमाई में से 860 से 880 करोड़ रुपए कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन तक पहुंचाए गए थे। इस मामले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ईडी ने उनकी रायपुर स्थित दो अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया है। इनकी कुल कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपए बताई गई है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच कर रही ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। इसमें शराब घोटाले की कथित अवैध कमाई और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी दी गई है।
ईडी का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका शराब घोटाले से जुड़े पैसों के प्रबंधन में रही है। इसी जांच के तहत उनकी दो अचल संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई की गई है। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं। अदालत में इन आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
ईडी ने अपनी जांच में दावा किया है कि शराब घोटाले से मिली अवैध रकम को अलग-अलग लोगों के जरिए पहुंचाया जाता था। एजेंसी के मुताबिक, इस रकम को संभालने की जिम्मेदारी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के पास थी।
आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर नकदी कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन पहुंचाई जाती थी। वहां लेखापाल देवेंद्र डडसेना यह रकम प्राप्त करता था।ईडी का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए करीब 860 से 880 करोड़ रुपए राजीव भवन तक पहुंचाए गए। इनमें से लगभग 72 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में होने का आरोप है।
ईडी की जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2019 से 2023 के बीच शराब कारोबार में कथित तौर पर बड़ा घोटाला हुआ। एजेंसी का आरोप है कि एक शराब सिंडिकेट ने आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के कामकाज को प्रभावित किया।
इस नेटवर्क के जरिए 2,883 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, शराब की सप्लाई से लेकर बिक्री और लाइसेंस व्यवस्था तक में कथित गड़बड़ियां की गईं।
ईडी ने अपनी जांच में शराब कारोबार से अवैध रकम जुटाने के कई तरीके बताए हैं। देशी शराब की सप्लाई में कथित तौर पर कमीशन लिया जाता था। इसके अलावा नकली होलोग्राम का इस्तेमाल करके सरकारी दुकानों से बिना हिसाब-किताब के शराब बेचने का आरोप है।
जांच एजेंसी का दावा है कि डिस्टिलरी संचालकों से भी कमीशन वसूला गया। विदेशी शराब की बिक्री से जुड़ी एफएल-10ए लाइसेंस व्यवस्था में भी कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं। ईडी के मुताबिक, इन्हीं तरीकों से शराब कारोबार के जरिए बड़ी रकम जुटाई गई।
रामगोपाल अग्रवाल का नाम शराब घोटाले के अलावा छत्तीसगढ़ के कस्टम मिलिंग घोटाले में भी सामने आया है। ईडी ने उन्हें 9 अक्टूबर 2026 को कस्टम मिलिंग मामले में गिरफ्तार किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें मंगलवार तक एजेंसी की रिमांड पर भेजा गया है।
इस मामले में आरोप है कि राइस मिलर्स से प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले अवैध वसूली की गई। ईडी के मुताबिक, दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच करीब 147 करोड़ रुपए की कथित अवैध वसूली हुई थी। जांच एजेंसी दोनों मामलों में पैसों के लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।
शराब घोटाले में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। ईडी को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे। वहीं, आरोपित पक्ष को भी अपना बचाव रखने का अवसर मिलेगा।
फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि शराब घोटाले की कथित कमाई किन लोगों तक पहुंची और इस रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। राजीव भवन तक 880 करोड़ रुपए पहुंचने का दावा भी इसी जांच का हिस्सा है। इसकी न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।
FAQ
रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट पहुंची ED
ईडी का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका शराब घोटाले से जुड़े पैसों के प्रबंधन में रही है। इसी जांच के तहत उनकी दो अचल संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई की गई है। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं। अदालत में इन आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
राजीव भवन तक कैसे पहुंचे 880 करोड़ रुपए?
आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर नकदी कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन पहुंचाई जाती थी। वहां लेखापाल देवेंद्र डडसेना यह रकम प्राप्त करता था।ईडी का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए करीब 860 से 880 करोड़ रुपए राजीव भवन तक पहुंचाए गए। इनमें से लगभग 72 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में होने का आरोप है।
शराब घोटाले में 2,883 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का आरोप
इस नेटवर्क के जरिए 2,883 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, शराब की सप्लाई से लेकर बिक्री और लाइसेंस व्यवस्था तक में कथित गड़बड़ियां की गईं।
किन तरीकों से हुई शराब घोटाले में वसूली?
जांच एजेंसी का दावा है कि डिस्टिलरी संचालकों से भी कमीशन वसूला गया। विदेशी शराब की बिक्री से जुड़ी एफएल-10ए लाइसेंस व्यवस्था में भी कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं। ईडी के मुताबिक, इन्हीं तरीकों से शराब कारोबार के जरिए बड़ी रकम जुटाई गई।
कस्टम मिलिंग घोटाले में भी गिरफ्तार हैं अग्रवाल
इस मामले में आरोप है कि राइस मिलर्स से प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले अवैध वसूली की गई। ईडी के मुताबिक, दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच करीब 147 करोड़ रुपए की कथित अवैध वसूली हुई थी। जांच एजेंसी दोनों मामलों में पैसों के लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि शराब घोटाले की कथित कमाई किन लोगों तक पहुंची और इस रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। राजीव भवन तक 880 करोड़ रुपए पहुंचने का दावा भी इसी जांच का हिस्सा है। इसकी न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।
FAQ
- रामगोपाल अग्रवाल को किन कारणों से जांच का सामना करना पड़ रहा है?
रामगोपाल अग्रवाल को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में उनकी भूमिका के कारण ईडी द्वारा जांच का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उन पर कथित तौर पर अवैध कमाई के प्रबंधन का आरोप है। - ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल की किन संपत्तियों को कुर्क किया है?
ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल की रायपुर स्थित दो अचल संपत्तियों को कुर्क किया है, जिनकी कुल कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपए बताई गई है। - छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में कुल अवैध कमाई का अनुमान क्या है?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी का आरोप है कि 2019 से 2023 के बीच 2,883 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई हुई है।
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