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Impact Feature
Raipur.छत्तीसगढ़ में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है। खेतों में अब पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक मशीनें और नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की योजनाओं के जरिए किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंचाए जा रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि खेती आसान हुई है, लागत कम हुई है और उत्पादन बढ़ा है।
राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के जरिए किसानों को सरकारी अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम किसान भी नई तकनीक अपनाने में सक्षम हो रहे हैं। खेती में मशीनों के इस्तेमाल से समय की बचत हो रही है और मजदूरी पर खर्च कम हो रहा है। यही वजह है कि प्रदेश के किसान धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इन्हें मिला आधुनिक यंत्रों का फायदा
प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष के में 24 हजार 752 किसानों को अलग-अलग योजनाओं के जरिए आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ मिला है। इनमें यंत्रीकरण सबमिशन (कंपोनेंट-1) के तहत 912 किसानों को फायदा हुआ। वहीं, शाकंभरी योजना के तहत 3,375 किसान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (ड्रिप) के तहत 3,821 किसान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (स्प्रिंकलर) के तहत 16,644 किसान लाभांन्वित हुए हैं। यह संख्या बताती है कि राज्य में आधुनिक खेती तेजी से बढ़ रही है और किसान नई तकनीक को अपनाने लगे हैं।
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मशीनों से आसान हुई खेती
बीज निगम द्वारा किसानों को चैम्पस पोर्टल के जरिए खेती के अलग-अलग कामों के लिए मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन मशीनों में रोटावेटर, स्वचालित रीपर, पैडी ट्रांसप्लांटर, लेजर लैंड लेवलर, पावर वीडर, मल्चर, थ्रेशर, सीड ड्रिल, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम शामिल हैं। इन मशीनों के इस्तेमाल से जुताई, बुआई, रोपाई और कटाई जैसे काम पहले के मुकाबले काफी आसान हो गए हैं।
किसानों को सीधा फायदा
आधुनिक यंत्रों के इस्तेमाल से किसानों को कई तरह के फायदे मिल रहे हैं। खेती में लगने वाला समय कम हुआ हे। मजदूरी का खर्च कम हुआ है। उत्पादन क्षमता बढ़ी है। पानी का सही उपयोग हो रहा है। खेती ज्यादा मुनाफे वाली बन रही है। पहले जहां खेती में ज्यादा मेहनत और लागत लगती थी, अब मशीनों की मदद से कम खर्च में ज्यादा उत्पादन मिल रहा है।
बस्तर जैसे क्षेत्रों में भी दिख रहा बदलाव
प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों, खासकर बस्तर संभाग में भी किसान अब आधुनिक खेती अपना रहे हैं। पहले यहां ज्यादातर किसान धान की खेती पर निर्भर थे। अब सब्जी उत्पादन और उद्यानिकी फसलों की खेती भी बढ़ रही है। ड्रिप सिंचाई तकनीक की मदद से किसान कम पानी में अच्छी खेती कर पा रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि किसान स्थानीय बाजार के साथ दूसरे बाजारों में भी अपनी फसल बेच पा रहे हैं और ज्यादा कमाई कर रहे हैं।
किसानों के अनुभव से समझिए बदलाव
बिलासपुर जिले के किसान नारायण दल्लू पटेल के अनुसार, स्वचालित रीपर से एक एकड़ फसल की कटाई अब 2 से 3 घंटे में हो जाती है। पहले यही काम 10 से 12 मजदूरों के साथ पूरा दिन लेकर होता था। इससे कटाई की लागत में 50 से 60 प्रतिशत तक कमी आई है।
रायपुर जिले के किसान हीरालाल धनुराम साहू बताते हैं कि रोटावेटर से खेत कुछ ही घंटों में तैयार हो जाता है। पहले इस काम में 3 से 4 दिन लगते थे। इससे उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के किसान लेखूराम कैलाश छेदइया बताते हैं कि सीड ड्रिल से बोवनी करने पर बीज की 15 से 25 प्रतिशत तक बचत हुई है और उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
पानी की बचत और बेहतर सिंचाई
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम से पानी की बचत हो रही है। इससे उन इलाकों में भी खेती संभव हो रही है, जहां पानी की कमी रहती है। कम पानी में अच्छी फसल मिलने से किसानों की लागत घट रही है और फायदा बढ़ रहा है। आपको बता दें कि बीज निगम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर निगम इस दिशा में प्रभावी कदम उठा रहा है।
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