छत्तीसगढ़ में साय सरकार लाई जमीन की नई गाइडलाइन, किसानों से लेकर निवेशकों तक को फायदा

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए नई भूमि गाइडलाइन दरें लागू की हैं। यह फैसला राज्य की भू-व्यवस्था को पारदर्शी, न्यायपूर्ण और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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Raipur. छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़ी व्यवस्था लंबे समय तक उलझनों, असमानताओं और अव्यवस्था का शिकार रही। कहीं सरकारी दरें बेहद कम थीं, कहीं एक सड़क पर जमीन के अलग-अलग भाव थे तो कहीं किसानों को अपनी ही जमीन का पूरा मूल्य नहीं मिल पा रहा था। इसी को बदलने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए नई और संशोधित भूमि गाइडलाइन दरें लागू की हैं। यह फैसला केवल कागजों में बदलाव नहीं है, बल्कि प्रदेश की भू-व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा और दूरगामी कदम है।

सरकार का कहना है कि जमीन की कीमत केवल रजिस्ट्री तक सीमित विषय नहीं है। यह किसान की मेहनत, नागरिकों की पूंजी और प्रदेश के विकास से सीधे जुड़ा है। इसी सोच के साथ वर्षों से लंबित भूमि गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्मूल्यांकन किया गया और नई दरें लागू की गईं।

समझिए...गाइडलाइन दरें?

गाइडलाइन दर किसी भी जमीन का वह न्यूनतम सरकारी मूल्य होती है, जिसके आधार पर जमीन की रजिस्ट्री होती है। इसी दर से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क तय होता है। बैंक जमीन के इसी मूल्य को आधार बनाकर कर्ज देते हैं। जब सरकार किसी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहित करती है, तब मुआवजा भी इन्हीं दरों से जुड़ा होता है।

अगर ये दरें बाजार मूल्य से काफी कम हों तो नुकसान कई स्तर पर होता है। किसान को कम मुआवजा मिलता है। खरीदार-विक्रेता को सही वित्तीय मूल्य नहीं मिल पाता। बैंक लोन में अड़चन आती है और सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से यही स्थिति बनी हुई थी, जिसे साय सरकार ने अब बदला है। 

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पहले की व्यवस्था में थीं अड़चनें

भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले कई इलाकों में भूमि गाइडलाइन दरें पांच से छह साल तक अपडेट नहीं की गई थीं। नतीजा यह हुआ कि बाजार में जमीन के दाम तेजी से बढ़ते रहे, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में कीमतें जमी रहीं।

इसका असर साफ दिखता था कि एक ही सड़क पर स्थित दो भूखंडों की दरें अलग-अलग थीं। ग्रामीण इलाकों में किसानों को अधिग्रहण के समय अपेक्षाकृत बहुत कम मुआवजा मिलता था। रजिस्ट्री में कम मूल्य दिखाकर टैक्स बचाने की प्रवृत्ति बढ़ी। ईमानदार खरीदार और विक्रेता नुकसान में रहते थे। बैंकों से लोन लेने में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ये सभी समस्याएं धीरे-धीरे राज्य की विकास प्रक्रिया पर बोझ बन रही थीं।

अब साय सरकार का फैसला

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 से नई भूमि गाइडलाइन दरें लागू करने का निर्णय लिया। इसके पीछे सरकार के स्पष्ट उद्देश्य थे कि भूमि का वास्तविक और तर्कसंगत मूल्य तय हो। लेन-देन में पारदर्शिता आए। किसानों और भूमिधारकों को न्याय मिले। टैक्स चोरी और अनियमितताओं पर लगाम लगे। उद्योगों और निवेशकों के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद प्रणाली बने और राज्य के राजस्व को मजबूत कर विकास कार्यों को गति दी जाए। इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जल्दबाजी में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सर्वे, GIS आधारित मैपिंग और जिला स्तरीय समितियों की रिपोर्ट के आधार पर नई दरें तय की हें।  

नई गाइडलाइन दरों में क्या बदला?

1. वैज्ञानिक और तर्कसंगत मूल्यांकन
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मानदंड तय किए गए। मुख्य सड़कों, अंदरूनी इलाकों, व्यावसायिक और आवासीय भूखंडों का स्पष्ट वर्गीकरण किया गया। जहां पहले गाइडलाइन दरें बहुत कम थीं, वहां 100 से 150 प्रतिशत तक संशोधन किया गया, ताकि दरें वास्तविक बाजार मूल्य के करीब पहुंच सकें।

2. एक क्षेत्र, एक दर
अब एक ही सड़क, कॉलोनी या क्षेत्र में स्थित सभी भूखंडों पर समान गाइडलाइन दर लागू होगी। इससे पहले जो भेदभाव और भ्रम की स्थिति थी, वह खत्म हुई। साथ ही भ्रष्टाचार की संभावनाओं में भी कमी आई, क्योंकि अलग-अलग दरें तय करने की गुंजाइश समाप्त हो गई।

3. सरल बनाया सिस्टम 
सरकार ने कुछ श्रेणियों को हटाकर गाइडलाइन दरों की संरचना को सरल बनाया है। आम नागरिक अब आसानी से समझ सकते हैं कि उनकी जमीन की सरकारी कीमत क्या है। जानकारी हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हुआ है।

किसानों के लिए क्या बदला?

नई गाइडलाइन दरों से सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब ज्यादा न्यायपूर्ण हो गई है, क्योंकि मुआवजा वास्तविक बाजार मूल्य के करीब तय हो रहा है। जमीन बेचते समय दस्तावेजों में सही मूल्य दर्ज होने से भविष्य में विवाद की संभावना भी कम हुई है। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ी है। किसान अब यह महसूस कर रहे हैं कि जमीन के मूल्यांकन में उनके साथ न्याय हो रहा है। यही भरोसा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बुनियाद बन रहा है।

आम नागरिकों को सीधा फायदा

शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए भी यह बदलाव राहत लेकर आया है। बैंक लोन के लिए जमीन का मूल्यांकन अब ज्यादा यथार्थपरक हुआ है, जिससे ऋण प्राप्त करना आसान हो गया है। संपत्ति की खरीद-फरोख्त में नियम साफ हैं। कम दाम दिखाकर रजिस्ट्री कराने की पुरानी मानसिकता पर लगाम लगी है। इससे काले धन और अनियमितताओं में कमी आ रही है।

वहीं, नई व्यवस्था से कानूनी, कर और वित्तीय जोखिम कम हुए हैं। रियल एस्टेट बाजार में भरोसा बढ़ा है। लेन-देन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हुआ है, जिससे लंबे समय में बाजार स्थिर और मजबूत बन रहा है।

छत्तीसगढ़ के विकास पर असर

स्पष्ट और पारदर्शी गाइडलाइन दरों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। राज्य में नई टाउनशिप, हाउसिंग प्रोजेक्ट और कॉमर्शियल विकास को गति मिली है। निर्माण क्षेत्र मजबूत हुआ है और रोजगार के नए अवसर बने हैं।

भू-मूल्य स्पष्ट होने से औद्योगिक परियोजनाओं की योजना बनाना आसान हुआ है। भूमि अधिग्रहण और निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आने से उद्योगों के लिए छत्तीसगढ़ ज्यादा आकर्षक गंतव्य बन रहा है।

संपत्तियों के सही मूल्यांकन से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन से मिलने वाला राजस्व बढ़ा है। इस अतिरिक्त धन का उपयोग सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का विजन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि किसान और नागरिक की आर्थिक सुरक्षा है। उसका मूल्यांकन ईमानदार और न्यायपूर्ण होना चाहिए। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह साबित किया है कि सही नीयत और स्पष्ट नीति से बड़े सुधार संभव हैं।
छत्तीसगढ़ में लागू नई भूमि गाइडलाइन दरें पारदर्शिता और सुशासन की मजबूत मिसाल बनकर उभरी हैं। इनसे किसानों और आम नागरिकों के अधिकार सुरक्षित हुए हैं। निवेश, उद्योग और रियल एस्टेट को नई दिशा मिली है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है और विकास के नए अवसर खुले हैं।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भाजपा सरकार
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