धान खरीदी महापर्व से किसानों की मेहनत को मिला सम्मान, खेत से खाते तक भरोसे की सीधी राह
The Sootr | Dec 22, 2025, 11:10 IST
Impact Feature
धान खरीदी महापर्व 2025 ने किसानों को समय पर भुगतान और पारदर्शी प्रक्रिया से राहत दी। किसानों की मेहनत का उचित सम्मान मिलने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में गति आई।
Raipur. छत्तीसगढ़ की खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धड़कन माने जाने वाला 'धान खरीदी महापर्व' फिर प्रदेश के किसानों के लिए राहत, भरोसे और स्थिरता का सहारा बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने धान खरीदी महापर्व 2025 को पहले से अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान अनुकूल बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यही कारण है कि इस बार धान खरीदी गांव-गांव तक भरोसे का माहौल बनाती दिखाई दी।
धान खरीदी महापर्व का मतलब किसानों की सालभर की मेहनत का सम्मान है। खेतों में दिन-रात पसीना बहाने वाले किसान जब फसल लेकर खरीदी केंद्र पहुंचते हैं तो उन्हें यह भरोसा होता है कि उनकी उपज का सही दाम मिलेगा। भुगतान समय पर होगा। साय सरकार की यह व्यवस्था किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाती है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देती है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सिर्फ किसानों के जीवन से जुड़ा बड़ा अभियान बन चुकी है।
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देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर धान खरीदी की शुरुआत दशकों पहले हुई थी, पर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इस व्यवस्था को नई पहचान मिली है। यहां धान खरीदी को प्राथमिकता दी गई और समय के साथ यह प्रक्रिया धान खरीदी महापर्व के रूप में स्थापित हो गई। आज छत्तीसगढ़ पूरे देश में धान उत्पादन और खरीदी के लिए अलग पहचान रखता है। किसानों को यह भरोसा है कि सरकार उनकी उपज खरीदेगी और भुगतान में कोई अनिश्चितता नहीं रहेगी।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश में धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर 2025 से की गई है, जो 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। इस बार किसानों से धान 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। इस राशि में केंद्र सरकार का MSP और राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता शामिल है। बढ़ती खेती लागत, खाद-बीज और मजदूरी के खर्च के बीच यह दर किसानों के लिए राहत बनकर आई है। गांवों में किसान इसे अपनी मेहनत का उचित मूल्य मान रहे हैं।
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धान खरीदी महापर्व 2025 को सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में 2,739 धान खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। साथ ही ‘तुहर टोकन’ नाम की डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। इस सिस्टम के तहत किसान पहले से ऑनलाइन टोकन लेकर तय तारीख पर खरीदी केंद्र पहुंच रहे हैं। इससे लंबी कतारें, अव्यवस्था और बेवजह इंतजार जैसी समस्याएं काफी हद तक कम हुई हैं। किसान अब समय तय कर फसल बेच पा रहे हैं, जिससे उन्हें बार-बार केंद्र के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
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सरकारी आंकड़े बताते हैं कि धान खरीदी महापर्व 2025 का दायरा कितना बड़ा है। प्रदेश में 27.40 लाख किसान पंजीकृत हैं।लगभग 34.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई है। 87 लाख टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। इसके बदले 7,700 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाई गई है। सीधे खाते में भुगतान की यह व्यवस्था पारदर्शिता का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई है।
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छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साफ किया है कि किसानों को समय पर भुगतान और सुविधाजनक व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत सीमावर्ती जिलों में सख्त निगरानी रखी जा रही है, ताकि बाहरी राज्यों से अवैध धान की आवक रोकी जा सके। चेक-पोस्ट और निगरानी तंत्र को मजबूत किया है, जिससे वास्तविक किसानों को ही योजना का लाभ मिले।
इस तरह धान खरीदी महापर्व 2025 ने सिर्फ किसानों की जेब ही नहीं संभाली, बल्कि गांवों की पूरी अर्थव्यवस्था में गति लाई है। खरीदी के बाद मिलने वाली राशि से किसान कर्ज चुकाने, बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और खेती की अगली तैयारी कर पा रहे हैं। इससे गांवों में बाजार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं।
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धान खरीदी महापर्व का मतलब किसानों की सालभर की मेहनत का सम्मान है। खेतों में दिन-रात पसीना बहाने वाले किसान जब फसल लेकर खरीदी केंद्र पहुंचते हैं तो उन्हें यह भरोसा होता है कि उनकी उपज का सही दाम मिलेगा। भुगतान समय पर होगा। साय सरकार की यह व्यवस्था किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाती है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देती है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सिर्फ किसानों के जीवन से जुड़ा बड़ा अभियान बन चुकी है।
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छत्तीसगढ़ की पूरे देश में अलग पहचान
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31 जनवरी तक चलेगी खरीदी
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2,739 खरीदी केंद्र और ‘तुहर टोकन’
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आंकड़ों में दिखता असर
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मुख्यमंत्री साय की बड़ी पहल
इस तरह धान खरीदी महापर्व 2025 ने सिर्फ किसानों की जेब ही नहीं संभाली, बल्कि गांवों की पूरी अर्थव्यवस्था में गति लाई है। खरीदी के बाद मिलने वाली राशि से किसान कर्ज चुकाने, बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और खेती की अगली तैयारी कर पा रहे हैं। इससे गांवों में बाजार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं।
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