सीएम की समीक्षा में खुली पोल, बिना कार्रवाई ऑनलाइन शिकायतें बंद कर रहे थे PWD के 13 अधिकारी, अब नोटिस से मचा हड़कंप

VINAY VERMA | Oct 17, 2026, 18:00 IST
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पीडब्ल्यूडी के 13 अधिकारियों को नोटिस <br>
पीडब्ल्यूडी के 13 अधिकारियों को नोटिस

मुख्यमंत्री की समीक्षा में सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज शिकायतों के निराकरण में बड़ी लापरवाही सामने आई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी लोगों की समस्याएं दूर करने के बजाय ऑनलाइन शिकायतें बंद कर रहे थे। शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इसका सही ब्योरा तक दर्ज नहीं किया गया। मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है।

अब 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

13 अधिकारियों पर सवाल

कार्रवाई की जद में तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी आए हैं। इन सभी से पूछा गया है कि शिकायतों के निराकरण में लापरवाही क्यों बरती गई। अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर लोक निर्माण विभाग के सचिव को लिखित जवाब देना होगा। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।


ऑनलाइन सिस्टम का खेल

सीएम हेल्पलाइन का मकसद लोगों की शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाना और उनका समाधान कराना है। लेकिन जब अधिकारी बिना सही कार्रवाई और टीप के ही शिकायत बंद करने लगें, तो इस व्यवस्था का फायदा आम लोगों को कैसे मिलेगा? शिकायत पोर्टल पर बंद हो सकती है, लेकिन सड़क, निर्माण और दूसरी समस्याएं जमीन पर जस की तस रह सकती हैं। यही इस मामले का सबसे गंभीर पहलू है।

जबलपुर में 18 पटवारी निलंबित, 164 को नोटिस: काम में लापरवाही पर प्रशासन का बड़ा एक्शन | 18 Patwaris Suspended in Jabalpur, 164 Issued Notices: Big Action by Administration for Negligence in Work
जबलपुर में 17 पटवारी सस्पेंड, 164 को नोटिस, काम में लापरवाही पर प्रशासन का बड़ा एक्शन
09 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
मध्य प्रदेश के जबलपुर में जिला प्रशासन ने पटवारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। सरकारी काम में लापरवाही के आरोप में 17 पटवारी निलंबित किए गए हैं। वहीं, 164 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनसे काम में लापरवाही और सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करने पर जवाब मांगा गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के राजस्व विभाग में हलचल बढ़ गई है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में जिला प्रशासन ने पटवारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। सरकारी काम में लापरवाही के आरोप में 17 पटवारी निलंबित किए गए हैं। वहीं, 164 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनसे काम में लापरवाही और सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करने पर जवाब मांगा गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के राजस्व विभाग में हलचल बढ़ गई है।

समीक्षा में खुली लापरवाही

मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। विभागीय स्तर पर शिकायतों को बंद करने की औपचारिकता और वास्तविक समाधान के बीच अंतर सामने आया है। नोटिस जारी होने का मतलब है कि संबंधित अधिकारियों से उनकी भूमिका पर जवाब मांगा गया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी शिकायतें इस तरह बंद की गईं और उनसे कितने लोग प्रभावित हुए।


सिर्फ नोटिस से सुधरेगा सिस्टम?

कारण बताओ नोटिस जारी करना शुरुआती कदम है। लेकिन असली सवाल यह है कि शिकायतों की जांच कितनी गहराई से होगी। क्या बंद की गई शिकायतों को दोबारा खोलकर मौके पर जांच कराई जाएगी? क्या शिकायतकर्ताओं से पूछा जाएगा कि उनकी समस्या वास्तव में दूर हुई या नहीं? और क्या गलत जानकारी देकर शिकायत बंद करने वालों पर जवाबदेही तय होगी?

15 दिन में देना होगा जवाब

PWD के 13 अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर विभागीय सचिव को लिखित जवाब देना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अधिकारी अपनी लापरवाही पर क्या सफाई देते हैं और विभाग आगे क्या कदम उठाता है। फिलहाल, मुख्यमंत्री की समीक्षा में सामने आए इस मामले ने शिकायतों के ऑनलाइन निराकरण की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों के लिए अहम यह है कि उनकी शिकायत सिर्फ पोर्टल से गायब न हो, बल्कि समस्या का वास्तविक समाधान भी हो।


  1. किस कारण से 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है?
    13 अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिनमें तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।
  2. अधिकारियों को जवाब देने के लिए कितने दिन दिए गए हैं?
    अधिकारियों को लोक निर्माण विभाग के सचिव को 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब देना होगा।
  3. क्या शिकायतों की जांच के बाद समाधान की प्रक्रिया में बदलाव होगा?
    हाँ, यह पहले से तय नहीं है कि बंद की गई शिकायतों को फिर से खोला जाएगा या नहीं, लेकिन यह स्पष्ट है कि अधिकारियों की लापरवाही की जांच की जाएगी और उनकी जवाबदेही तय करने का प्रयास किया जाएगा।
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