स्मार्ट मीटर वापस लेने छत्तीसगढ़ में आंदोलन, 1 अगस्त से कांग्रेस का हल्ला बोल
बिजली के दाम कम करने और स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग को लेकर कांग्रेस बड़ा आंदोलन करने जा रही है। यह आंदोलन 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में शुरू होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बिजली के दाम की बढ़ोत्तरी वापस लेने तथा स्मार्ट मीटर वापस लेने और 400 यूनिट तक बिजली बिल हॉफ योजना को फिर से शुरू करने के लिए कांग्रेस आंदोलन करने जा रही है।
इस तरह होगा विरोध:
1 अगस्त को सभी जिलो में पत्रकार वार्ता लेकर बिजली के दाम बढ़ोत्तरी का विरोध किया जायेगा और बिजली के बढ़े दाम वापस लिये जाने की मांग की जायेगी।
2 अगस्त से कांग्रेस के कार्यकर्ता स्मार्ट मीटर के खिलाफ घर-घर से आवेदन भरवा कर स्मार्ट मीटर हटाने की मांग करेंगे। आम जनता से बिजली के दाम बढ़ाने के विरोध में विरोध पत्र भरवायेंगे, बिजली के दाम बढ़ोत्तरी को वापस लेने की मांग दो महीने तक करेंगे।
दो माह बाद जिलों में भरवाए गए फार्म को लेकर प्रदेश भर में हर जिले के बिजली दफ्तर का घेराव करेंगे और एकत्रित आवेदन जमा करायेंगे, पावती लेंगे।
सभी जिलों में फार्म भरवाने और जिले के बिजली दफ्तरों के घेराव के बाद प्राप्त पावती को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री जो कि बिजली मंत्री भी है उनके निवास का घेराव करेंगे।
2 साल में 5 बार बढ़े बिजली के रेट:
बीजेपी सरकार ने जुलाई से घरेलू उपभोक्ताओं के दाम में 30 से 50 पैसे और गैर घरेलू में 20 से 40 पैसे की बढ़ोत्तरी की है। कृषि के पंप की बिजली में भी 40 पैसे की बढ़ोत्तरी की गयी है।
बीजेपी सरकार बनने के बाद लगातार पांचवी बार बिजली के दाम बढ़ाये गये है। कांग्रेस ने कहा कि बिजली के बेतहाशा बिल जनता की परेशानी का कारण बने हुये है। हाल ही में सरकार ने बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईधन अधिभार (एमपीपीएस) के रूप में बढ़ोत्तरी की थी।
31 फीसदी बढ़ बिजली का टैरिफ:
कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी की सरकार आने के बाद अभी तक 31.23 प्रतिशत बिजली के दाम बढ़ाये गये है। कांग्रेस की सरकार ने 5 साल में केवल 2 पैसे की बढ़ोत्तरी बिजली के दामों में की थी।
उसमें भी 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना लागू थी। बीजेपी से सरकार नहीं संभल नही रही है। वह केवल जनता पर बोझ डालने का काम करती है।
बिल के नाम पर लूट:
400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना बंद करने के बाद पांच बार बिजली के दाम बढ़ाया जाना जनता पर बोझ है। सरकार का बिजली विभाग उपभोक्ताओं को बिल के नाम पर लूटने में लगा है। पिछले कुछ महीनों से बिजली के बिल तीन से चार गुना आ रहे है।
बिजली के खपत का अनुबंध भार क्षमता बिना उपभोक्ता की सहमति के बढ़ा दिया जा रहा है। जबकि उपभोक्ता की सहमति के बिना उसका अनुबंध भार नहीं बढ़ाया जा सकता।
स्मार्ट मीटर से बढ़ी खपत:
कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटर से खपत बढ़ा कर फिर खपत ज्यादा होने का हवाला देकर अनुबंध भार बढ़ा दिया जा रहा है और एग्रीमेंट से अधिक खपत की बात कर बढ़े अनुबंध भार के आधार पर अर्थदंड जोड़कर बिजली के बिल भेजे जा रहे है।
बिजली बिल ज्यादा आने के तीन कारण है। पहला सरकार ने बिजली के दाम बढ़ा दिए है। दूसरा बिजली बिल हाफ योजना बंद हो गई। तीसरा स्मार्ट मीटर लगाए गए है जो अनाप शनाप खपत से अधिक रीडिंग बता रहा जिससे बिल अधिक आ रहा।
अडानी की कंपनी के स्मार्ट मीटर लगाये गये है। संसद में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने अप्रैल 2026 में स्पष्ट किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर किसी भी उपभोक्ता पर जबरन नहीं थोपे जा रहे हैं, और यह पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था है और उपभोक्ताओं की सहमति या अनुमति के बिना सामान्य बिजली मीटर को स्मार्ट मीटर में बदलना गैर कानूनी है। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर जबरिया क्यों लगाया जा रहा है?
FAQ
- छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर का विरोध क्यों हो रहा है?
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और कुछ उपभोक्ता संगठन स्मार्ट मीटर का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि स्मार्ट मीटर से बिजली खपत अधिक दर्ज हो रही है, जिससे बिजली बिल बढ़ रहे हैं। साथ ही, कुछ मामलों में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाए जाने का भी दावा किया जा रहा है। - कांग्रेस की बिजली आंदोलन में प्रमुख मांगें क्या हैं?
कांग्रेस ने बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी वापस लेने, स्मार्ट मीटर हटाने और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना दोबारा लागू करने की मांग की है।
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