राहुल की ट्रेनिंग में मजदूरी करेंगे जिला अध्यक्ष, गांधीवादी तरीके से क्लास

Arun Tiwari | Jun 20, 2026, 14:48 IST
छत्तीसगढ़ में जिलाध्यक्षों की क्लास लेंगे राहुल गांधी 2026
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें 41 जिला अध्यक्ष शामिल होंगे। इसमें राहुल गांधी स्पेशल ट्रेनिंग देंगे।

Raipur. छत्तीसगढ़ में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और नेताओं को गांवों की वास्तविक परिस्थितियों से रूबरू कराने के लिए प्रदेश कांग्रेस ने अपने जिला अध्यक्षों के लिए 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया है। इस प्रशिक्षण में केवल बैठकों और व्याख्यानों तक सीमित रहने के बजाय जिला अध्यक्षों को सीधे गांवों में जाकर रहने, किसानों और मनरेगा श्रमिकों के साथ काम करने तथा ग्रामीणों की समस्याओं को समझने की जिम्मेदारी दी जाएगी। कांग्रेस इसे संगठन सृजन अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। राहुल गांधी इस क्लास को लेने वाले हैं।



41 जिला अध्यक्ष होंगे शामिल:

प्रदेश के 42 संगठनात्मक जिलों में से 41 जिलाध्यक्ष इस प्रशिक्षण में शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य नेताओं को गांवों की सामाजिक, आर्थिक और विकास संबंधी चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव कराना है, ताकि वे संगठन और जनता के बीच मजबूत संवाद स्थापित कर सकें। कांग्रेस का मानना है कि केवल राजनीतिक भाषणों और बैठकों से नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर उनके जीवन को समझने से प्रभावी नेतृत्व तैयार होता है। यह शिविर 29 जून तक चलेगा। 21 जून को इसमें राहुल गांधी शामिल होंगे।



गांव में बिताएंगे एक दिन और एक रात:

प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक टीम को प्रदेश के किसी गांव का चयन किया जाएगा। जिला अध्यक्ष वहां एक दिन और एक रात बिताएंगे। इस दौरान वे ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाएंगे, गांव की समस्याओं पर चर्चा करेंगे और सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे।



गांव में रहने के दौरान जिला अध्यक्ष यह समझने का प्रयास करेंगे कि ग्रामीणों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें किस हद तक मिल रहा है और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है। चौपाल के माध्यम से वे लोगों की शिकायतें और सुझाव भी सुनेंगे।



मनरेगा श्रमिकों और किसानों के साथ करेंगे काम:

प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा फील्ड विजिट को माना जा रहा है। जिला अध्यक्षों को मनरेगा कार्यस्थलों पर जाकर श्रमिकों के साथ काम करना होगा। यदि किसी क्षेत्र में मनरेगा का कार्य संचालित नहीं हो रहा होगा तो उन्हें किसानों के साथ खेतों में जाकर कृषि कार्यों में हिस्सा लेना पड़ेगा।



कांग्रेस का मानना है कि श्रमिकों और किसानों के साथ समय बिताने से नेताओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर समझने का अवसर मिलेगा। इससे वे आम लोगों की समस्याओं और अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से जान सकेंगे तथा भविष्य की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति तैयार करने में इन अनुभवों का उपयोग कर सकेंगे।



गांधीवादी अनुशासन पर विशेष जोर:

पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम को गांधीवादी सोच और अनुशासन के आधार पर तैयार किया गया है। जिला अध्यक्षों को सुबह जल्दी उठने, योग और अन्य शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता से जुड़े कार्य भी करने होंगे।



भोजन की व्यवस्था से लेकर भोजन के बाद अपनी थाली साफ करने तक की जिम्मेदारी स्वयं प्रतिभागियों की होगी। प्रशिक्षण के दौरान सादगी, अनुशासन और सामूहिक जीवन शैली को बढ़ावा दिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि संगठनात्मक मजबूती के लिए नेताओं में सेवा भाव और आत्मअनुशासन का होना आवश्यक है।



आठ टीमों में बांटे जाएंगे जिलाध्यक्ष:

प्रशिक्षण के लिए जिला अध्यक्षों को आठ अलग-अलग टीमों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक टीम में पांच सदस्य होंगे। सभी टीमें अलग-अलग गांवों का दौरा करेंगी और वहां के अनुभवों को साझा करेंगी।



फील्ड विजिट के बाद जिला अध्यक्ष अपने अनुभवों, अवलोकनों और सुझावों को संगठन के सामने प्रस्तुत करेंगे। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर भविष्य की संगठनात्मक रणनीति, जनसंपर्क अभियान और राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।



नेतृत्व क्षमता का होगा आकलन:

छत्तीसगढ़ कांग्रेस इस प्रशिक्षण को केवल अध्ययन कार्यक्रम नहीं बल्कि नेतृत्व क्षमता की परीक्षा भी मान रही है। गांवों में रहने, श्रमिकों के साथ काम करने, चौपाल आयोजित करने और स्थानीय समस्याओं को समझने की प्रक्रिया के दौरान जिला अध्यक्षों की कार्यशैली, जनसंपर्क क्षमता और संगठनात्मक कौशल का मूल्यांकन किया जाएगा।



पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जमीनी अनुभवों से निकले निष्कर्ष संगठन को नई दिशा देंगे। ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर संगठन विस्तार, जनसमस्याओं के समाधान और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस का दावा है कि यह प्रयोग नेताओं को जनता के और करीब लाने के साथ-साथ संगठन को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।



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