कोनोकार्पस पेड़ पर सरकार का बड़ा एक्शन... अब नर्सरी से लेकर निगम तक सब पर नजर

VINAY VERMA | Jul 08, 2026, 15:07 IST
छत्तीसगढ़ में कोनोकार्पस पेड़ बैन 2026
छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए विदेशी प्रजाति के कोनोकार्पस पौधे के नए रोपण पर रोक लगा दी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश में कोनोकार्पस प्रजाति का नया पौधा नहीं लगाया जाएगा। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर इस विदेशी पौधे के रोपण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।



सरकार का कहना है कि यह पौधा पर्यावरण, भूजल और जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसलिए अब किसी भी सरकारी विभाग, नगर निगम, पंचायत, संस्था या निजी व्यक्ति को इसका नया पौधा लगाने की अनुमति नहीं होगी।



सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट बनी वजह

इस फैसले के पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित केंद्रीय सशक्त समिति की रिपोर्ट है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कोनोकार्पस को आक्रामक विदेशी प्रजाति बताया था।



रिपोर्ट में कहा गया कि यह पौधा स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाता है। प्राकृतिक पारिस्थितिकी का संतुलन बिगाड़ता है। इसी रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया।



चार बड़े खतरे... इसलिए लगा बैन

सरकार का कहना है कि कोनोकार्पस की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक जाती हैं। इससे भूजल का तेजी से दोहन होता है। यह स्थानीय पेड़-पौधों की बढ़त रोकता है। इसके परागकण सांस, दमा और एलर्जी जैसी समस्याएं भी बढ़ा सकते हैं।



यही वजह है कि इसे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए जोखिम माना गया है। अब शहरों में इसकी जगह देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी।



पुराने पौधे भी हटेंगे

सरकार ने सिर्फ नए पौधों पर रोक नहीं लगाई है। जहां पहले से कोनोकार्पस लगे हैं, उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी है। उनकी जगह नीम, पीपल, बरगद, करंज, अमलतास और दूसरी देशी प्रजातियां लगाई जाएंगी।



इससे स्थानीय पारिस्थितिकी को मजबूत करने की कोशिश होगी। नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को भी इसी दिशा में काम करना होगा।



अब बहाना नहीं चलेगा

सरकार ने साफ कर दिया है कि मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए आपत्तियां मांगने की सामान्य प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। यानी फैसला सीधे लागू कर दिया गया।



अब अगर कोई नर्सरी, संस्था या विभाग प्रतिबंध के बावजूद कोनोकार्पस का रोपण करता है तो उसके खिलाफ पर्यावरण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।



शहरों की हरियाली का बदलेगा चेहरा

अब तक सड़क डिवाइडर, पार्क और सरकारी परिसरों में तेजी से बढ़ने वाले कोनोकार्पस का खूब इस्तेमाल होता था। सरकार के इस फैसले के बाद शहरी हरियाली का पूरा मॉडल बदलने वाला है। अब जोर स्थानीय और पर्यावरण के अनुकूल पौधों पर रहेगा।



सरकार का मानना है कि अब देशी प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा और पुराने पौधों को भी चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी है। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश की जैव विविधता, भूजल और पर्यावरण संरक्षण को बड़ा फायदा मिलेगा।



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