हाथियों की मौत पर घिरी CSPDCL, हाईकोर्ट में झूठे ब्यौरे देने के आरोप
छत्तीसगढ़ में हाथियों की लगातार हो रही मौतों के पीछे बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने हाथी प्रभावित इलाकों में बिजली लाइनों को सुरक्षित बनाने के निर्देशों का पालन नहीं किया। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट में भी वास्तविक स्थिति छिपाकर झूठे ब्यौरे पेश किए जा रहे हैं। रायगढ़ और धरमजयगढ़ वनमंडलों में 100 से ज्यादा खतरनाक बिजली प्वाइंट अब भी हादसों को न्योता दे रहे हैं।
100 से ज्यादा 'डेथ पॉइंट', नहीं हुई कार्रवाई
संयुक्त सर्वे में रायगढ़ वनमंडल के 51 और धरमजयगढ़ वनमंडल के 58 लूज प्वाइंट चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों पर बिजली लाइनें इतनी नीचे हैं कि हाथियों के संपर्क में आने का खतरा लगातार बना हुआ है। नियमों के मुताबिक हाथी के सूंड उठाने की अधिकतम ऊंचाई से ऊपर बिजली लाइन होनी चाहिए, लेकिन कई जगह इसका पालन नहीं किया गया। आशंका है कि विस्तृत जांच में ऐसे पॉइंट्स की संख्या और बढ़ सकती है।
3 की मौत के बाद भी नहीं जागा विभाग
घरघोड़ा के चुहकीमार नर्सरी क्षेत्र में 11 केवी लाइन की चपेट में आकर तीन हाथियों की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया था। अदालत ने वन विभाग और CSPDCL को मिलकर हाथी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली लाइनों को सुरक्षित करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद जमीन पर सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
33 केवी लाइन में भी तोड़े गए सुरक्षा नियम
धनवादा पावर परियोजना के लिए बिछाई गई 33 केवी लाइन पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद बिना आवश्यक अनुमति के पुरानी 11 केवी लाइन के खंभों का इस्तेमाल कर नई लाइन खड़ी कर दी गई। न केबल कवर्ड है और न ही अंडरग्राउंड। यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है तो जिम्मेदारी सीधे CSPDCL अधिकारियों पर तय हो सकती है।
CEA के आदेश भी हुए बेअसर
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) ने 8 जून 2023 की अधिसूचना में स्पष्ट किया था कि संरक्षित वन क्षेत्रों से गुजरने वाली 33 केवी या उससे कम क्षमता की बिजली लाइनों में अंडरग्राउंड केबल को प्राथमिकता दी जाए। इसके पालन के लिए ऊर्जा विभाग ने 23 फरवरी 2024 को CSPDCL को पत्र भी भेजा था। लेकिन रायगढ़ क्षेत्र में इन निर्देशों के पालन के कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
हाईकोर्ट में खुली दोनों विभागों की पोल
छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत के मामलों को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वन विभाग और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। अदालत में सामने आया कि जिन खतरनाक स्थानों की पहचान हो चुकी है, वहां अब तक सुधार नहीं किया गया। सवाल यही है कि जब खतरे की पूरी जानकारी थी, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही लापरवाही अब हाथियों की जान पर भारी पड़ रही है और विभाग की जवाबदेही कठघरे में खड़ी है।
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