सीएसवीटीयू का बड़ा फैसला : छत्तीसगढ़ में बंद होंगे 3 इंजीनियरिंग कॉलेज
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में तीन इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होने जा रहे हैं।
इससे राज्य में इंजीनियरिंग की 1000 सीटें कम हो जाएंगी।
तकनीकी विश्वविद्यालय सीएसवीटीयू ने इस फैसले को मंजूरी दी है।
तीन पॉलिटेक्निक संस्थानों में भी नया प्रवेश रोक दिया गया है।
इस बड़े फैसले से तकनीकी शिक्षा का दायरा सिमट गया है।
इंजीनियरिंग सीटों में बड़ी कटौती
छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा लेने वाले छात्रों को बड़ा झटका लगा है। राज्य में तीन बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होने जा रहे हैं। इसके कारण राज्य में इंजीनियरिंग की सीटें काफी कम हो जाएंगी। इस साल करीब एक हजार सीटें घट जाएंगी। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ने इसे मंजूरी दी है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने प्रोग्रेसिव क्लोजर का फैसला लिया है।
तकनीकी शिक्षा का दायरा राज्य में लगातार सिमट रहा है। एक दशक पहले राज्य में 38 इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित होते थे। अब इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। कॉलेजों की संख्या घटने से छात्र काफी परेशान हैं। नए शैक्षणिक सत्र से यह बड़ा बदलाव लागू हो जाएगा।
बंद होने वाले कॉलेजों के नाम
विश्वविद्यालय ने जिन कॉलेजों को बंद करने की मंजूरी दी है, उनके नाम सामने आए हैं। इसमें छत्तीसगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज धनोरा दुर्ग शामिल है। इसके अलावा कोलंबिया इंस्टीट्यूट रायपुर को भी बंद किया जाएगा। कृष्णा विकास इंजीनियरिंग कॉलेज रायपुर भी इस सूची में शामिल है। ये तीनों कॉलेज अब नए सत्र से बंद हो जाएंगे।
इन संस्थानों ने खुद ही सीट शून्य करने का आवेदन दिया था। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया है। अब ये कॉलेज डीटीई (DTE - Directorate of Technical Education) की काउंसलिंग में शामिल नहीं होंगे। प्रथम वर्ष में नए छात्रों को प्रवेश नहीं मिल सकेगा।
निजी यूनिवर्सिटी बनने की संभावना
इन बंद होने वाले कॉलेजों को लेकर एक और बड़ी खबर है। इनमें से दो संस्थानों के निजी विश्वविद्यालय बनने की संभावना है। ये संस्थान अब नए रूप में सामने आ सकते हैं। हालांकि इस सत्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई यहाँ नहीं होगी। इससे सीटों का गणित पूरी तरह बदल गया है।
इसके साथ ही राजनांदगांव के योगांतर इंजीनियरिंग कॉलेज पर भी बड़ा फैसला हुआ है। कार्यपरिषद ने इस कॉलेज को पूर्ण रूप से बंद करने की मंजूरी दी है। यहाँ पढ़ रहे छात्रों के भविष्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
छात्रों के लिए विशेष काउंसलिंग
योगांतर कॉलेज के छात्रों को दूसरे कॉलेजों में भेजा जाएगा। सीएसवीटीयू (CSVTU - Chhattisgarh Swami Vivekananda Technical University) की निगरानी में यह काम पूरा होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय विशेष काउंसलिंग आयोजित करेगा। छात्रों को सुरक्षित तरीके से अन्य संस्थानों में स्थानांतरित किया जा कर पढ़ाई पूरी कराई जाएगी।
डीटीई की काउंसलिंग प्रक्रिया हर साल आयोजित की जाती है। इसमें राज्य के सभी मान्यता प्राप्त कॉलेज हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार तीन बड़े संस्थान इस प्रक्रिया से बाहर रहेंगे। इससे छात्रों के पास प्रवेश के लिए विकल्पों की कमी हो जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुराने छात्रों को डरने की जरूरत नहीं है। जिन छात्रों का कोर्स चल रहा है, वे अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे। प्रोग्रेसिव क्लोजर का मतलब केवल नए एडमिशन रोकना होता है। पुराने छात्रों की कक्षाएं और परीक्षाएं नियम के अनुसार चलती रहेंगी।
पॉलिटेक्निक कॉलेजों में कमियां
निरीक्षण के दौरान तीन पॉलिटेक्निक कॉलेजों में गंभीर कमियां मिली हैं। इसमें अहिवारा का आईबीटी पॉलिटेक्निक शामिल है। मनसा पॉलिटेक्निक में भी गंभीर खामियां पाई गई हैं। मेदुका स्थित आयुष पॉलिटेक्निक भी जांच के दायरे में आया है।
जांच टीम को इन संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी मिली। प्रयोगशालाओं का भी इन कॉलेजों में पूरी तरह अभाव था। निरीक्षण टीम को कुल 33 से अधिक गंभीर कमियां मिलीं। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है।
पॉलिटेक्निक में जीरो इनटेक
इन तीनों पॉलिटेक्निक संस्थानों को इस वर्ष जीरो इनटेक कर दिया गया है। इसका मतलब है कि ये संस्थान नए छात्रों को प्रवेश नहीं दे सकेंगे। विश्वविद्यालय ने इन्हें एक साल का समय दिया है। इन्हें एक वर्ष के भीतर सभी कमियां दूर करनी होंगी।
कमियां दूर करने के बाद ये संस्थान दोबारा आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद ही इन्हें नए प्रवेश की अनुमति मिल पाएगी। इस फैसले से तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। बिना संसाधनों के कॉलेज चलाना मुश्किल होगा।
कोर्सों को लेकर बड़ा बदलाव
कार्यपरिषद की बैठक में कुछ कोर्सों को लेकर भी निर्णय हुए हैं। यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट में संचालित डिप्लोमा इन फायर सेफ्टी जारी रहेगा। इस कोर्स को बंद नहीं किया जा रहा है। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के साथ एमओयू (MoU - Memorandum of Understanding) की तैयारी है।
दूसरी ओर डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग को मंजूरी नहीं मिल सकी। संसाधनों की कमी के कारण यह कोर्स इस सत्र से बंद हो जाएगा। छात्र अब इस कोर्स में प्रवेश नहीं ले पाएंगे। विश्वविद्यालय की टीम लगातार कॉलेजों का निरीक्षण कर रही है।
जिन कॉलेजों में मापदंड पूरे नहीं हैं, उन पर कार्रवाई हो रही है। छात्रों के भविष्य और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए यह जरूरी है। लापरवाही बरतने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ के तकनीकी कॉलेजों को संबद्धता देने वाले मुख्य विश्वविद्यालय का नाम क्या है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU)। यह भिलाई में स्थित है और राज्य के तकनीकी संस्थानों की निगरानी करता है। - छत्तीसगढ़ में तकनीकी प्रवेश और काउंसलिंग प्रक्रिया का संचालन कौन सा विभाग करता है?
उत्तर: तकनीकी शिक्षा निदेशालय (DTE - Directorate of Technical Education)। यही विभाग हर साल इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक की काउंसलिंग कराता है। - सीएसवीटीयू (CSVTU) के वर्तमान कुलपति कौन हैं, जिन्होंने हाल ही में कॉलेजों पर कार्रवाई की घोषणा की है?
उत्तर: डॉ. अरुण अरोरा। वे वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यरत हैं।
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