एकतरफा प्यार में महिला के मासूम बेटे को जिंदा जलाया , मौत की सजा

Marut raj | Nov 28, 2024, 19:33 IST
Death sentence to the accused of murder of a girl in Raipur the sootr
रायपुर में 46 साल बाद किसी दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। पहली बार 25 अक्टूबर 1978 को रायपुर सेंट्रल जेल में बैजू नामक कैदी को फांसी दी गई थी।

एकतरफा प्यार में महिला के चार साल के बच्चे को जिंदा जलाने वाले को फांसी की सजा दी जाएगी। रायपुर जिले के उरला इलाके में अप्रैल 2022 की सुबह मासूम पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई थी। दोषी पंचराम को कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। पुलिस को जांच में पता चला था कि वारदात को अंजाम देने वाला पंचराम बच्चे की मां से प्यार करता था।



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महिला के परिवार से घुलामिला था

उरला इलाके से 5 अप्रैल 2022 की सुबह हर्ष नाम के 4 साल के बच्चे का किडनैप हुआ था। पड़ोस में रहने वाले पंचराम ने उसे किडनैप किया था। बच्चे के पिता जयेंद्र, उरला इलाके में पूर्व पार्षद अशोक बघेल के मकान में किराए से रहते हैं।



आरोपी पंचराम भी वहीं किराएदार था। वो अपनी मां के साथ यहां अकेला रहता था। कुछ साल पहले उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। पंचराम, जयेंद्र के बच्चों के साथ घुला मिला था। मासूम हर्ष को अक्सर अपनी बाइक पर घुमाया करता था। इसी भरोसे की वजह से जब हर्ष को पंचराम लेकर गया तो किसी ने रोका नहीं।



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श्मशान में जिंदा जलाया

देर शाम तक बच्चा और पंचराम नहीं लौटा तो मामला थाने पहुंचा। हर्ष को ढूंढने के दौरान, पुलिस को उसकी जली हुई लाश मिली है। उसे पंचराम ने बेमेतरा ले जाकर श्मशान में जिंदा जला दिया था। पुलिस ने पंचराम को नाकपुर से पकड़ लिया।



पुलिस ने पंचराम को पकड़ा तो बच्चे की हत्या और उसकी मां से प्यार की बातें सामने आईं। पता चला कि, दोषी पंचराम बच्चे की मां से एक तरफा प्यार करता था। हर्ष की मां उससे बातचीत भी नहीं करती थी। बच्चे की मां को सबक सिखाने के लिए उसने बच्चे को मार दिया।



रायपुर में 46 साल बाद फांसी की सजा

कोर्ट की ओर से वारदात के ढाई साल के अंदर फांसी की सजा का फैसला सुनाया गया है। रायपुर में 46 साल बाद किसी दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। पहली बार 25 अक्टूबर 1978 को रायपुर सेंट्रल जेल में बैजू नामक कैदी को फांसी दी गई थी। बैजू पर आरोप था कि उसने 2 हजार रुपए के लिए चार लोगों को मार डाला।



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