नौकरी नहीं दी तो हथियार उठाकर नक्सली बनेंगे, 6 महीने से अनशन पर बैठे डीएड अभ्यर्थियों का दर्द

Arun Tiwari | Jun 04, 2026, 17:42 IST
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सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले छह महीने से नया रायपुर के धरना स्थल पर अनशन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

Raipur. छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवा अब हथियार उठाने की बात करने लगे हैं। दिसंबर से अनशन पर बैठे इन डीएड अभ्यर्थियों की सुध सरकार नहीं ले रही है। वे कहते हैं कि अदालत के आदेश के बाद भी सरकार खाली पड़े 2300 पदों पर उनको नियुक्ति नहीं दे रही है। छह महीने से अनशन पर बैठे ये लोग अंगारों पर चल चुके हैं, घुटनों के बल रेंग चुके हैं, जल समाधि की कोशिश कर चुके हैं। अनशन कर अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं फिर भी सरकार इनकी सुध नहीं ले रही है। अब तो यह युवा कहने लगे हैँ कि उनको कलम नहीं दी तो वे हथियार उठाकर नक्सली बन जाएंगे।



छह महीने से अनशन पर बेरोजगार युवा :

छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की मांग को लेकर पिछले छह महीने से आंदोलन कर रहे डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। लंबे समय से धरना-प्रदर्शन और अनशन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्हें रोजगार नहीं मिला तो वे मजबूरी में गलत रास्ता अपनाने को विवश हो सकते हैं। आंदोलनकारियों के कुछ बयानों में हथियार उठाने और नक्सली बनने जैसी बातें भी सामने आई हैं, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।



कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली नौकरी :

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। नया रायपुर के तूता धरनास्थल पर पिछले कई महीनों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि पात्र अभ्यर्थियों को नौकरी देने में शिक्षा विभाग की लापरवाही सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।



अभ्यर्थियों के मुताबिक, बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 को दिए गए आदेशों में स्पष्ट रूप से कहा था कि बर्खास्त किए गए 2621 बीएड सहायक शिक्षकों के स्थान पर डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को नियुक्त किया जाए। इसके अलावा 28 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद आज तक बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी है।



1326 लोग नौकरी के इंतजार में :

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि न्यायालय के आदेशों के अनुरूप 2621 पदों पर भर्ती की जानी थी, लेकिन अब भी 1326 पात्र डीएड अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हैं। उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान गंभीर प्रशासनिक गड़बड़ी कीं जिसका खामियाजा योग्य उम्मीदवारों को भुगतना पड़ रहा है।



अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग ने कॉमन मेरिट सूची के आधार पर स्कूल आवंटन तो कर दिया, लेकिन उससे पहले दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराया गया। इसके कारण बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को भी स्कूल आवंटित कर दिए गए, जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते थे। इनमें डीएड या टीईटी प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले तथा आयु सीमा से बाहर उम्मीदवार भी शामिल बताए जा रहे हैं।



खाली पड़े हैं पद :

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का दावा है कि इस प्रक्रिया के कारण केवल 1299 योग्य अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति मिल पाई, जबकि शेष पद आज भी रिक्त पड़े हैं। उनका कहना है कि यदि शुरू से नियमों के अनुरूप दस्तावेज सत्यापन किया जाता तो सभी पात्र उम्मीदवारों को नौकरी मिल सकती थी। डीएड अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि न्यायालय के आदेशों का तत्काल पालन करते हुए रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि वे किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अदालत के आदेश के अनुरूप अपना वैधानिक अधिकार चाहते हैं।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थी आंदोलन क्यों कर रहे हैं?
    डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद उन्हें सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं दी जा रही है। इसी मांग को लेकर वे पिछले छह महीने से आंदोलन कर रहे हैं।
  2. छत्तीसगढ़ में डीएड के कितने पदों पर भर्ती होनी थी?
    अभ्यर्थियों का दावा है कि न्यायालय के आदेशों के अनुसार 2621 पदों पर भर्ती की जानी थी, लेकिन बड़ी संख्या में पात्र उम्मीदवार अब भी नियुक्ति से वंचित हैं।
  3. छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थियों ने क्या आरोप लगाया है?
    अभ्यर्थियों का आरोप है कि दस्तावेज सत्यापन से पहले स्कूल आवंटन किया गया, जिससे अपात्र उम्मीदवारों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया और कई पात्र उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित रह गए।

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