धमतरी पुलिस कस्टडी में मौत मामला: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ठहराया जिम्मेदार, देना होगा मुआवजा

Harrison Masih | Oct 09, 2025, 14:24 IST
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धमतरी जिले में पुलिस हिरासत में हुई रहस्यमय मौत ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया है। सिर्फ तीन घंटे की कस्टडी में युवक की जान चली गई, और शरीर पर मिले 24 जख्मों ने पुलिस की क्रूरता का राज खोला।

Dhamtari. धमतरी जिले में पुलिस हिरासत में हुई मौत ने कानून और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्च 2025 की यह घटना तब हुई जब धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार दुर्गेंद्र कठोलिया (41 वर्ष) की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मृतक के परिवार को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।



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घटना का विवरण

दुर्गेंद्र कठोलिया को 29 मार्च 2025 को धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया। 31 मार्च को शाम 5 बजे वह पूरी तरह स्वस्थ होकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए, लेकिन तीन घंटे बाद रात 8 बजे पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई। पीएम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर 24 चोटों के निशान दर्ज हैं। चोटें हाथ, छाती, जांघ, घुटनों, चेहरे और नाक पर थीं। मेडिकल बोर्ड ने मौत का कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट और दम घुटने से मौत बताया।



Dhamtari Police Custody Death Case


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पुलिस की प्रतिक्रिया और राज्य सरकार का दावा:

पुलिस ने परिजनों को यह कहकर गुमराह किया कि दुर्गेंद्र कठोलिया अचानक बीमार हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन कुछ ही देर बाद परिवार को पता चला कि उनकी मौत पहले ही हो चुकी थी। जब शव मिला तो उस पर चोटों के गहरे निशान देखकर परिजन स्तब्ध रह गए। राज्य सरकार ने अपनी दलील में मौत को प्राकृतिक बताया और कहा कि शरीर पर मिली चोटें साधारण और पुरानी थीं, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस तर्क को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में तीन घंटे के भीतर हुई मौत सामान्य नहीं हो सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में राज्य किसी भी तरह से अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।



हाईकोर्ट का फैसला

चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने कहा कि यह घटना पुलिस की बर्बरता और हिरासत में ज्यादती का परिणाम है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हनन है। कोर्ट ने इसे कस्टोडियल बर्बरता का उदाहरण बताया।



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धमतरी पुलिस कस्टडी में मौत केस को ऐसे समझें:

  1. तीन घंटे में मौत का रहस्य:
    धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार 41 वर्षीय दुर्गेंद्र कठोलिया 31 मार्च 2025 को कोर्ट में पेश होने के बाद सिर्फ तीन घंटे में पुलिस हिरासत में मृत पाया गया।
  2. पोस्टमॉर्टम में 24 चोटों का खुलासा:
    पीएम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर 24 जख्म मिले — हाथ, छाती, चेहरे और घुटनों तक चोटों के निशान थे। रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई।
  3. परिजनों ने लगाया थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप:
    मृतक के परिवार ने दावा किया कि पुलिस ने दुर्गेंद्र को हिरासत में क्रूरता से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई, और फिर मौत को छिपाने की कोशिश की गई।
  4. राज्य सरकार की दलील खारिज:
    सरकार ने इसे ‘प्राकृतिक मौत’ बताया, पर हाईकोर्ट ने कहा — “चोटें चाहे साधारण हों या गंभीर, राज्य जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।”
  5. हाईकोर्ट का सख्त आदेश:
    कोर्ट ने इसे “कस्टोडियल बर्बरता” बताया और राज्य सरकार को मृतक की पत्नी को ₹3 लाख और माता-पिता को ₹1-1 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया, साथ ही 8 हफ्ते की समयसीमा तय की।

मुआवजे का आदेश

मृतक की पत्नी दुर्गा देवी को 3 लाख रुपए। मृतक के माता-पिता को प्रत्येक 1 लाख रुपए। 8 हफ्ते के भीतर भुगतान अनिवार्य, अन्यथा 9% वार्षिक ब्याज लागू। गृह विभाग के सचिव को निर्देश, मुआवजा समय पर देने और आदेश की प्रति सभी प्रतिवादियों को भेजने के लिए।



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राज्य सरकार के लिए चेतावनी:

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं जनता का भरोसा तोड़ती हैं। राज्य को अपने पुलिसबल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना होगा और डीके बसु दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।



FAQ

  1. धमतरी कस्टोडियल डेथ केस क्या है?
    धमतरी कस्टोडियल डेथ केस मार्च 2025 की वह घटना है, जिसमें धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार आरोपी दुर्गेंद्र कठोलिया की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर 24 चोटों के निशान मिले थे।
  2. धमतरी पुलिस कस्टडी में आरोपी की मौत पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
    हाईकोर्ट ने आरोपी की मौत को पुलिस की बर्बरता और हिरासत में ज्यादती का परिणाम बताया। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को मुआवजा देने का आदेश दिया।
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