धमतरी में RSETI बिल घोटाला नाकाम, एक ही बिल से दो बार भुगतान की कोशिश
NEWS IN SHORT
- धमतरी जिला पंचायत में RSETI बिल में घोटाले का खुलासा।
- संविदा कर्मचारी पर लगा दोहरे भुगतान कराने का गंभीर आरोप।
- लेखा शाखा की सतर्कता से समय रहते पकड़ा गया फर्जीवाड़ा।
- एक ही बिल से दो अलग स्रोतों से राशि आहरण की थी तैयारी।
- पुराने भुगतानों की भी उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज।
NEWS IN DETAIL
जिला पंचायत धमतरी में सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ वित्तीय समावेशन का कार्य देख रहे एक संविदा कर्मचारी पर 'ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान' (RSETI) के प्रशिक्षण बिलों का दोहरा (डबल) भुगतान कराने का आरोप लगा है। हालांकि, लेखा शाखा की मुस्तैदी और सतर्कता के कारण समय रहते इस संदिग्ध फाइल को पकड़ लिया गया, जिससे लाखों रुपए का संभावित वित्तीय नुकसान होने से बच गया।
ऐसे रची गई थी दोहरे भुगतान की साजिश
आरसेटी (RSETI) में आयोजित होने वाले विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का पूरा खर्च संबंधित संस्थान खुद उठाता है। इसके लिए आवश्यक बजट की मांग सीधे केंद्र या राज्य सरकार से की जाती है और राशि भी वहीं से स्वीकृत होकर आती है।
आरोप है कि इस तय नियम और प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए संविदा कर्मचारी ने चालाकी दिखाई। उसने उन्हीं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बिलों की एक और अलग फाइल तैयार कर ली और उसे जिला पंचायत से भी पास कराने की कोशिश की। मकसद साफ था—एक ही काम के बदले दो अलग-अलग जगहों से सरकारी राशि हड़प ली जाए।
लेखाधिकारी की सूझबूझ से टला नुकसान
बड़ी कामयाबी : जिला पंचायत की लेखा शाखा में जब फाइलों की रूटीन स्क्रूटनी (नियमित जांच) चल रही थी, तब यह गड़बड़ी पकड़ में आई।
दस्तावेजों की जांच के दौरान लेखाधिकारी को बिल बेहद संदिग्ध लगे। मामले की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत भुगतान की प्रक्रिया पर रोक लगा दी। इस त्वरित कार्रवाई से सरकारी खजाने को चूना लगने से तो बच गया, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुराने भुगतानों पर भी गहराया शक
इस खुलासे के बाद अब कलेक्ट्रेट और जिला पंचायत गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी कर्मचारी पहले भी इस तरह की धोखाधड़ी कर कई प्रशिक्षण बिलों का दोहरा भुगतान करा चुका होगा।
रिकॉर्ड खंगालने की मांग : अब पुराने वित्तीय रिकॉर्ड, केंद्र-राज्य से मिले बजट और जिला पंचायत में पेश बिलों के मिलान की मांग तेज हो गई है।
कड़ी कार्रवाई की उम्मीद : विभिन्न पक्षों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि शासकीय राशि का दुरुपयोग करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सके। अब देखना होगा कि जिला पंचायत प्रशासन इस मामले में आगे क्या कड़े कदम उठाता है।
TIMELINE
- बजट आवंटन : RSETI प्रशिक्षण का खर्च केंद्र/राज्य सरकार से सीधे स्वीकृत हुआ।
- साजिश : संविदा कर्मी ने उन्हीं बिलों की दूसरी फाइल जिला पंचायत में पेश की।
- जांच/खुलासा : नियमित स्क्रूटनी के दौरान लेखाधिकारी ने संदिग्ध दस्तावेज पकड़े।
- कार्रवाई : सतर्कता बरतते हुए लेखाधिकारी ने तुरंत भुगतान प्रक्रिया पर रोक लगाई।
- वर्तमान : घोटाला टला, अब पुराने भुगतानों की उच्च स्तरीय जांच की मांग।
निष्कर्ष
धमतरी जिला पंचायत का यह मामला प्रशासनिक सजगता का सटीक उदाहरण है, जहाँ लेखा शाखा की तत्परता से लाखों रुपये का घोटाला टल गया। हालांकि, इस घटना ने सरकारी व्यवस्था में मौजूद खामियों और संविदा कर्मचारियों पर निगरानी की कमी को उजागर किया है। अब निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच से ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।
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