फरार रामगोपाल अग्रवाल का नेपाल में ठिकाना, कांग्रेस भवन को बनाया था शराब कोल घोटाले का अड्डा
Arun Tiwari | May 28, 2026, 16:23 IST
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छत्तीसगढ़ के पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तीन साल से फरार हैं। शराब और कोयला घोटाले में उनके खिलाफ एसीबी, ईओडब्ल्यू और ईडी ने कार्रवाई की है। जांच में खुलासा हुआ कि कांग्रेस भवन को घोटाले और वसूली का केंद्र बनाया गया था।
Raipur. छत्तीसगढ़ के शराब और कोयला घोटाले के आरोपी कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तीन साल से फरार हैं। द सूत्र की पड़ताल में सामने आया है कि तीन साल से फरार रामगोपाल ने देश छोड़कर नेपाल को अपना नया ठिकाना बनाया है।
सूत्र कहते हैं कि, इस दौरान उनका वजन 20 किलो कम हो गया है। एसीबी और ईओडब्ल्यू ने अग्रवाल के खिलाफ वारंट जारी किया है। वहीं ईडी ने रामगोपाल की संपत्ति अटैच कर ली है। जांच एजेंसियों की चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है कि रामगोपाल ने कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस भवन को ही घोटाले और वसूली का अड्डा बना लिया था।
शराब और कोयला घोटाले का सारा हिसाब किताब कांग्रेस भवन में ही होता था। अग्रवाल अब तक ईडी या एसीबी के हत्थे नहीं चढ़ पाए हैं। रामगोपाल ,बीजेपी के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर अग्रवाल के समधी हैं। सूत्र बताते हैं कि रामगोपाल के दिल्ली में भी अच्छे संपर्क हैं,जिसके कारण वे अब तक बचते रहे हैं।
ईओडब्ल्यू की चार्जशीट के मुताबिक रामगोपाल को रायपुर के सेठजी के नाम से बुलाया जाता था। रायपुर वाले सेठ यानी कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल ने पीसीसी को घोटालों का अड्डा बना दिया था।
शराब के साथ ही कोल लेवी घोटाले का संचालन भी यहीं से होता था। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 570 करोड़ कोल लेवी घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले के करोड़ों रुपये का लेनदेन कांग्रेस भवन में होता था।
विशेष अदालत में दायर की गई 1500 पन्नों की दूसरी पूरक चार्जशीट में यह जानकारी सामने आई है। चार्जशीट में मुख्य रूप से कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, उनके निजी सहायक एवं पार्टी के लेखाधिकारी देवेंद्र ड़डसेना और कोल सिंडिकेट के प्रमुख सदस्य नवनीत तिवारी के नाम शामिल किए गए हैं। तीनों पर अवैध कोल लेवी के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।
EOW की रिपोर्ट के अनुसार, रामगोपाल का पीए देवेंद्र डड़सेना और नवनीत तिवारी कांग्रेस भवन से लेनदेन का संचालन करते थे। डड़सेना कांग्रेस भवन में बैठकर धनराशि की रिसीविंग और डिस्ट्रीब्यूशन का कार्य संभालता था, जबकि नवनीत तिवारी रायगढ़ क्षेत्र में कोल व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से वसूली करता था।
जांच एजेंसी ने तिवारी को कोल वसूली सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य बताया है। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर यह पूरी व्यवस्था संचालित होती थी।
देवेंद्र डड़सेना जेल में है। EOW का कहना है कि घोटाले में शामिल लोगों ने अवैध धनराशि को अलग-अलग नामधारी खातों में जमा किया और फिर उसे कांग्रेस भवन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाई। आरोप है कि कांग्रेस भवन से ही आगे यह राशि विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर होती थी।
पूरक चार्जशीट में कांग्रेस भवन से हुए लेनदेन का विवरण जुड़ा है। एजेंसी के मुताबिक, यह लेनदेन केवल नकद में नहीं बल्कि बैंक ट्रांसफर और अन्य माध्यमों से भी होता था। जांच में यह भी पाया गया कि इस रकम का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों और निजी लाभ के लिए किया गया।
छत्तीसगढ़ के ढाई हजार करोड़ के शराब घोटाले की जांच कर रही ईडी की चार्जशीट ने एक के बाद एक राज खोले। शराब घोटाले के अवैध कमीशन का बड़ा हिस्सा तत्कालीन कांग्रेस पार्टी को जाता था।
उस समय के पीसीसी कोषाध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल (ramgopal agrawal) का पीए देवेंद्र दड़सेना ये राशि रिसीव करता था। चार्जशीट के अनुसार करोड़ों रुपए कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के पीएस ने रिसीव किए। अग्रवाल को ही रायपुर वाला सेठ जी कहा जाता था। उनको भेजे जाने वाले सामान को कैश कहते थे।
रामगोपाल अग्रवाल की ईडी की जद में तो हैं लेकिन गिरफ्त से बाहर हैं। ईडी कहती है कि वे फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक अग्रवाल को कोई बड़ा कनेक्शन बचा रहा है। क्योंकि जब ईडी चैतन्य बघेल को पकड़ सकती है तो फिर अग्रवाल आखिर पकड़ में क्यों नहीं आ रहे।
ईडी की चार्जशीट में रामगोपाल की बड़ी भूमिका शराब घोटाले में सामने आई है। छत्तीसगढ़ के 2500 करोड़ के शराब घोटाले की अवैध रकम पीसीसी जाती थी और उसके कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का पीए देवेंद्र दड़सेना रिसीव करता था।
ईडी की चार्जशीट के पेज नंबर 15 से रामगोपाल अग्रवाल और उनके आरोपों की कहानी शुरु होती है। पेज नंबर 15,17 और 18 में लिखा है कि जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों के अनुसार, अवैध कमीशन का बड़ा हिस्सा सत्तारूढ़ राजनीतिक दल को दिया जाता था।
जाहिर सत्तारुढ़ दल उस समय कांग्रेस पार्टी थी। ईडी को शराब घोटाले के एक हजार करोड़ को इधर उधर करने वाले पप्पू बंसल ने बताया कि यह अवैध धनराशि अनवर ढेबर के आदमी दिपेन चावड़ा के जरिए से प्राप्त किए जाते थे जो बाद में रामगोपाल अग्रवाल को पहुंचाये जाते थे।
ईडी के अभियोग पत्र के अनुसार रामगोपाल को भेजे जाने वाले अवैध धन को देवेन्द्र दड़सेना नामक व्यक्ति एकत्र करता था, जो उस समय राम गोपाल अग्रवाल के सहायक के रूप में कार्यरत था।
ईडी ने केके श्रीवास्तव और देवेन्द्र दड़सेना से भी पूछताछ की, जिन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने वास्तव में वही धन प्राप्त किया था, जैसा कि पप्पू बंसल ने अपने बयान में बताया। ईडी के मुताबिक 80-100 करोड़ रुपए केके श्रीवास्तव को दिए गए और 860-880 करोड़ रुपए की नकद राशि कांग्रेस भवन में देवेंद्र दड़सेना को दी गई।
ईडी की पूछताछ के बयानों के अनुसार यह नकद राशि रामगोपाल के निर्देशानुसार पप्पू बंसल से प्राप्त की थी, और रामगोपाल ने उन्हें सूचित किया कि यह नकद राशि शराब घोटाले से संबंधित है। इस आधार पर यह साबित होता है कि अवैध राशि राजीव भवन में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के कोषाध्यक्ष के कार्यालय तक पहुंचती थी।
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सूत्र कहते हैं कि, इस दौरान उनका वजन 20 किलो कम हो गया है। एसीबी और ईओडब्ल्यू ने अग्रवाल के खिलाफ वारंट जारी किया है। वहीं ईडी ने रामगोपाल की संपत्ति अटैच कर ली है। जांच एजेंसियों की चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है कि रामगोपाल ने कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस भवन को ही घोटाले और वसूली का अड्डा बना लिया था।
शराब और कोयला घोटाले का सारा हिसाब किताब कांग्रेस भवन में ही होता था। अग्रवाल अब तक ईडी या एसीबी के हत्थे नहीं चढ़ पाए हैं। रामगोपाल ,बीजेपी के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर अग्रवाल के समधी हैं। सूत्र बताते हैं कि रामगोपाल के दिल्ली में भी अच्छे संपर्क हैं,जिसके कारण वे अब तक बचते रहे हैं।
कांग्रेस भवन बना कलेक्शन सेंटर :
शराब के साथ ही कोल लेवी घोटाले का संचालन भी यहीं से होता था। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 570 करोड़ कोल लेवी घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले के करोड़ों रुपये का लेनदेन कांग्रेस भवन में होता था।
विशेष अदालत में दायर की गई 1500 पन्नों की दूसरी पूरक चार्जशीट में यह जानकारी सामने आई है। चार्जशीट में मुख्य रूप से कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, उनके निजी सहायक एवं पार्टी के लेखाधिकारी देवेंद्र ड़डसेना और कोल सिंडिकेट के प्रमुख सदस्य नवनीत तिवारी के नाम शामिल किए गए हैं। तीनों पर अवैध कोल लेवी के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।
सेठ का पीए अवैध राशि का रिसीवर और डिस्ट्रीब्यूटर :
जांच एजेंसी ने तिवारी को कोल वसूली सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य बताया है। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर यह पूरी व्यवस्था संचालित होती थी।
देवेंद्र डड़सेना जेल में है। EOW का कहना है कि घोटाले में शामिल लोगों ने अवैध धनराशि को अलग-अलग नामधारी खातों में जमा किया और फिर उसे कांग्रेस भवन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाई। आरोप है कि कांग्रेस भवन से ही आगे यह राशि विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर होती थी।
पूरक चार्जशीट में कांग्रेस भवन से हुए लेनदेन का विवरण जुड़ा है। एजेंसी के मुताबिक, यह लेनदेन केवल नकद में नहीं बल्कि बैंक ट्रांसफर और अन्य माध्यमों से भी होता था। जांच में यह भी पाया गया कि इस रकम का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों और निजी लाभ के लिए किया गया।
कोर्ड वर्ड में शराब घोटाला:
उस समय के पीसीसी कोषाध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल (ramgopal agrawal) का पीए देवेंद्र दड़सेना ये राशि रिसीव करता था। चार्जशीट के अनुसार करोड़ों रुपए कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के पीएस ने रिसीव किए। अग्रवाल को ही रायपुर वाला सेठ जी कहा जाता था। उनको भेजे जाने वाले सामान को कैश कहते थे।
रामगोपाल अग्रवाल की ईडी की जद में तो हैं लेकिन गिरफ्त से बाहर हैं। ईडी कहती है कि वे फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक अग्रवाल को कोई बड़ा कनेक्शन बचा रहा है। क्योंकि जब ईडी चैतन्य बघेल को पकड़ सकती है तो फिर अग्रवाल आखिर पकड़ में क्यों नहीं आ रहे।
चार्जशीट के पन्ने खोल रहे राज :
ईडी की चार्जशीट के पेज नंबर 15 से रामगोपाल अग्रवाल और उनके आरोपों की कहानी शुरु होती है। पेज नंबर 15,17 और 18 में लिखा है कि जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों के अनुसार, अवैध कमीशन का बड़ा हिस्सा सत्तारूढ़ राजनीतिक दल को दिया जाता था।
जाहिर सत्तारुढ़ दल उस समय कांग्रेस पार्टी थी। ईडी को शराब घोटाले के एक हजार करोड़ को इधर उधर करने वाले पप्पू बंसल ने बताया कि यह अवैध धनराशि अनवर ढेबर के आदमी दिपेन चावड़ा के जरिए से प्राप्त किए जाते थे जो बाद में रामगोपाल अग्रवाल को पहुंचाये जाते थे।
रामगोपाल अग्रवाल को 880 करोड़ :
ईडी ने केके श्रीवास्तव और देवेन्द्र दड़सेना से भी पूछताछ की, जिन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने वास्तव में वही धन प्राप्त किया था, जैसा कि पप्पू बंसल ने अपने बयान में बताया। ईडी के मुताबिक 80-100 करोड़ रुपए केके श्रीवास्तव को दिए गए और 860-880 करोड़ रुपए की नकद राशि कांग्रेस भवन में देवेंद्र दड़सेना को दी गई।
ईडी की पूछताछ के बयानों के अनुसार यह नकद राशि रामगोपाल के निर्देशानुसार पप्पू बंसल से प्राप्त की थी, और रामगोपाल ने उन्हें सूचित किया कि यह नकद राशि शराब घोटाले से संबंधित है। इस आधार पर यह साबित होता है कि अवैध राशि राजीव भवन में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के कोषाध्यक्ष के कार्यालय तक पहुंचती थी।
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