धनबाद में छापे, रायगढ़ तक कनेक्शन, कोयला नेटवर्क फिर चर्चा में
झारखंड के धनबाद में अवैध कोयला खनन और उससे अर्जित कथित काली कमाई पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ का नाम चर्चा में ला दिया है।
28 जुलाई को धनबाद में 31 ठिकानों पर हुई छापेमारी में ED ने कोयला कारोबारी अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली।
कार्रवाई में एलबी सिंह से जुड़े करीब 160 करोड़ रुपए के म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज किए गए, 1.02 करोड़ रुपए नकद जब्त किए गए और 200 से अधिक संदिग्ध अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।
ED का दावा है कि अवैध कोयला खनन, तस्करी और रंगदारी से अर्जित रकम को कई कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से वैध दिखाने की कोशिश की गई।
नेटवर्क के तार छत्तीसगढ़ तक
दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब इस कोल नेटवर्क के साथ छत्तीसगढ़ का नाम जुड़ा हो। जनवरी 2024 में आयकर विभाग ने झारखंड के बड़े कोयला कारोबारियों पर देशव्यापी कार्रवाई की थी।
जांच के केंद्र में अनिल गोयल और उनका कारोबारी समूह था। उस समय झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में कुल 56 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में स्पंज आयरन उद्योगों और उनसे जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई थी।
कार्रवाई के दौरान करीब 3 करोड़ रूपए नकद, सोना-आभूषण, बैंक खातों और लॉकरों से जुड़े दस्तावेज तथा कथित टैक्स चोरी से संबंधित रिकॉर्ड बरामद किए गए थे। इसमें कोल कारोबारी अनिल गोयल के दामाद का नाम भी आया था, जो छत्तीसगढ़ के रायपुर में रहते हैं।
कितनी संपत्तियां छत्तीसगढ़ में
अब जुलाई 2026 की ईडी की कार्रवाई ने उस पुराने घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है। ईडी ने साफ कहा है कि कथित अवैध कमाई को अलग-अलग संस्थाओं के माध्यम से निवेश कर चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
200 से अधिक संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद यह संभावना स्वाभाविक रूप से जांच के दायरे में आती है कि इन निवेशों का भौगोलिक विस्तार किन-किन राज्यों तक है। जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बरामद 200 संपत्तियों के दस्तावेजों में से कई छत्तीसगढ़ में है।
छत्तीसगढ़ इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है। रायगढ़, कोरबा और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में स्पंज आयरन प्लांट, स्टील उद्योग और कोयले पर आधारित औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं।
जनवरी 2024 की आयकर कार्रवाई में रायगढ़ तक जांच का पहुंचना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ईडी जब 200 से अधिक संदिग्ध संपत्तियों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल पूरी करेगी, तब छत्तीसगढ़ में किसी निवेश, कंपनी, संपत्ति या कारोबारी कड़ी का खुलासा होगा।
इसके बाद धनबाद से शुरू हुई यह जांच झारखंड की सीमा पार कर छत्तीसगढ़ तक पहुंचने वाली बड़ी आर्थिक जांच साबित हो सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि जनवरी 2024 की आयकर कार्रवाई और जुलाई 2026 की ईडी जांच, दोनों घटनाओं ने छत्तीसगढ़ को इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में जरूर खड़ा कर दिया है।
FAQ
- धनबाद कोयला मामले में ED ने क्या कार्रवाई की है?
धनबाद में अवैध कोयला खनन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर नकदी, निवेश से जुड़े दस्तावेज और संदिग्ध संपत्तियों के रिकॉर्ड जब्त किए हैं। जांच अभी जारी है। - अवैध कोयला खनन पर क्या सजा मिलती है?
अवैध कोयला खनन पर संबंधित कानूनों के तहत जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। कोयला चोरी, अवैध खनन, परिवहन या अवैध कमाई को छिपाने जैसे मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), भारतीय न्याय संहिता/अन्य आपराधिक कानूनों और मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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