49 हजार बच्चों का सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा- विशेष शिक्षक कब मिलेंगे?

VINAY VERMA | May 23, 2026, 19:57 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को फटकार लगाते हुए विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया दो माह में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षकों की भारी कमी है।

दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। उनके लिए खाली शिक्षकों के पदों को लेकर राज्य को फटकार लगाई है, साथ में पूछा है कि दिव्यांग छात्रों की शिक्षा पर लापरवाही क्यो हो रही है। कोर्ट ने इन बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है। अदालत ने साफ किया कि समावेशी शिक्षा व्यवस्था में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले की अगली समीक्षा जुलाई 2026 में होगी।



  • सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए
  • दो माह में नियुक्ति पूरी करने को कहा
  • 155 बीआरपी और 85 शिक्षकों को मौका मिलेगा
  • 848 पद स्वीकृत, कई सीटें अब भी खाली
  • 49 हजार बच्चों के लिए 3981 शिक्षकों की जरूरत

दो माह में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का आदेश:

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिलना चाहिए। राज्य शासन को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया है। अनुपालन रिपोर्ट भी न्यायालय में पेश करनी होगी।



राजनीश पांडेय बनाम भारत संघ मामले में सुनवाई:

यह आदेश “राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य” मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने विशेष बच्चों की शिक्षा को संवैधानिक जिम्मेदारी बताया। न्यायालय ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होना जरूरी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। साथ ही कई योग्य शिक्षक वर्षों से संविदा और मानदेय पर काम कर रहे हैं।



848 पद स्वीकृत, फिर भी खाली हैं सीटें:

राज्य शासन ने कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया कि प्रदेश में विशेष शिक्षकों के 848 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पदों पर भर्ती के लिए 3 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। अब तक 62 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। जबकि 38 पद अभी भी खाली हैं। बताया गया कि टीईटी संबंधी कारणों से भर्ती पूरी नहीं हो सकी।



155 बीआरपी और 85 शिक्षकों को राहत:

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन संविदा आधार पर काम कर रहे हैं। वहीं माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षक निश्चित मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को स्क्रीनिंग कमेटी के सामने पेश होने का मौका देने के निर्देश दिए हैं।



स्क्रीनिंग कमेटी करेगी पात्रता की जांच:

कोर्ट ने कहा कि सभी अभ्यर्थी अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक दस्तावेज प्रस्तुत करें। यदि वे भारतीय पुनर्वास परिषद यानी आरसीआई की तय योग्यता पूरी करते हैं तो उनकी नियुक्ति पर विधिसम्मत विचार किया जाए। इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।



49 हजार बच्चों के लिए चाहिए 3981 शिक्षक:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में एक अहम तथ्य भी दर्ज किया। अदालत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं। जबकि राज्य में करीब 3981 विशेष शिक्षकों की जरूरत है। मौजूदा व्यवस्था जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। अदालत ने इसे गंभीर स्थिति माना।



समावेशी शिक्षा पर कोर्ट की चिंता:

न्यायालय ने कहा कि विशेष बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। अदालत ने संकेत दिए कि भविष्य में इस मामले की नियमित मॉनिटरिंग की जा सकती है। इससे शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है।



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