छत्तीसगढ़ DMF घोटाला : नियम बदलकर अफसरों ने खाया मोटा कमीशन
NEWS IN SHORT
- EOW ने डीएमएफ घोटाले में 5 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
- अधिकारियों और बिचौलियों के बड़े सिंडीकेट का भंडाफोड़ हुआ।
- पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर नियम बदले।
- वेंडरों से 40 प्रतिशत तक का भारी कमीशन वसूला गया।
- अनिल टुटेजा और रानू साहू समेत कई अफसर नामजद।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने सोमवार को कोर्ट में 5 हजार पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट पेश की है। इस चार्जशीट में पिछली सरकार के दौरान सक्रिय एक बड़े सिंडीकेट का भंडाफोड़ किया गया है, जिसमें अधिकारी, बिचौलिए और ठेकेदार शामिल थे। जांच एजेंसी का दावा है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेते कारोबारियों को टेंडर दिए गए और इसके बदले अफसरों ने करोड़ों रुपए का मोटा कमीशन बटोरा।
नियम बदलकर दिया गया टेंडर
चार्जशीट के अनुसार, खनन प्रभावित क्षेत्रों के स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आरक्षित डीएमएफ फंड का सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग किया गया। सिंडीकेट ने जानबूझकर विकास कार्यों को 'सप्लाई आधारित कार्यों' की ओर मोड़ दिया। स्मार्ट क्लास, आरओ वाटर प्यूरीफायर, कृषि उपकरण और सोलर लाइट जैसे प्रोजेक्ट्स के नाम पर टेंडर जारी किए गए ताकि आसानी से कमीशनखोरी की जा सके। कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा को ठेका दिलाने के लिए टेंडर की शर्तों में नीतिगत स्तर पर बदलाव किए गए थे।
40 प्रतिशत तक वसूला गया अवैध कमीशन
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि सिंडीकेट ने चुनिंदा कंपनियों को ऊंचे दामों पर काम दिलाया और इसके एवज में वेंडरों से 40% तक का अवैध कमीशन वसूला। वर्ष 2019 से 2024 के बीच डीएमएफ फंड में कुल 9188.20 करोड़ रुपए जमा हुए थे, जिसमें से 500 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला होने का अनुमान है। कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा ने इस पूरे नेटवर्क में कैश हैंडलर और बिचौलिए की भूमिका निभाई। उसने वेंडरों से कमीशन वसूल कर 60.75 करोड़ रुपए जुटाए, जिसमें से 14.62 करोड़ रुपए रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा तक पहुंचाए गए। इस लेन-देन की पुष्टि डिजिटल साक्ष्यों और बैंक स्टेटमेंट से हुई है।
टुटेजा और रानू साहू की मुख्य भूमिका
एजेंसी का दावा है कि रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कैबिनेट स्तर पर डीएमएफ नियमों में संशोधन कराया, जिससे सप्लाई आधारित टेंडरों का रास्ता साफ हुआ। इसके अलावा, जिलों के कलेक्टरों पर दबाव बनाकर काम आवंटित कराए गए।
इस घोटाले में सबसे ज्यादा गड़बड़ी कोरबा जिले में सामने आई है, जहां निलंबित आईएएस रानू साहू की मुख्य भूमिका रही। चार्जशीट में तत्कालीन मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और माइनिंग सेक्रेटरी समीर विश्नोई के नाम भी शामिल हैं। इसके साथ ही संजय शेंडे, अशोक अग्रवाल और मुकेश अग्रवाल समेत कई अन्य कारोबारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। ईओडब्ल्यू ने मोबाइल डेटा, व्हाट्सएप चैट, नोटशीट और गवाहों के बयानों को इस मामले में पुख्ता साक्ष्य बनाया है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ DMF घोटाला यह उजागर करता है कि कैसे जन कल्याण के लिए आरक्षित फंड को भ्रष्ट तंत्र ने अपनी तिजोरियों में भर लिया। नियमों में बदलाव और भारी कमीशनखोरी ने विकास कार्यों को ठप किया। ईओडब्ल्यू की यह चार्जशीट दोषियों को सजा दिलाने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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