27 डॉक्टरों की NOC के लिए मंत्रालय पहुंचा प्रस्ताव, जमीन और FD बंधक रखने की शर्तों की होगी जांच
VINAY VERMA | Oct 28, 2026, 17:28 IST
छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों की उच्च शिक्षा पर संकट
Raipur. छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। नीट पीजी की परीक्षा पास करने के बाद वे आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य विशेषज्ञ डॉक्टर बनना है। लेकिन जमीन और संपत्ति गिरवी रखने की शर्त उनके रास्ते में रुकावट बन रही है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने डॉक्टरों को इस बाध्यता से राहत मिलने की उम्मीद जगाई थी।
इसके बावजूद पुराने नियमों के आधार पर बॉन्ड की जांच जारी है। अब 27 डॉक्टरों की फाइल मंत्रालय पहुंच गई है। ये सभी नीट पीजी 2026 पास करने वाले अनुबंधित चिकित्सक हैं।
स्वास्थ्य संचालनालय ने 27 अक्टूबर 2026 को उनके लिए अनुमति और अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने का प्रस्ताव भेजा है। अब अंतिम फैसला शासन को लेना है। डॉक्टरों को डर है कि देरी से उनका पीजी में प्रवेश प्रभावित हो सकता है।
स्वास्थ्य संचालनालय ने 27 अक्टूबर 2026 को मंत्रालय को पत्र भेजा है। यह पत्र लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अवर सचिव को भेजा गया है। इसमें 27 अनुबंधित डॉक्टरों को उच्च शिक्षा की अनुमति देने का प्रस्ताव है।
ये डॉक्टर प्रदेश के अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ हैं। कुछ जिला अस्पतालों में काम कर रहे हैं। कुछ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी CMHO कार्यालयों में तैनात हैं।
नीट पीजी पास करने के बाद ये डॉक्टर आगे पढ़ना चाहते हैं। वे विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए विभागीय अनुमति जरूरी है।
स्वास्थ्य संचालनालय ने इनके जरूरी दस्तावेज मंत्रालय भेजे हैं। इनमें नियुक्ति आदेश और पदस्थापना की जानकारी शामिल है। उपस्थिति और परीक्षा में मिली रैंक का विवरण भी भेजा गया है।
बॉन्ड से जुड़े दस्तावेज भी फाइल में शामिल हैं। इनमें शपथ पत्र, जमीन गिरवी रखने और एफडी बंधक रखने की जानकारी है। अब शासन को इन दस्तावेजों की जांच के बाद फैसला लेना है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है। जब डॉक्टरों को राहत देने की बात कही गई थी, तो जमीन गिरवी रखने की शर्त अब भी क्यों बनी हुई है?
जानकारी के मुताबिक, इस परेशानी से करीब 70 डॉक्टर प्रभावित हैं। इनमें 27 डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने जमीन गिरवी रखकर बॉन्ड जमा किया है।
कई परिवारों के लिए जमीन सबसे बड़ी संपत्ति होती है। ऐसे में उसे गिरवी रखना आसान नहीं है। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। डॉक्टरों को भी भविष्य की चिंता सता रही है।
डॉक्टरों को उम्मीद थी कि सरकार इस बाध्यता को खत्म करेगी। लेकिन अब तक इस संबंध में स्पष्ट लिखित आदेश सामने नहीं आया है।
यहां एक बात समझना जरूरी है। NOC मिलने का मतलब जमीन गिरवी रखने की शर्त खत्म होना नहीं है।
NOC यानी अनापत्ति प्रमाण-पत्र। इसके जरिए विभाग किसी डॉक्टर को आगे की पढ़ाई के लिए अनुमति दे सकता है।
वहीं, बॉन्ड की शर्तें अलग मामला हैं। जमीन या एफडी गिरवी रखने की बाध्यता खत्म करने के लिए सरकार को स्पष्ट फैसला लेना होगा।
ऐसे में डॉक्टरों की नजर अब शासन के अगले आदेश पर है। वे जानना चाहते हैं कि उन्हें किन शर्तों पर पढ़ाई की अनुमति मिलेगी।
स्वास्थ्य संचालनालय के पत्र में 15 जुलाई 2020 के विभागीय परिपत्र का उल्लेख है। इसी परिपत्र के आधार पर बॉन्ड की शर्तों की जांच की जा रही है।
27 डॉक्टरों की फाइल इसी प्रक्रिया के तहत मंत्रालय भेजी गई है। अब शासन को तय करना है कि उन्हें NOC कैसे जारी की जाए।
साथ ही जमीन और एफडी गिरवी रखने की शर्त पर भी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। जब तक आदेश जारी नहीं होता, डॉक्टरों की परेशानी बनी रह सकती है।
नीट पीजी पास करने के बाद डॉक्टरों के लिए अगला कदम काउंसिलिंग है। इसी प्रक्रिया से उन्हें आगे की पढ़ाई में प्रवेश मिलता है।
इसके लिए जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे होने चाहिए। NOC मिलने में देरी हुई, तो प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
डॉक्टरों को इसी बात की चिंता है। उन्हें डर है कि कहीं उनकी मेहनत पर पानी न फिर जाए। विशेषज्ञ बनने का मौका भी प्रभावित हो सकता है।
पटवारियों की हड़ताल से जुड़ी प्रशासनिक परेशानियां भी चिंता बढ़ा रही हैं। जमीन से जुड़े दस्तावेज जुटाने में दिक्कत आने की आशंका है।
डॉक्टरों की उच्च शिक्षा का लाभ छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मिल सकता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से सरकारी अस्पतालों को मदद मिलेगी।
मरीजों को भी बेहतर इलाज के विकल्प मिल सकते हैं। इसलिए डॉक्टरों की आगे की पढ़ाई का रास्ता आसान बनाना जरूरी है।
लेकिन मौजूदा स्थिति में अनुमति और बॉन्ड की शर्तों को लेकर स्पष्टता नहीं है। ऐसे में डॉक्टरों को इंतजार करना पड़ रहा है।
अब स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से कई सवाल पूछे जा रहे हैं।
फिलहाल 27 डॉक्टरों की NOC का प्रस्ताव मंत्रालय में है। जमीन गिरवी रखने की बाध्यता पर भी अंतिम निर्णय का इंतजार है।
डॉक्टर चाहते हैं कि सरकार जल्द स्थिति स्पष्ट करे। समय पर फैसला होने से उन्हें आगे की पढ़ाई की तैयारी करने में मदद मिलेगी।
वहीं, देरी होने पर उनके प्रवेश पर असर पड़ने की आशंका है। अब देखना होगा कि सरकार कब तक फैसला लेती है। डॉक्टरों को राहत देने का भरोसा कब पूरा होता है, इस पर सबकी नजर है।
स्वास्थ्य संचालनालय ने 27 अक्टूबर 2026 को उनके लिए अनुमति और अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने का प्रस्ताव भेजा है। अब अंतिम फैसला शासन को लेना है। डॉक्टरों को डर है कि देरी से उनका पीजी में प्रवेश प्रभावित हो सकता है।
27 डॉक्टरों की फाइल मंत्रालय में
ये डॉक्टर प्रदेश के अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ हैं। कुछ जिला अस्पतालों में काम कर रहे हैं। कुछ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी CMHO कार्यालयों में तैनात हैं।
नीट पीजी पास करने के बाद ये डॉक्टर आगे पढ़ना चाहते हैं। वे विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए विभागीय अनुमति जरूरी है।
स्वास्थ्य संचालनालय ने इनके जरूरी दस्तावेज मंत्रालय भेजे हैं। इनमें नियुक्ति आदेश और पदस्थापना की जानकारी शामिल है। उपस्थिति और परीक्षा में मिली रैंक का विवरण भी भेजा गया है।
बॉन्ड से जुड़े दस्तावेज भी फाइल में शामिल हैं। इनमें शपथ पत्र, जमीन गिरवी रखने और एफडी बंधक रखने की जानकारी है। अब शासन को इन दस्तावेजों की जांच के बाद फैसला लेना है।
राहत का वादा, लेकिन शर्तें अब भी लागू
जानकारी के मुताबिक, इस परेशानी से करीब 70 डॉक्टर प्रभावित हैं। इनमें 27 डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने जमीन गिरवी रखकर बॉन्ड जमा किया है।
कई परिवारों के लिए जमीन सबसे बड़ी संपत्ति होती है। ऐसे में उसे गिरवी रखना आसान नहीं है। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। डॉक्टरों को भी भविष्य की चिंता सता रही है।
डॉक्टरों को उम्मीद थी कि सरकार इस बाध्यता को खत्म करेगी। लेकिन अब तक इस संबंध में स्पष्ट लिखित आदेश सामने नहीं आया है।
NOC और बॉन्ड की शर्तें अलग-अलग
NOC यानी अनापत्ति प्रमाण-पत्र। इसके जरिए विभाग किसी डॉक्टर को आगे की पढ़ाई के लिए अनुमति दे सकता है।
वहीं, बॉन्ड की शर्तें अलग मामला हैं। जमीन या एफडी गिरवी रखने की बाध्यता खत्म करने के लिए सरकार को स्पष्ट फैसला लेना होगा।
ऐसे में डॉक्टरों की नजर अब शासन के अगले आदेश पर है। वे जानना चाहते हैं कि उन्हें किन शर्तों पर पढ़ाई की अनुमति मिलेगी।
वर्ष 2020 के नियमों के आधार पर जांच
27 डॉक्टरों की फाइल इसी प्रक्रिया के तहत मंत्रालय भेजी गई है। अब शासन को तय करना है कि उन्हें NOC कैसे जारी की जाए।
साथ ही जमीन और एफडी गिरवी रखने की शर्त पर भी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। जब तक आदेश जारी नहीं होता, डॉक्टरों की परेशानी बनी रह सकती है।
पीजी काउंसिलिंग की समयसीमा से बढ़ी चिंता
इसके लिए जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे होने चाहिए। NOC मिलने में देरी हुई, तो प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
डॉक्टरों को इसी बात की चिंता है। उन्हें डर है कि कहीं उनकी मेहनत पर पानी न फिर जाए। विशेषज्ञ बनने का मौका भी प्रभावित हो सकता है।
पटवारियों की हड़ताल से जुड़ी प्रशासनिक परेशानियां भी चिंता बढ़ा रही हैं। जमीन से जुड़े दस्तावेज जुटाने में दिक्कत आने की आशंका है।
डॉक्टर विशेषज्ञ बनेंगे, तो प्रदेश को होगा फायदा
मरीजों को भी बेहतर इलाज के विकल्प मिल सकते हैं। इसलिए डॉक्टरों की आगे की पढ़ाई का रास्ता आसान बनाना जरूरी है।
लेकिन मौजूदा स्थिति में अनुमति और बॉन्ड की शर्तों को लेकर स्पष्टता नहीं है। ऐसे में डॉक्टरों को इंतजार करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री से डॉक्टरों के सवाल
- जमीन और एफडी गिरवी रखने की बाध्यता कब खत्म होगी?
- क्या सरकार इस संबंध में लिखित आदेश जारी करेगी?
- पहले से जमीन गिरवी रख चुके 27 डॉक्टरों को क्या राहत मिलेगी?
- क्या काउंसिलिंग से पहले डॉक्टरों को NOC मिल पाएगी?
फैसले का इंतजार कर रहे डॉक्टर
डॉक्टर चाहते हैं कि सरकार जल्द स्थिति स्पष्ट करे। समय पर फैसला होने से उन्हें आगे की पढ़ाई की तैयारी करने में मदद मिलेगी।
वहीं, देरी होने पर उनके प्रवेश पर असर पड़ने की आशंका है। अब देखना होगा कि सरकार कब तक फैसला लेती है। डॉक्टरों को राहत देने का भरोसा कब पूरा होता है, इस पर सबकी नजर है।
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