राजस्थान शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा, PTI समेत 4 आरोपियों ने कोर्ट में किया सरेंडर
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 28, 2026, 16:57 IST
फर्जी ताइक्वांडो सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी
राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी खेल प्रमाण-पत्रों के इस्तेमाल का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रेड थर्ड टीचर सीधी भर्ती परीक्षा-2022 में कथित फर्जी ताइक्वांडो सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने के मामले में PTI समेत चार आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। जांच में आरोप है कि दलालों के जरिए लाखों रुपये देकर बैकडेट में खेल प्रमाण-पत्र बनवाए गए। SOG की जांच में प्रमाण-पत्र तैयार करने और सत्यापन रिपोर्ट भेजने से जुड़ा नेटवर्क भी सामने आया है। इस मामले में पहले ही 20 अभ्यर्थियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
PTI समेत चार आरोपियों ने किया सरेंडर
SOG के एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक, सरेंडर करने वालों में PTI रामचंद्र बेनीवाल भी शामिल है। वह नागौर जिले के डेह का निवासी है और वर्तमान में ब्यावर जिले के सिरमा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में पदस्थ है।
अन्य आरोपियों में बाड़मेर निवासी श्रीमति देवी, जालोर निवासी धोलाराम और बालोतरा निवासी विकास कुमार शामिल हैं। चारों ने जयपुर महानगर-द्वितीय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में आत्मसमर्पण किया।
SOG के अनुसार, तीन अन्य आरोपियों के सर्विस रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी इस मामले में प्रमाण-पत्रों की वास्तविकता और सरकारी नौकरी हासिल करने में उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही है।
भर्ती में खेल कोटे के तहत हुआ था चयन
ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्रों के आधार पर 38 अभ्यर्थियों के नाम चयन सूची में आए थे। चयन के बाद इन अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्र पेश किए थे।
बाद में इन प्रमाण-पत्रों को लेकर गड़बड़ी की जानकारी सामने आई। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने दलालों के जरिए फर्जी प्रमाण-पत्र हासिल किए, ताकि खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरी मिल सके।
मामले से जुड़े इनपुट मिलने के बाद SOG ने केस दर्ज कराया और जांच शुरू की। इसके बाद प्रमाण-पत्रों की सत्यता, उन्हें जारी करने वालों और भर्ती प्रक्रिया में उनके इस्तेमाल की जांच की गई।
फर्जी ई-मेल से भेजी गई सत्यापन रिपोर्ट
इस मामले में फर्जी ई-मेल के जरिए सत्यापन रिपोर्ट भेजने के आरोपी बिमलेन्दु कुमार झा और उसके साथी कमल सिंह को 7 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि फर्जी प्रमाण-पत्रों को सही दिखाने के लिए सत्यापन प्रक्रिया का किस तरह इस्तेमाल किया गया। इस मामले में प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने वाले लोगों और सत्यापन रिपोर्ट भेजने वालों के बीच संबंध भी जांच का अहम हिस्सा है।
PTI पर पांच-पांच लाख रुपये लेकर प्रमाण-पत्र देने का आरोप
जांच में जिन अभ्यर्थियों के नाम सामने आए, उनमें मुमताज, बबीता जाखड़, मांगिलाल, नरेंद्र बिडियासर, ममता कुमारी और ज्योतिरादित्य शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, इनसे कथित तौर पर पैसे लेकर प्रमाण-पत्र दिए गए थे।
इसके अलावा रामचंद्र बेनीवाल और पहले गिरफ्तार आरोपी जगदीश सारण ने हरियाणा के रोहतक निवासी सतीश डूल से राष्ट्रीय स्तर के प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए संपर्क किया था।
आरोप है कि सतीश डूल ने विकास कुमार, धोलाराम और देवी से चार-चार लाख रुपये लेकर बैकडेट में ताइक्वांडो प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए। इन आरोपों की जांच के जरिए SOG यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाण-पत्र तैयार करने और अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का पूरा तरीका क्या था।
60 हजार रुपये लेकर प्रमाण-पत्र देने की बात भी आई सामने
जांच एजेंसी इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि इन प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया था और क्या इनका संबंध सरकारी भर्ती में कथित फर्जीवाड़े से है।
इस मामले में प्रमाण-पत्रों की तारीख, उनकी वैधता और उन्हें जारी करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि किसने प्रमाण-पत्र तैयार किए और किन लोगों ने उनका इस्तेमाल किया।
20 अभ्यर्थियों समेत कई आरोपी पहले गिरफ्तार
पहले गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर फर्जी प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद प्रमाण-पत्र तैयार करने वाले लोगों और कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई गई।
अब चार और आरोपियों के सरेंडर करने के बाद जांच में उनके संबंधों और भूमिका से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। SOG यह पता लगाने में लगी है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जी प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल किस स्तर तक हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
आगे क्या?
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी प्रमाण-पत्रों का नेटवर्क कितने लोगों तक फैला था और भर्ती प्रक्रिया में सत्यापन रिपोर्ट का इस्तेमाल कैसे हुआ। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले सबूतों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल मामले में चार आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया है और पहले ही 20 अभ्यर्थियों समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।
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