राजस्थान कांग्रेस के नेताओं की दिल्ली में अग्निपरीक्षा, गहलोत-पायलट की साख दांव पर; राहुल गांधी को जाएगी रिपोर्ट

Mukesh Sharma | Oct 26, 2026, 18:29 IST
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वोट बचाओ देश बचाओ महारैली
वोट बचाओ देश बचाओ महारैली

राजस्थान में चल रहे पंचायत चुनाव के बीच और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार के ऐन पहले इंडिया गठबंधन की एक नवंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित वोट बचाओ देश बचाओ महारैली ने राजस्थान के कांग्रेस नेताओं सहित प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की नींद उड़ा दी है। रैली में भीड़ ही नेताओं का भविष्य तय करेगा।

वोट बचाओ देश बचाओ महारैली में नेताओं को इस बात से ज्यादा टेंशन है कि कौन नेता कितने वाहनों में कितनी संख्या में कार्यकर्ताओं को लाया। क्योकि ये सभी रिपोर्ट राहुल गांधी के पास भी जाएगी। कांग्रेस महासचिव संगठन के.सी.वेणुगोपाल ने रविवार को कांग्रेस नेताओं की बैठक में साफ कहा है कि नेताओं का भविष्य रैली में भीड़ की संख्या के हिसाब से तय होगा।

पार्टी हाईकमान की ओर से राजस्थान कांग्रेस को दिए गए एक लाख की भीड़ के विशाल टारगेट ने न केवल पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत पार्टी के तमाम शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है ।

रविवार को जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में रैली की तैयारियों की समीक्षा बैठक लेने पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में इस लक्ष्य का ऐलान किया।

पहले था 50 हजार का टारगेट

पहले प्रदेश कांग्रेस को करीब 50 हजार कार्यकर्ताओं को ले जाने का टारगेट दिया था, लेकिन इसे अचानक बढ़ाकर एक लाख कर दिया है। यह पहला मौका है जब किसी राष्ट्रीय स्तर की रैली के लिए राजस्थान कांग्रेस को इतने बड़े जनसैलाब को जुटाने की चुनौती दी गई है।

पंचायत चुनाव व दीपावली बनाम दिल्ली महारैली

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी और पार्टी नेताओं के सामने पंचायत चुनाव बड़ी व्यावहारिक चुनौती बने हुए हैं। क्यों कि एक ओर कार्यकर्ता और स्थानीय नेता ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनावों की तैयारियों, प्रचार और उम्मीदवार प्रबंधन में व्यस्त हैं। वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी संख्या में लोगों को दिल्ली कूच कराना बसों, भोजन और दूसरी व्यवस्थाओं को साधना बड़ी चुनौती है।

इसके अतिरिक्त दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार के मात्र पांच दिन पहले कार्यकर्ताओं को ले जाना बड़ी चुनौती साबित होगा।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यदि स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ताओं के ऐन चुनाव के बीच में दिल्ली जाने से पंचायत चुनाव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि अधिकांश कार्यकर्ता जहां मतदान हो चुका है वहीं से जाएंगे। कोटपूतली-बहरोड़ अलवर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, झुन्झुनू, भरतपुर, दौसा, करौली, सवाईमाधोपुर, कोटा व जयपुर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का वॉर रुम जिला अध्यक्षों, विधायकों व अन्य नेताओं के साथ समन्वय कर रहा है। एआईसीसी के सात पर्यवेक्षक भी समन्वय कर रहे हैं। निश्वित रुप से टारगेट के अनुरुप ही कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचेगें।

दिग्गजों की साख दांव पर

एक नवंबर की दिल्ली में महारैली राजस्थान कांग्रेस के लगभग हर बड़े चेहरे के लिए परफॉर्मेंस टेस्ट साबित होने जा रही है।

प्रदेश अध्यक्ष के रूप में गोविंद सिंह डोटासरा के सामने संगठन को इस कठिन टारगेट को पूरा करने के लिए समन्वय बनाने और पूरा करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सर्कुलर जारी कर जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, भरतपुर, करौली और जयपुर ग्रामीण जैसे जिलों को 10-10 हजार की भीड़ जुटाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

इनके अलावा राजस्थान कांग्रेस के दो सर्वमान्य नेता अशोक गहलोत व सचिन पायलट के जनाधार और उनके समर्थक नेताओं की ताकत का वास्तविक आकलन भी इस रैली के जरिए होगा। दोनों ही दिग्गजों पर अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्र से कार्यकर्ताओं को भारी संख्या में दिल्ली भेजने का दबाव रहेगा।

असली परीक्षा तो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले अलवर के पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह की होगी। इन दोनों के लिए ही दिल्ली-एनसीआर से सटे मेवात और अलवर जिले से रिकॉर्ड भीड़ जुटाना चुनौती होगी।

इनके अलावा पूर्व मंत्री शांति धारीवाल,प्रमोद जैन भाया, डॉ.रघु शर्मा और प्रताप सिंह खाचरियावास के साथ ही जयपुर के दो विधायक अमीन कागजी तथा रफीक खान सहित कांग्रेस के सभी 67 विधायकों सहित विधायक व सांसद प्रत्याशी रहे नेताओं की भी यह रैली परीक्षा की घड़ी साबित होगी।

संगठन सृजन अभियान की साख भी दांव पर

एक नवंबर की दिल्ली रैली न केवल राज्य के नेताओं के लिए बल्कि कांग्रेस आलाकमान के लिए भी परीक्षा की घड़ी साबित होने वाली है।

दरअसल कांग्रेस आलाकमान ने ही विधायकों व दिग्गज नेताओं की मर्जी से जिलाध्यक्षों की नियुक्ति बंद करने की मंशा से संगठन सृजन अभियान के तहत नेताओं व आम कार्यकर्ता की राय से ही जिला अध्यक्ष बनाए हैं। इसलिए संगठन सृजन अभियान के तहत सर्वसम्मति से बनाए गए वर्तमान जिला अध्यक्षों के लिए भी रैली असली परीक्षा साबित होने वाली है।

राजस्थान पंचायत चुनाव: सांसद राजकुमार रोत के गढ़ में चाचा हारे, कई दिग्गजों को झटका | Rajasthan Panchayat Elections: Uncle loses in MP Rajkumar Roat's stronghold, many stalwarts dealt a blow
राजस्थान पंचायत चुनाव: सांसद राजकुमार रोत के गढ़ में चाचा हारे, कई दिग्गजों को झटका
26 Oct 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
डूंगरपुर जिले में ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजों ने कई बड़े नेताओं के सियासी समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत को अपनी ही गृह पंचायत खरवरखुनिया में झटका लगा। यहां उनके चाचा सोहनलाल सरपंच का चुनाव हार गए। भगवतीलाल खराड़ी ने उन्हें 15 वोटों से हराया। दूसरी ओर, सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा के परिवार ने अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी।
डूंगरपुर जिले में ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजों ने कई बड़े नेताओं के सियासी समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत को अपनी ही गृह पंचायत खरवरखुनिया में झटका लगा। यहां उनके चाचा सोहनलाल सरपंच का चुनाव हार गए। भगवतीलाल खराड़ी ने उन्हें 15 वोटों से हराया। दूसरी ओर, सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा के परिवार ने अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी।

सीधे राहुल गांधी तक पहुंचेगी रिपोर्ट

बताया जा रहा है कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने हवा-हवाई दावों पर यकीन न करने का फैसला किया है। रैली में नेताओं व जिलाध्यक्षों की मॉनिटरिंग के लिए दिल्ली में प्रवेश के रास्तों पर चेक पोस्ट बनाई जाएंगी। यहां पर कौन कितनी बसें या गाड़ियां लेकर आ रहा है ? उसमें कितने कार्यकर्ता सवार हैं और गाड़ियों के नंबर आदि की वीडियोग्राफी करके रिकार्ड तैयार होगा। बताया जा रहा है कि चेक पोस्ट के जरिए मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट तैयार करके राहुल गांधी को दी जाएगी।

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बाड़मेर के छाछरो गांव में 77 साल के पदमसिंह सोढ़ा ने सरपंच का चुनाव जीतकर नई पहचान बनाई है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना की मदद करने वाले पदमसिंह ने 24 अक्टूबर को हुए चुनाव में 338 वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें 950 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी धना राम को 612 वोट मिले।
बाड़मेर के छाछरो गांव में 77 साल के पदमसिंह सोढ़ा ने सरपंच का चुनाव जीतकर नई पहचान बनाई है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना की मदद करने वाले पदमसिंह ने 24 अक्टूबर को हुए चुनाव में 338 वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें 950 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी धना राम को 612 वोट मिले।

क्यों मिला राजस्थान को एक लाख का भारी टारगेट?

कांग्रेस हाईकमान के गणित के अनुसार, राजस्थान और हरियाणा दो ऐसे राज्य हैं जिनकी भौगोलिक स्थिति दिल्ली के सबसे नजदीक है। राजस्थान के अलवर, भरतपुर, कोटपूतली-बहरोड़ जैसे जिले सीधे दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा हैं। इसके अलावा जयपुर,सीकर,झुंझुनूं,दौसा और नीमकाथाना से दिल्ली की दूरी महज 3 से 4 घंटे की है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि पंचायत चुनावों के घमासान के बीच और दीपावली से ऐन पहले राजस्थान कांग्रेस के तमाम दिग्गज और संगठन के नए सिपाही इस चुनौती से किस तरह पार पाते हैं और एक नवंबर को रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन करने की अग्नि परीक्षा में पास होते हैं या नहीं।

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