राजस्थान यूनिवर्सिटी में HOD का अजब खेल; विषय से नहीं था मेल, अब 4 विभागों के हेड बदले गए
Jageshwar Prasad | Oct 26, 2026, 15:35 IST
RU के चार विभागों में नए विभागाध्यक्ष नियुक्त, संबंधित विषयों के शिक्षकों को कमान
राजस्थान यूनिवर्सिटी में अब दूसरे विषयों के प्रोफेसर किसी और विभाग के अध्यक्ष नहीं बन सकेंगे। ऐसे प्रोफेसरों को HOD बनाए जाने पर सवाल उठे थे। इसके बाद कुलपति भगवती प्रसाद सारस्वत ने नियमों की जांच कराई। अब चार विभागों में उन्हीं विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को नया HOD बनाया गया है।
राजस्थान यूनिवर्सिटी (Rajasthan University) ने प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने चार प्रमुख विभागों में उन विभागाध्यक्षों (HoDs) को उनके पद से हटा दिया है जो अन्य (असंबंधित) विषयों से ताल्लुक रखते थे।
मीडिया रिपोर्टों में यह मुद्दा उठाया गया था कि कैसे गैर-संबंधित विषयों के प्रोफेसर दूसरे विभागों की कमान संभाल रहे हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए वाइस-चांसलर (VC – Vice-Chancellor) प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने नियमों की समीक्षा की और संबंधित विभागों के योग्य शिक्षकों को ही विभागाध्यक्ष नियुक्त कर दिया।
इन विभागों में हुई
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, चार विभागों में असिस्टेंट प्रोफेसर्स को बतौर HoD जिम्मेदारी सौंपी गई है:
शारीरिक शिक्षा विभाग में अभी तक बदलाव न होने के पीछे एक तकनीकी कारण है। इस विभाग में फैकल्टी सदस्यों को 'असिस्टेंट प्रोफेसर' के बजाय 'असिस्टेंट डायरेक्टर' के रूप में नामित किया जाता है।
यूनिवर्सिटी के नियमों में असिस्टेंट प्रोफेसर को HoD बनाने का प्रावधान तो है, लेकिन असिस्टेंट डायरेक्टर पद का उल्लेख न होने के कारण तकनीकी पेच फंस गया है। हालांकि, वीसी ने स्पष्ट किया है कि दोनों पदों का वेतन और स्टेटस समान है तथा इस तकनीकी समस्या का समाधान जल्द ही निकाल लिया जाएगा।
जियोलॉजी विभाग की नई HoD बनाई गईं आशा सक्सेना ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि दूसरे विषयों के प्रोफेसरों को विभाग की वास्तविक समस्याओं और शैक्षणिक जरूरतों को समझने में कठिनाई होती है। विभाग के ही व्यक्ति को कमान मिलने से विकास कार्यों को गति मिलेगी।
वहीं, राजस्थान यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (RUTA – Rajasthan University Teachers' Association) के अध्यक्ष नवीन शर्मा ने भी इस निर्णय को उत्साहजनक बताया है। उनका मानना है कि इससे संबंधित विभागों में शोध (Research) और शैक्षणिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
मीडिया रिपोर्टों में यह मुद्दा उठाया गया था कि कैसे गैर-संबंधित विषयों के प्रोफेसर दूसरे विभागों की कमान संभाल रहे हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए वाइस-चांसलर (VC – Vice-Chancellor) प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने नियमों की समीक्षा की और संबंधित विभागों के योग्य शिक्षकों को ही विभागाध्यक्ष नियुक्त कर दिया।
इन विभागों में हुई नए HoD की नियुक्ति
- मुकेश कुमार: उर्दू और फारसी विभाग
- आशा सक्सेना: जियोलॉजी (भूविज्ञान) विभाग
- संतोष गुप्ता: लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान) विभाग
- नेहा अरोड़ा: स्टैटिस्टिक्स (सांख्यिकी) विभाग
शारीरिक शिक्षा विभाग में क्यों है तकनीकी अड़चन?
यूनिवर्सिटी के नियमों में असिस्टेंट प्रोफेसर को HoD बनाने का प्रावधान तो है, लेकिन असिस्टेंट डायरेक्टर पद का उल्लेख न होने के कारण तकनीकी पेच फंस गया है। हालांकि, वीसी ने स्पष्ट किया है कि दोनों पदों का वेतन और स्टेटस समान है तथा इस तकनीकी समस्या का समाधान जल्द ही निकाल लिया जाएगा।
शिक्षकों और संघ ने किया फैसले का स्वागत
वहीं, राजस्थान यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (RUTA – Rajasthan University Teachers' Association) के अध्यक्ष नवीन शर्मा ने भी इस निर्णय को उत्साहजनक बताया है। उनका मानना है कि इससे संबंधित विभागों में शोध (Research) और शैक्षणिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
FAQs
- राजस्थान विश्वविद्यालय ने विभागाध्यक्षों (HoDs) की नियुक्तियों में क्या बदलाव किए हैं?
राजस्थान विश्वविद्यालय ने चार प्रमुख विभागों में उन विभागाध्यक्षों को हटा दिया है जो असंबंधित विषयों से थे, और संबंधित विभागों के योग्य शिक्षकों को नए HoD के रूप में नियुक्त किया है। - शारीरिक शिक्षा विभाग में बदलाव क्यों नहीं किया गया?
शारीरिक शिक्षा विभाग में बदलाव न होने का कारण तकनीकी है, क्योंकि वहाँ फैकल्टी सदस्यों को 'असिस्टेंट डायरेक्टर' के रूप में नामित किया जाता है, जबकि यूनिवर्सिटी के नियमों में असिस्टेंट प्रोफेसर को HoD बनाने का प्रावधान है। - नई नियुक्तियों के संबंध में शिक्षकों और संघों की प्रतिक्रिया क्या है?
शिक्षकों और संघों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, जिसमें कहा गया है कि संबंधित विषयों के प्रोफेसरों को विभाग की समस्याओं को समझने में आसानी होगी और इससे शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
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